निराश कांग्रेस को नया उत्साह दे गईं प्रियंका, पीड़ितों से मिलकर दुखती रग पर धरा हाथ
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लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त से निराश कांग्रेस को राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के दो दिवसीय दौरे से नया उत्साह मिला है। 26 घंटे से ज्यादा सड़क पर संघर्ष कर प्रियंका ने पूरे प्रदेश की सियासत गर्मा दी है। प्रियंका भले ही उभ्भा नहीं पहुंच पाईं, मगर चुनार के किले से ही उन्होंने समाज के एक वर्ग की सहानुभूति हासिल करने में सफल रहीं। पीड़ित परिवारों के दुख में भागीदार होकर उन्होंने दूरगामी संदेश भी दिया है।
गोलीकांड के बाद प्रियंका को प्रशासन ने भले ही सोनभद्र जाने से रोक दिया हो, मगर उन्होंने 26 घंटे के बनारस और मिर्जापुर प्रवास से बड़ा संदेश दे दिया है। उनकी गिरफ्तारी से लेकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात तक में सहानुभूति की एक लहर उनके सिराहने से होकर कांग्रेस में पहुंच चुकी है।
प्रशासन की सख्ती के बाद भी प्रियंका के तेवर तल्ख रहे और न्याय, अन्याय और जनता के लिए संघर्ष की अपनी बात पर वह अड़ी रहीं। नरायनपुर पुलिस चौकी के सामने सड़क पर बैठकर अपने इरादे जता चुकी प्रियंका पीड़ितों से मुलाकात की जिद पर डटी रहीं। उनके तल्ख तेवर देखकर पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के कांग्रेसी एकजुट होकर चुनार पहुंचे।
प्रियंका की गिरफ्तारी की खबर के बाद पूर्वांचल सहित प्रदेश में धरना प्रदर्शन के बहाने कांग्रेस सड़कों पर उतरी। उधर, प्रियंका ने पूरी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सोनभद्र गोलीकांड के बाद प्रियंका पहले ऐसी नेता थीं जो पीड़ितों से मिलने पहुंची।
पीड़ितों से मुलाकात दलितों की सहानुभूति :
पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर प्रियंका ने कांग्रेस के प्रति दलितों की सहानुभूति हासिल करने की पूरी कोशिश की। चुनार किले में पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान भी प्रियंका महिलाओं के दुख में पूरी तरह भागीदार रहीं। जमीन पर बैठकर उन्हें ढांढस बनाया और फिर सहयोग राशि की घोषणा कर सत्ताधारी भाजपा सहित अन्य विपक्षियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।