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बेटे ने गंगा में प्रवाहित की अरुण जेटली की अस्थियां, अस्थि कलश को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

Sun, 08 Sep 2019 03:12 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 08 Sep 2019 03:12 PM IST
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Former finance minister Arun Jaitley family will flow asthiyan bones into Ganges varanasi
अस्थि विसर्जित करते रोहन जेटली। - फोटो : अमर उजाला
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली ने मणिकर्णिका घाट पर गंगा में उनकी अस्थियां प्रवाहित कर दीं। इस दौरान उनके साथ जेटली की बेटी, दामाद और पत्नी भी मौजूद थीं। अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर परिजन पूजा-पाठ करेंगे। पूर्व वित्त मंत्री के परिजन रविवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे अस्थि कलश लेकर वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचें। जहां से वे सीधे सड़क मार्ग से विसर्जन के लिए मणिकार्णिका घाट आ गए। अरुण जेटली के परिवार से उनकी पत्नी, बेटा, बेटी और दामाद उनके साथ ही लगभग 20 सदस्य वाराणसी पहुंचे हैं।
Former finance minister Arun Jaitley family will flow asthiyan bones into Ganges varanasi
पुत्र रोहन ने कहा कि पिता का काशी से पुराना रिश्ता रहा है। नीचीबाग स्थित भाजपा कार्यालय पर पार्टी के लोगों ने कलश के साथ शोक प्रकट कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद करीब दो बजे परिवार मणिकर्णिका द्वार पहुंचे। वहां से रोहन हाथ में कलश लेकर गली के रास्ते परिवार के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। इसके बाद वह मोक्ष कहे जाने वाले मणिकर्णिका घाट पहुचे, जहां पर कलश को रख कर राजकीय सम्मान गॉड ऑफ ऑनर दिया गया। उसके बाद विधि विधान के साथ विद्वान ब्राह्मण ने कार्य को आगे बढ़ाते हुए गंगा के बीच धारा में लेकर जाने को कहा फिर जेटली के बेटे रोहन नाव के जरिए बीच गंगा में पहुंचे। और मंत्रोचार के साथ गंगा में नाम आंखों से पिता की अस्थियां गंगा की धारा प्रवाहित कर दीं।
Former finance minister Arun Jaitley family will flow asthiyan bones into Ganges varanasi
अरुण जेटली का निधन 24 अगस्त को दोपहर 12 बजे दिल्ली के एम्स में हो गया था। 25 अगस्त को दिल्ली के निगमबोध घाट में इनका अंतिम संस्कार किया गया। 66 साल के पूर्व वित्त मंत्री जेटली को सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी की शिकायत के बाद नौ अगस्त को एम्स लाया गया था। एम्स ने 10 अगस्त के बाद से जेटली के स्वास्थ्य पर कोई बुलेटिन जारी नहीं किया था। जेटली ने खराब स्वास्थ्य के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। इस साल मई में उन्हें इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। पिछले साल 14 मई को उनका एम्स में गुर्दे का प्रत्यारोपण हुआ था। जेटली पिछले साल अप्रैल से वित्त मंत्रालय नहीं जा रहे थे। हालांकि वह 23 अगस्त, 2018 को दोबारा अपने मंत्रालय पहुंचे थे। उनकी गैर मौजूदगी में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोलय को वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
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सॉफ्ट टिश्यू के कैंसर थे पीड़ित :
जनवरी 2019 पूर्व वित्त मंत्री को सारकोमा (फेफड़ा) में सॉफ्ट टिश्यू मिले थे। इसे लेकर उन्हें न्यूयार्क के डॉक्टरों की सलाह लेनी पड़ी थी। इसके बाद से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था। डॉक्टरों के कहने पर वे कई महीने से आइसोलेशन में रह रहे थे। बाहर आने-जाने को लेकर भी डॉक्टरों ने उन्हें खास हिदायतें दे रखी थीं। रिश्तेदारों, परिजनों और करीबियों को छोड़ बाकी लोगों से उन्होंने दूरी बनाई हुई थी।
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काशी से रहा है खास रिश्ता :
बनारस से अरुण जेटली का बहुत पुराना नाता रहा। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव की पूरी कमान अरुण जेटली ने संभाली थी। उस समय जनसभा की अनुमति नहीं मिलने पर तत्कालीन यूपी प्रभारी अमित शाह के साथ मालवीय प्रतिमा पर धरना देकर विरोध भी जताया था। ऐसे ही एक मामले में अरुण जेटली की रणनीति के कारण ही लोकसभा प्रत्याशी रहे नरेंद्र मोदी के स्वागत में काशी की जनता सड़कों पर उतर गई थी।
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