बीएचयू प्रशासन व छात्रों के बीच रार बरकरार, जिला प्रशासन ने आंदोलन पर अपनाया सख्त रुख
बीएचयू में प्रथम, द्वितीय वर्ष की कक्षाएं भी पूरी क्षमता के साथ चलाए जाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे छात्रों और बीएचयू प्रशासन के बीच रार बढ़ती जा रही है। आंदोलन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है जिससे आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी का अंदेशा है। बीएचयू प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है।
अब तक पांच दिन से सिंह द्वार बंद कर धरने पर बैठे छात्रों ने गुरुवार को सिंह द्वार के दोनों छोटे गेट खोल दिए, जिससे इलाज के लिए आने वालों को थोड़ी राहत जरूर हुई लेकिन बड़ा गेट न खुलने की समस्या अब भी बरकरार है। इधर चीफ प्रॉक्टर प्रो. आनंद चौधरी के साथ ही एसीएम चतुर्थ और सीओ भेलूपुर ने छात्रों से बातचीत की लेकिन वह धरना खत्म नहीं करने की मांग पर अड़े रहे। पांचवें दिन छात्र धरने के बाद अनशन पर बैठ गए।
विश्वविद्यालय में 22 फरवरी से अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। उसी दिन से प्रथम, द्वितीय वर्ष की कक्षाओं को चलाने की मांग को लेकर छात्र सिंह द्वार बंद कर धरना दे रहे हैं। बृहस्पतिवार को छात्रों ने धरने को अनशन में तब्दील कर दिया। छात्रों का कहना है कि मांगें पूरी न होने तक अनशन जारी रखेंगे।
कोविड महामारी से निपटने के प्रयासों के मद्देनजर ही बीएचयू में आफलाइन कक्षाओं पर असर पड़ा है। 22 फरवरी से अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन मोड में कक्षाएं चलाई जा रही हैं। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में 10-15 दिन के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद छात्रों के हित को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।
डॉ. राजेश सिंह, पीआरओ बीएचयू