Varanasi: गंगा महोत्सव और देव दीपावली के आयोजन के भुगतान में फर्जीवाड़ा, मंडलायुक्त वाराणसी करेंगे जांच
गंगा महोत्सव और देव दीपावली 2021 में होर्डिंग आदि विभिन्न कार्यों के लिए इस फर्म को 6,43,970 रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से किया गया। इसमें लाखों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।
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वाराणसी के गंगा तट पर आयोजित विश्वविख्यात देव दीपावली और गंगा महोत्सव के आयोजन की आड़ में लाखों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पर्यटन विभाग ने बिना स्वीकृति ही संविदा कर्मी के घर के पते पर बनाई गई फर्म किरशिता के नाम लाखों रुपये का भुगतान किया।
नियमों को ताक पर रखकर इसी फर्म को कई काम भी आवंटित किए गए। सरकारी धनराशि भी फर्म में हस्तांतरित की गई। उप निदेशक पर्यटन ने इस पूरे मामले में महानिदेशक पर्यटन को पत्र लिखकर गबन की आशंका जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महानिदेशक पर्यटन ने जांच मंडलायुक्त वाराणसी कौशल राज शर्मा को सौंप दी है।
6,43,970 रुपये का भुगतान
पर्यटन विभाग में संविदा पर तैनात टाइपिस्ट के सामने घाट स्थित घर के पते पर पंजीकृत फर्म पर बिना निविदा ही कई काम आवंटित कर दिए गए। गंगा महोत्सव और देव दीपावली 2021 में होर्डिंग आदि विभिन्न कार्यों के लिए इस फर्म को 6,43,970 रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से किया गया। खास बात यह रही कि देयक (बिल) पर कोई तिथि या बिल नंबर नहीं दर्ज किया गया।
क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय की ओर से संविदा कर्मी के फर्म को कई भुगतान किए गए। पूरे मामले में पर्यटन विभाग के कई अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका है। उप निदेशक पर्यटन ने अपने गोपनीय पत्र में साफ लिखा कि क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय में कार्यरत कार्मिक आपसी मिलीभगत से शासकीय धनराशि का गबन कर रहे थे। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की जरूरत है। एफआईआर की अनुमति भी महानिदेशक पर्यटन से मांगी गई। इस पर महानिदेशक पर्यटन प्रखर मिश्रा ने आयुक्त वाराणसी मंडल से जांच रिपोर्ट मांगी है।
संविदा कर्मी के साथ महिला है फर्म में पार्टनर
वाराणसी कार्यालय में तैनात संविदा कर्मी के घर के पते पर पंजीकृत फर्म में एक महिला भी पार्टनर है। तीन वर्षों के दौरान में वाराणसी कार्यालय से कई लाख के भुगतान इस फर्म को किए गए। यह संविदा कर्मी चार वर्ष से क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय में तैनात है। इस मामले का खुलासा होने की भनक पर ही वह अगस्त 2022 में अचानक कार्य छोड़कर लापता हो गया। पर्यटन विभाग में तैनात संविदा कर्मी लंका के शिवाजी नगर कालोनी का निवासी है।
दस हजार रुपये प्रति माह पर टाइपिस्ट के पद पर तैनात संविदा कर्मी और एक महिला की ओर से बनाए गए फर्म की कोई निविदा क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय में स्वीकृत नहीं हुई थी। लेकिन उसे छह लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। जबकि, एक लाख रुपये से अधिक के कार्य के लिए निविदा की जानी आवश्यक है। फर्म के बिल पर जो पता दर्ज है, वह संविदा कर्मी के घर का है। उस कर्मी के आधार कार्ड पर भी वही पता दर्ज है।
फर्जी नाम व पते पर बैंक में खुला खाता
हैरान करने वाली बात यह है कि फर्जी नाम व पते पर प्राइवेट बैंक में खाता भी खोला गया और उसमें भुगतान लिया जाता रहा। देव दीपावली और अन्य आयोजन के दौरान संविदा कर्मी के फर्म को ही तवज्जो और टेंडर दिया जाता रहा। जबकि पुराने फर्मों को किसी ने किसी बहाने दरकिनार किया जाता रहा।
फर्जीवाड़ा उजागर करने में उप निदेशक का हुआ ट्रांसफर
पर्यटन विभाग में चल रहा यह फर्जीवाड़े कुछ लोगों की शह पर होने की आशंका है, क्योंकि इस मामले का खुलासा करने वाली उप निदेशक पर्यटन प्रीती श्रीवास्तव का तबादला हो गया। प्रीति ने मामले की जांच शुरू की थी। तमाम साक्ष्य व तथ्य जुटाने का दावा किया था। गत जुलाई में ही प्रीति ने उप निदेशक पर्यटन का कार्यभार संभाला था।
संविदा कर्मी सिर्फ मोहरा असली खिलाड़ी कोई और
पर्यटन विभाग कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि फर्जीवाड़े में संविदा कर्मी सिर्फ मोहरा है। इसमें पर्यटन विभाग में ही तैनात एक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। अधिकारी अपनी महिला मित्र के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर रहा है। लाभ के एक हिस्से का लालच देकर संविदा कर्मी का इस्तेमाल किया गया।