वाराणसी का एक गांव पूरे पूर्वांचल सहित बिहार तक अपनी खुशबू फैला रहा है। इस गांव के निवासी लोगों के यहां खुशबू फैला कर अपनी रोजी-रोटी का भी इंतजाम कर रहे हैं। इस गांव की ओर जाने वाली पगडंडियां शुरू होने से पहले ही खुशबू से इस्तकबाल करती हैं। जाने आगे की स्लाइड्स में...
दीनापुर गांव में दूर दूर तक फूल ही फूल और आब-ओ-हवा में उनकी खुशबू। कहीं गुड़हल, कुंद, बेला के पौधे हैं तो कहीं गुलाब, गेंदा की क्यारियां। यही दीनापुर को और गांवों से अलग करता है। यहां गेहूं, धान की नहीं फूलों की खेती होती है। बनारस के इस गांव के फूल न केवल शहर में बल्कि पूर्वांचल समेत बिहार तक अपनी खुशबू बिखेर रहे हैं।
आपको जानकर हैरानी भी होगी कि रोजाना इन फूलों से ही इस गांव में करीब डेढ़ लाख की आमदनी होती है। गांव वालों के लिए ये फूल सोने से कम नहीं। मेहनत भले हो लेकिन फूलों से सोना उगाने का हुनर जान चुके दीनापुर के बाशिंदे काफी समृद्ध और खुशहाल हैं। जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर बजे इस गांव की आबादी करीब सात हजार है। मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं, चलने को ढंग की सड़क नहीं है लेकिन आम गांव जैसे इस दीनापुर को खास बना दिया है यहां के लोगों की मेहनत और जज्बे ने।
यहां रहने वाले तीन सौ परिवार फूलों की खेती करते हैं। पूरा गांव ही फूलों की एक बगिया जैसा दिखता है। कभी पूरा गांव पीले नारंगी गेंदे से पटा रहता है तो कभी सफेद बेले, कुंद व टेंगरी से। देसी गुलाब की खुशबू की तो बात ही अलग है और हां, खेत किनारे बड़ी बड़ी झाडि़यों में सुर्ख लाल गुड़हल का फूल।
करीब तीस साल से फूलों की खेती कर रहे अनिल बताते हैं कि अकेले हमारे गांव से डेढ़ लाख का कारोबार सिर्फ फूलों से हो रहा है। अब तो अलग बगल के गांव भी हमारी देखा देखी फूलों की खेती करने लगे हैं। इस गांव से सटे धन्नीपुर में भी अब अधिकांश लोग फूल की खेती करने लगे हैं।