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IIT BHU: आईआईटी बीएचयू में बनेगा हाइड्रोजन इंक्यूबेशन सेंटर, पांच साल में 50 स्टार्टअप का होगा चयन
Fri, 12 Dec 2025 05:14 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Fri, 12 Dec 2025 05:14 PM IST
सार
आईआईटी बीएचयू में हाइड्रोजन इंक्यूबेशन सेंटर बनेगा। यहां फसल के अवशेष से कम दाम में हाइड्रोजन बनाएंगे। वहीं आसपास के इंजीनियरिंग-तकनीकी संस्थानों को सक्षम बनाया जाएगा।
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IIT BHU
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी और गोरखपुर के बीच हाइड्रोजन ट्रेन और बसों के संचालन के लिए आईआईटी बीएचयू में तैयारियां शुरू हो गईं हैं। इसके लिए बनने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत एक हाइड्रोजन इंक्यूबेशन सेंटर बनाया जाएगा। वहीं, आसपास के इंजीनियरिंग संस्थानों और तकनीकी कॉलेजों की वैज्ञानिकता बढ़ाई जाएगी। उन्हें शोध सक्षम बनाया जाएगा।
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संस्थान फसलों के अवशेष से हाइड्रोजन की लागत को सस्ता और सुलभ बनाने का काम करेगा। वहीं, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी को लेकर हर साल 10 और पांच साल में 50 स्टार्टअप चयन किया जाएगा। स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरिंग और अनुसंधान सुविधाओं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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यूपी सरकार से मिली स्वीकृति के बाद आईआईटी बीएचयू के सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रीतम सिंह को समन्वयक और सह-समन्वयक्र डॉ. जेवी तिर्की, डॉ. अखिलेंद्र प्रताप सिंह व डॉ. आशा गुप्ता को बनाया गया है। डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन दो तरह से किया जा सकता है। पहला बायोमास और दूसरा इलेक्ट्रोलाइजर आधारित। प्रदेश में बायोमास जैसे कि धान, गेहूं और गन्ने के वेस्ट की पर्याप्त उपलब्धता है। इससे हाइड्रोजन बनाना आर्थिक रूप से भी ज्यादा फायदेमंद है।
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हब-एंड-स्पोक मॉडल पर होगा काम
हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत आसपास के इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों को स्पोक के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें उन्हें कोर्स बनाने के लिए मदद की जाएगी। प्रशिक्षण और फैकल्टी विकास पर काम किया जाएगा। मेंटरिंग और तकनीकी एग्जीबिशन भी लगाई जाएगी। साथ ही सेंटर हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, परिवहन, उपयोग और अन्य अनुसंधान-आधारित पहलुओं पर राज्य सरकार को नीतिगत सुझाव भी देगा।