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गाजीपुर में प्रशासन मस्त जनता त्रस्तः इन किसानों का हाल जानकर आप भी यही कहेंगे
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/गाजीपुर
Updated Thu, 23 Feb 2017 10:23 PM IST
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माइनर टूटने से तबाह हो गए सुगवलिया के किसान
- फोटो : अमर उजाला
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गाजीपुर जिले के रेवतीपुर ब्लाक के अधियारा से बड़ौरा गांव तक जाने वाली माइनर कई वर्ष से जर्जर है। सुगवलिया गांव के किसानों के लिए तो माइनर अभिशाप बन गई है। जब भी पानी छोड़ा जाता है, माइनर के टूटे हिस्से से सुगलिया गांव के किसानों के खेत जलमग्न हो जाते हैं।
नतीजा, किसान परिश्रम कर जिस फसल को तैयार करते हैं, पकने से पहले ही बर्बाद हो जाती है। खास बात यह है कि किसानों को अपनी फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा नहीं मिल पाता है।
किसानों द्वारा बार-बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी क्षतिग्रस्त माइनर की मरम्मत कराए बगैर पानी छोड़ा जा रहा है। 20 फरवरी को अंधियारा-बड़ौरा माइनर में पानी छोड़े जाने के कारण सुगवलिया गांव के पास टूटी माइनर से खेतों में पानी फैल गया था।
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इससे सुगवलिया के किसान नागेंद्र यादव की पांच मंडा, वीरेंद्र यादव-चंद्रशेखर यादव की तीन बीघा, रामविलास की तीन बीघा, प्यारे राम की चार मंडा, नंदलाल कुशवाहा की 1.5 बीघा, क्षेत्र पंचायत सदस्य भूकेन राम की चार मंडा, झूलल्न राम पूर्व प्रधान की चार मंडा, शेषनाथ यादव की चार मंडा, लल्लन राजभर की पांच मंडा, हरिनाथ, रामबचन, गोरखनाथ की चार-चार मंडा, सीताराम राजभर की दो बीघा रेलवे के पूरब तरफ, मनन्न यादव, जितेन्द्र यादव, लोकनाथ यादव, स्व परमानंद यादव, रविंद्र यादव की पांच बीघा जमीन पानी की चपेट में आ गई है।
इन सभी के खेतों में गेहूं, मटर, मसूर, बरसीम, गन्ना, प्याज अरहर, सरसों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। पीड़ित किसानों ने डीएम सहित विभागीय अधिकारियों से इसकी शिकायत की है।
इसके पूर्व भी कई बार माइनर टूटने से खेत तबाह हुए हैं। किसान परेशान हैं , पूरे साल की उनकी मेहनत और कमाई अधिकारियों की लापरवाही के कारण तबाह होती रही है।
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नतीजा, किसान परिश्रम कर जिस फसल को तैयार करते हैं, पकने से पहले ही बर्बाद हो जाती है। खास बात यह है कि किसानों को अपनी फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा नहीं मिल पाता है।
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किसानों द्वारा बार-बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी क्षतिग्रस्त माइनर की मरम्मत कराए बगैर पानी छोड़ा जा रहा है। 20 फरवरी को अंधियारा-बड़ौरा माइनर में पानी छोड़े जाने के कारण सुगवलिया गांव के पास टूटी माइनर से खेतों में पानी फैल गया था।
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इससे सुगवलिया के किसान नागेंद्र यादव की पांच मंडा, वीरेंद्र यादव-चंद्रशेखर यादव की तीन बीघा, रामविलास की तीन बीघा, प्यारे राम की चार मंडा, नंदलाल कुशवाहा की 1.5 बीघा, क्षेत्र पंचायत सदस्य भूकेन राम की चार मंडा, झूलल्न राम पूर्व प्रधान की चार मंडा, शेषनाथ यादव की चार मंडा, लल्लन राजभर की पांच मंडा, हरिनाथ, रामबचन, गोरखनाथ की चार-चार मंडा, सीताराम राजभर की दो बीघा रेलवे के पूरब तरफ, मनन्न यादव, जितेन्द्र यादव, लोकनाथ यादव, स्व परमानंद यादव, रविंद्र यादव की पांच बीघा जमीन पानी की चपेट में आ गई है।
इन सभी के खेतों में गेहूं, मटर, मसूर, बरसीम, गन्ना, प्याज अरहर, सरसों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। पीड़ित किसानों ने डीएम सहित विभागीय अधिकारियों से इसकी शिकायत की है।
इसके पूर्व भी कई बार माइनर टूटने से खेत तबाह हुए हैं। किसान परेशान हैं , पूरे साल की उनकी मेहनत और कमाई अधिकारियों की लापरवाही के कारण तबाह होती रही है।
सच छिपाने के लिए बोल रहे सफेद झूठ
अंधियारा-बडौरा माइनर टूटने से सुगवलियां गाँव के आस-पास करीब 20 बीघा फसल बर्बाद हो गई है।
- फोटो : अमर उजाला
21 फरवरी के अमर उजाला में माइनर टूटने से 20 बीघे फसल डूबी शीर्षक से प्रकाशित खबर पर देवकली पंप नहर प्रखंड प्रथम के अधिशासी अभियंता ने अपना पक्ष भेजा है। पत्रांक संख्या 249 में बताया गया है कि समाचार में प्रकाशित तथ्यों के आधार पर उपजिलाधिकारी जमानिया के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी ने विभागीय अधिकारियों के साथ 21 फरवरी को स्थलीय सत्यापन किया था।
दावा किया गया कि मौके पर ऐसा कोई तथ्य नहीं पाया गया जिससे यह पुष्ट हो कि नहर टूटने से कोई खेत जलमग्न हुआ हो या किसी खेत की फसल डूबी हो अथवा नहर के पानी से फसलों को कोई क्षति पहुंची हो।
दावा किया गया कि मौके पर ऐसा कोई तथ्य नहीं पाया गया जिससे यह पुष्ट हो कि नहर टूटने से कोई खेत जलमग्न हुआ हो या किसी खेत की फसल डूबी हो अथवा नहर के पानी से फसलों को कोई क्षति पहुंची हो।