उपलब्धि: बर्फ और बंदूकों की छाया से बाहर निकलता कश्मीर, अब खेल के मैदान में गढ़ रहा है भविष्य
Varanasi News: सिगरा स्टेडियम में आयोजित 72वीं वॉलीबॉल नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए जम्मू-कश्मीर की टीम भी पहुंची है। यह टीम सिर्फ एक मुकाबला नहीं खेल रही, बल्कि बदले हुए हालात और उभरते स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर की कहानी भी बयान कर रही है।
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कभी सीमित संसाधन, कठिन हालात और अनिश्चित भविष्य। अब वही जम्मू-कश्मीर खेलों के जरिए अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। 72वीं वॉलीबॉल नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाराणसी पहुंची जम्मू-कश्मीर की टीम सिर्फ एक मुकाबला नहीं खेल रही, बल्कि बदले हुए हालात, बढ़ती सरकारी तवज्जो और उभरते स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर की कहानी भी बयान कर रही है। इस टीम में कश्मीर के दो डिवीजन, जम्मू और श्रीनगर के 10-10 खिलाड़ी शामिल हैं।
टीम कोच बलविंदर सिंह जमवाल से अमर उजाला की हुई खास बातचीत में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं और संसाधनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जहां पहले जम्मू-कश्मीर में खेलों को लेकर स्कोप कम था, वहीं अब सरकार के साथ-साथ स्पोर्ट्स एसोसिएशन भी खेल और खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
जम्मू-कश्मीर में जिला स्तर पर स्टेडियम और खेल मैदान तैयार किए जा रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय और राज्य स्तर के बेहतर खिलाड़ी तैयार किए जा सकें। अब यहां क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल और जूडो जैसे खेलों को सरकार द्वारा स्पॉन्सर किया जा रहा है।
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कश्मीर के मौसमी वातावरण के कारण यहां लंबे समय तक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना संभव नहीं होता। इसी वजह से मौसम के अलग-अलग उतार-चढ़ाव के अनुसार खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। खेलों के दृष्टिकोण से राज्य को दो डिवीजन में विभाजित किया गया है, जहां छह-छह महीने तक खिलाड़ियों को तैयार किया जाता है।
बलविंदर सिंह जमवाल ने बताया कि कुछ वर्षों पहले तक जम्मू-कश्मीर में खेलों को लेकर जागरूकता की कमी थी। खिलाड़ी तो शुरू से थे, लेकिन प्रदेश की स्थिति ऐसी नहीं थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकें। कश्मीर के बदलते हालात के साथ अब यहां खिलाड़ियों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।