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हृदय से निकली भाषा प्रभावी और स्वीकार्य
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वाराणसी। हृदय से निकली भाषा ही स्वीकार्य और प्रभावी होती है। यह दूसरों के दिलों पर असर डालती है। उक्त बातें महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टी.एन. सिंह ने कहीं। वह शनिवार को दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा मद्रास के कुलपति प्रो. राममोहन पाठक, शिक्षा परिषद अध्यक्ष डॉ. सुन्दरम पार्थसारथी, कुल सचिव प्रो. प्रदीप के. शर्मा और प्रो. के.जी. सुरेश के अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदुस्तान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि दक्षिण के हिंदी विद्वानों का उत्तर के हिंदी सेवियों द्वारा यह सम्मान हिंदी के विकास में प्रेरणा का काम करेगा। प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि काशी रत्नगर्भा है जो विभूतियों को खिंचती है। काशी में एक साहित्य महोत्सव होना चाहिये जिसके लिए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को आगे आना चाहिए। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा अपने महत्वपूर्ण दायित्व निभाने के लिए तैयार हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए कुलपति प्रो. टी. एन सिंह ने भी अपनी सहमति जतायी। अतिथियों ने प्रो. सुमन जैन द्वारा लिखित पुस्तक गांधी, चरखा और स्वराज का विमोचन भी किया। संचालन प्रो. सुमन जैन और प्रो. निरंजन सहाय ने धन्यवाद दिया। स्वागत प्रो. बाबूराम त्रिपाठी ने किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदुस्तान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि दक्षिण के हिंदी विद्वानों का उत्तर के हिंदी सेवियों द्वारा यह सम्मान हिंदी के विकास में प्रेरणा का काम करेगा। प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि काशी रत्नगर्भा है जो विभूतियों को खिंचती है। काशी में एक साहित्य महोत्सव होना चाहिये जिसके लिए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को आगे आना चाहिए। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा अपने महत्वपूर्ण दायित्व निभाने के लिए तैयार हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए कुलपति प्रो. टी. एन सिंह ने भी अपनी सहमति जतायी। अतिथियों ने प्रो. सुमन जैन द्वारा लिखित पुस्तक गांधी, चरखा और स्वराज का विमोचन भी किया। संचालन प्रो. सुमन जैन और प्रो. निरंजन सहाय ने धन्यवाद दिया। स्वागत प्रो. बाबूराम त्रिपाठी ने किया।
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