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RTI: फर्जी निकले दस्तावेज, शिकायतकर्ता को ही बुलाया; Fake जाति प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिले का मामला

Sat, 13 Jul 2024 05:54 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 13 Jul 2024 05:54 PM IST
सार

Varanasi News: फर्जी जाति प्रमाणपत्र को लेकर राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में हड़कंप मच गया। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत शासन से की गई थी। कार्यप्रणाली पर संदेह जताया गया था। पत्र के माध्यम से संबंधित प्रोफेसर की डिग्री निरस्त करने की बात कही गई है।

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Documents turned out fake in ayurved mahavidyalaya varanasi complainant was called
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय का है मामला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिला लेने वाले बीएचयू के प्रोफेसर की शिकायत अब शासन से की गई है। इसके साथ ही आयुर्वेद महाविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी संदेह जताया गया है। 

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शिकायकर्ता ने प्रमुख सचिव को लिखे गए पत्र में कहा है कि महाविद्यालय की प्राचार्य ने कार्रवाई करने की बजाय उनको दस्तावेज देखने के लिए पत्र लिखकर बुलवाया।
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बीएचयू के पंचकर्म विभाग में नियुक्त प्रोफेसर ने नियुक्ति के साथ ही बीएएमएस में दाखिले के लिए भी फर्जी जाति प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया था। इसका खुलासा नेवादा निवासी गौतम घोष की आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में हुआ।
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जनसूचना अधिकारी ने अपने पत्र में कहा था कि प्रो. जयप्रकाश सिंह का जाति प्रमाणपत्र तहसील से जारी नहीं किया गया है। इसके बाद शिकायकर्ता ने बीएचयू कुलपति और राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की प्राचार्य को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी।

इसके बाद राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. शशि सिंह ने शिकायतकर्ता को पत्र लिखकर कहा कि आप अपनी शिकायत के संदर्भ में किसी भी दिन मूल दस्तावेजों का अवलोकन कर सकते हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता ने प्रमुख सचिव आयुष विभाग को पत्र लिखकर प्रो. जेपी सिंह की डिग्री को निरस्त करने का अनुरोध किया है।

कोई भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ
गौतम घोष ने अपने पत्र में लिखा है कि जयप्रकाश सिंह को जमानिया तहसील जिला गाजीपुर से कोई भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। वर्तमान में बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में कार्यरत प्रो. जेपी सिंह ने 1998 में राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय चौकाघाट में इसी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश लिया और डिग्री हासिल की।

उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर कानून की परिधि में कार्यवाही करने के लिए सक्षम अधिकारी को निर्देशित करें। शिकायतकर्ता ने कहा कि मैंने इसकी शिकायत राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय चौकाघाट में की है।

उन्होंने कोई कार्यवाही न करके मुझे पत्रावली अवलोकन करने के लिए बुलाया जो न्यायोचित नहीं है और उनकी कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आती है। 

आयुर्वेद महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. शशि सिंह ने कहा कि यह मामला 1998 का है। हम लोग उस समय काउंसिलिंग कमेटी में नहीं थे। इस मामले में कोई भी कार्यवाही करने का अधिकार हमारे पास नहीं है। शिकायकर्ता को दस्तावेजों के अवलोकन के लिए बुलाया गया था।

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