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देवारा के पांच गांव बाढ़ के पानी से घिरे: पलायन के बीच नाव बनी सहारा, संपर्क मार्ग डूबे; मच्छरों का प्रकोप

Sat, 05 Sep 2026 06:09 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 05 Sep 2026 06:09 AM IST
सार

आजमगढ़ में देवारा क्षेत्र के पांच गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के संपर्क मार्ग डूब गए हैं और जगह-जगह जलभराव है। आवागमन के लिए ग्रामीण नाव का सहारा ले रहे हैं। बाढ़ के बीच मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने दवा और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव की मांग की।

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Five Devara villages surrounded floodwaters Boats become lifeline amidst displacement access roads submerged
बाढ़ के बीच पलायन और शिक्षा का दृश्य। - फोटो : संवाद

विस्तार

सरयू के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से तटवर्ती इलाकों में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। सोनौरा, मानिकपुर, इस्माइलपुर, उर्दिहा और देवारा गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। संपर्क मार्गों पर कई फीट पानी भरने से आवागमन प्रभावित है। इससे करीब दो हजार की आबादी प्रभावित हुई है। लोगों के आवागमन का सहारा अब नाव है। प्रशासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए पांच नावें लगाई हैं। हालांकि, महुला-गढ़वल बांध से बांका-बुढ़न पट्टी संपर्क मार्ग पर अभी नाव नहीं लगाई गई है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। बाढ़ के पानी से जगह-जगह जलभराव होने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है।

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ग्रामीणों का कहना है कि महुला-गढ़वल बांध से सहबदिया गांव में जमा पानी से दुर्गंध उठ रही है। यहां अभी तक दवा का छिड़काव नहीं होने से संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने मच्छररोधी दवा और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग की है। महुला-गढ़वल बांध से सोनौरा संपर्क मार्ग पर बाढ़ के पानी में डूबी पुलिया भी खतरा बनी हुई है। वहीं, इस्माइलपुर संपर्क मार्ग पर पानी भरा होने से आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने प्रभावित मार्गों पर पर्याप्त नाव लगाने और जलभराव वाले क्षेत्रों में दवा का छिड़काव कराने की मांग की है।

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डिघिया पर खतरे के निशान से 47 सेमी ऊपर, बदरहुआ में 17 सेमी नीचे नदी
सरयू नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से सगड़ी तहसील क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को बदरहुआ नाले पर जलस्तर 71.42 मीटर था, जो शुक्रवार को नौ सेंटीमीटर बढ़कर 71.51 मीटर पहुंच गया। वहीं, डिघिया नाले पर जलस्तर 70.74 मीटर से बढ़कर 70.87 मीटर हो गया। डिघिया नाले पर खतरे का निशान 70.40 मीटर है, जबकि बदरहुआ नाले का खतरा बिंदु 71.68 मीटर है। ऐसे में डिघिया में जलस्तर खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर और बदरहुआ में 17 सेंटीमीटर नीचे है। नदी में बढ़ाव जारी रहने से देवारा क्षेत्र के लोग बाढ़ को लेकर सशंकित हैं।

Five Devara villages surrounded floodwaters Boats become lifeline amidst displacement access roads submerged
पानी के बीच होकर अपने गंतव्य को जाती महिला। - फोटो : संवाद

बाढ़ में डूबी पुलिया में फंसा युवक का पैर, छीनी-हथौड़ी से काटकर निकाला
महुला-गढ़वल बांध से सोनौरा संपर्क मार्ग पर बाढ़ के पानी में डूबी पुलिया में पैर फंसने से एक युवक घायल हो गया। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद छीनी-हथौड़ी से पुलिया काटकर उसका पैर बाहर निकाला। पैर में चोट लगने पर ग्रामीण उसे चिकित्सक के पास ले गए। नई बस्ती रौनापार निवासी सूरज कुमार बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे अपने सहयोगी को सोनौरा गांव छोड़ने जा रहा था। 

इसी दौरान बाढ़ के पानी में डूबी पुलिया में उसका पैर फंस गया। काफी प्रयास के बाद भी पैर नहीं निकलने पर सूरज ने मोबाइल से क्षेत्र के प्रदीप सहाय को सूचना दी। जानकारी मिलते ही प्रदीप सहाय के साथ विनोद विश्वकर्मा, संजय, मिठाई, राजू राय, अरविंद राणा समेत दर्जनों ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने छीनी और हथौड़ी की मदद से पुलिया काटकर सूरज का पैर बाहर निकाला। 

पुलिया में पैर फंसे रहने से वह चोटिल हो गया। महुला-गढ़वल बांध से सोनौरा मार्ग पर आवागमन के लिए पुलिया डाली गई थी, लेकिन बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद यह पूरी तरह डूब गई। ग्रामीणों के अनुसार, दिन में इस मार्ग पर नाव चलती है, लेकिन रात में नाव का संचालन बंद रहता है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है।

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बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को बांटी राहत सामग्री
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की मदद के लिए प्रशासन ने राहत सामग्री का वितरण शुरू कर दिया है। शुक्रवार को वर्मा श्याम दुलारी डिग्री कॉलेज, नई बस्ती रौनापार में राहत शिविर बनाया गया। उपजिलाधिकारी सगड़ी संजीव कुमार राय, तहसीलदार नवीन निश्चल त्रिपाठी और भाजपा नेता मनीष मिश्रा ने सोनौरा गांव के ग्रामीणों को राहत सामग्री वितरित की। नायब तहसीलदार हरैया आदर्श ने बताया कि राहत किट में 26 जरूरी वस्तुएं शामिल हैं। 

इसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, लाई, भुना चना, चीनी, बिस्किट, माचिस, मोमबत्ती, नहाने का साबुन, दंत मंजन, बाल्टी, तिरपाल, दाल, आलू, हल्दी, मिर्च, सब्जी मसाला, सरसों का तेल, नमक, सैनिटरी पैड, कपड़ा धोने का साबुन, तौलिया, सूती कपड़ा और डिस्पोजल आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 16 गांवों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध हो गई है। जिन गांवों के लिए सामग्री नहीं पहुंची है, उनकी मांग भेजी गई है। सामग्री आते ही वहां भी वितरण कराया जाएगा। सुनहरा गांव में भी राहत किट बांटी जा रही है। अब तक करीब 300 लोगों को राहत किट उपलब्ध कराई जा चुकी है।

ग्रामीणों की पीड़ा

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बढ़ा जलस्तर बना परेशानी का सबब। - फोटो : संवाद

बांका गांव के आवागमन के लिए अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। रोजाना लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - कमलेश यादव, अभन पट्टी

गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिर गया है। अभी तक न तो क्लोरिन की गोली बंटी और न ही छिड़काव हुआ। इससे मच्छर पनप रहे हैं। - सर्वेश यादव, इस्माइलपुर

बाढ़ से निपटने के सभी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। जरूरत के हिसाब से नाव लगाई जा रही हैं। हमारे पास पर्याप्त नाव मौजूद हैं। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री भी वितरित की जा रही है। - आदर्श, नायब तहसीलदार हरैया।

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