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साई में चयनः पूर्वांचल की बेटियों ने दंगल के लिए दिया ट्रायल
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 18 Jul 2017 09:22 PM IST
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साई के कुश्ती केंद्र में 20 कुश्ती खिलाड़ियों का होगा दाखिला
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्वांचल की बेटियां अब दंगल के लिए तैयार हो रही हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी आफ इंडिया (साई) के पहले कुश्ती केंद्र में दाखिले के लिए मंगलवार को ट्रायल किया गया। इसमें वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, जौनपुर, कछवां की 37 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
निवेदिता शिक्षा सदन इंटरमीडिएट कॉलेज के मैदान पर मंगलवार सुबह नौ बजे से ट्रायल शुरू हो गया। साई ट्रेनिंग सेंटर के चेयरमैन नन्हें सिंह और यूपी फुटबाल पर्यवेक्षक कैप्टन राजेंद्र सिंह की देखरेख में ट्रायल का आरंभ हुआ। लंबाई, वजन और जांच के बाद खिलाड़ियों की दौड़ कराई गई।
दूसरे चरण में सिगरा स्टेडियम के कुश्ती हाल में कुश्ती का ट्रायल कराया गया। साई के सदस्य दिनेश जायसवाल, नेहा कश्यप और ऋषिश्वेत ने बालिकाओं का ट्रायल कराया।
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37 खिलाड़ियों में से 20 बढ़िया प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। एसटीसी चेयरमैन नन्हे सिंह ने बताया कि चयनित खिलाड़ियों को निवेदिता शिक्षा सदन में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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निवेदिता शिक्षा सदन इंटरमीडिएट कॉलेज के मैदान पर मंगलवार सुबह नौ बजे से ट्रायल शुरू हो गया। साई ट्रेनिंग सेंटर के चेयरमैन नन्हें सिंह और यूपी फुटबाल पर्यवेक्षक कैप्टन राजेंद्र सिंह की देखरेख में ट्रायल का आरंभ हुआ। लंबाई, वजन और जांच के बाद खिलाड़ियों की दौड़ कराई गई।
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दूसरे चरण में सिगरा स्टेडियम के कुश्ती हाल में कुश्ती का ट्रायल कराया गया। साई के सदस्य दिनेश जायसवाल, नेहा कश्यप और ऋषिश्वेत ने बालिकाओं का ट्रायल कराया।
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37 खिलाड़ियों में से 20 बढ़िया प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। एसटीसी चेयरमैन नन्हे सिंह ने बताया कि चयनित खिलाड़ियों को निवेदिता शिक्षा सदन में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पूर्वांचल का संकोच तोड़ेंगी बेटियां
जांच के बाद खिलाड़ियों की दौड़ कराई गई
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल में कुश्ती लड़कियों का खेल नहीं माना जाता था। माता-पिता बेटियों को इस खेल में भेजने से पहले सौ बार सोचते थे। साई के प्रयास से पूर्वांचल का संकोच तोड़कर बेटियां कुश्ती में बेहतरीन प्रदर्शन करेंगी।
साई ने बनारस में जो कुश्ती केंद्र खोला है वह पूर्वांचल की बेटियों को बेहतरीन प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा। यह कहना है यूपी खेल पर्यवेक्षक एशिया गोल्ड मेडलिस्ट और ध्यानचंद अवार्डी कैप्टन राजेंद्र सिंह का।
बताया कि लड़कियों के लिए बनारस में कुश्ती का कोई प्लेटफार्म नहीं था। प्रतिभा होने के बाद भी उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा था। निवेदिता शिक्षा सदन में कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र खुलने के बाद देहात की लड़कियों में जागरूकता आएगी।
यहां से भी एशिया, कॉमनवेल्थ में लड़कियां कुश्ती में देश का नाम रोशन करेंगी। दंगल फिल्म के सवाल पर कहा कि रील और रियल दंगल में बहुत अंतर है। हालांकि इस फिल्म ने युवाओं को कुश्ती के लिए प्रेरित किया है।
हरियाणा और पंजाब में लड़कियों और परिवार में संकोच नहीं होता। पूर्वांचल में तो माता-पिता मना कर देते हैं। लड़कियों को जब इसका फायदा मिलेगा, पैसा मिलेगा तो वो भी आगे आएंगी।
साई ने बनारस में जो कुश्ती केंद्र खोला है वह पूर्वांचल की बेटियों को बेहतरीन प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा। यह कहना है यूपी खेल पर्यवेक्षक एशिया गोल्ड मेडलिस्ट और ध्यानचंद अवार्डी कैप्टन राजेंद्र सिंह का।
बताया कि लड़कियों के लिए बनारस में कुश्ती का कोई प्लेटफार्म नहीं था। प्रतिभा होने के बाद भी उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा था। निवेदिता शिक्षा सदन में कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र खुलने के बाद देहात की लड़कियों में जागरूकता आएगी।
यहां से भी एशिया, कॉमनवेल्थ में लड़कियां कुश्ती में देश का नाम रोशन करेंगी। दंगल फिल्म के सवाल पर कहा कि रील और रियल दंगल में बहुत अंतर है। हालांकि इस फिल्म ने युवाओं को कुश्ती के लिए प्रेरित किया है।
हरियाणा और पंजाब में लड़कियों और परिवार में संकोच नहीं होता। पूर्वांचल में तो माता-पिता मना कर देते हैं। लड़कियों को जब इसका फायदा मिलेगा, पैसा मिलेगा तो वो भी आगे आएंगी।