1.37 अरब बकाये पर खाते सीज, ईपीएफओ ने पूर्वांचल डिस्कॉम के सभी बैंक खातों से निकासी पर लगाई रोक
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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पूर्वांचल डिस्कॉम) के सभी बैंक खातों को सीज करवा दिया है। इन खातों में जमा-निकासी नहीं हो सकेगी। ईपीएफओ के 1,37,66,37,725 रुपये जमा नहीं किए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। इसकी जानकारी मिलने के बाद सोमवार को विभाग में हड़कंप मचा रहा। खाता सीज होने से पूर्वांचल डिस्काम के वेतन और विकास कार्य पर असर पड़ेगा। खाता सीज होने से अधिकारी परेशान हैं। अधिकारियों का मानना है कि बैंक खातों पर रोक अधिक दिन तक चली तो दिक्कत बढ़ जाएगी।
बिजली विभाग के कैश काउंटरों पर रोजाना लाखों, करोड़ों रुपये उपभोक्ता बिजली बिल मद का जहां जमा करते हैं। वहीं, अभियान के दौरान बकाएदारों से वसूली के लाखों रुपये राजस्व वसूल किया जाता है। इन रुपयों को बैंक में जमा न कर पाने के कारण उसको सुरक्षित रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी बिजली विभाग के लिए बन गई है।
आईपीडीएस के तहत भूमिगत केबल कार्य का काम हो या फिर सौभाग्य योजना के तहत कनेक्शन देने का, आदि कार्य भी प्रभावित होंगे। अधिकारियों के अनुसार जल्द खातों से जमा व निकासी पर से रोक नहीं हटाई गई तो चालू कार्य समेत अन्य सेवाओं पर असर दिखेगा।
पूर्वांचल डिस्काम के वित्त निदेशक एके अवस्थी ने कहा कि बैंक खाते सीज हो जाने के बावजूद अभी तात्कालिक तौर पर वेतन और अन्य कार्यों पर असर नहीं दिखेगा। अगर देर होगी तो ये सारी चीजें प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि उम्मीद है कि इसके पहले मामला सुलझा लिया जाएगा।
ये है मामला :
पूर्वांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक गोविंद राजू एनएस ने बताया कि यह मामला 2010-2014 का है। बकाया राशि जमा न होने पर ईपीएफओ ने आईसीआइसीआई, एचडीएफसी, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक स्थित पूर्वांचल डिस्कॉम के खाते सीज करवा दिए हैं। इस मामले में अंतिम नोटिस के बाद कानपुर स्थित ट्रिब्यूनल में अपील की गई थी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। अब डिस्कॉम हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है।
ईपीएफओ ने कई प्रतिष्ठानों को भविष्य निधि का पैसा जमा करने का नोटिस जारी किया था, इसमें पूर्वांचल डिस्कॉम भी शामिल था। नियमों के तहत देय राशि निर्धारित करते हुए आदेश पारित किया गया था, परंतु निर्धारित बकाया धनराशि कार्यालय में जमा नहीं कराई गई। बैंक खाते सीज होने से अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन पर असर पड़ेगा और विकास कार्य भी बाधित होंगे।