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छात्रों ने जाना, कैसे काम करती है पुलिस

Fri, 31 Jul 2015 01:59 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
वाराण्ासी, ब्यूरो Updated Fri, 31 Jul 2015 01:59 AM IST
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Be students, how police work

वाराणसी। घर से स्कूल का तक का रास्ता तय करने वाले सनातन धर्म इंटर कॉलेज के विद्यार्थी गुरुवार को कुछ अलग जानने-सीखने को उत्सुक थे। विद्यार्थियों ने दशाश्वमेध थाने में पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जाना।

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 वहीं पुलिस से जुड़े सामाजिक सरोकार और रोजाना सामने आने वाली समस्याओं पर भी बेबाकी से सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने उनके सवालों के जवाब दिए। सहयोग की अपील के साथ ही उन्हें नियमाें के पालन करने के प्रति जागरूक किया। पुलिस के प्रति अच्छी सोच रखने के लिए प्रेरित किया।
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अवसर था, अमर उजाला की ओर से आयोजित दशाश्वमेध थाने में ‘पुलिस की पाठशाला’ कार्यक्रम का। मुख्य अतिथि सीओ दशाश्वमेध डीपी शुक्ला ने पुलिस की ड्यूटी और उसकी कार्य प्रणाली में तेजी से आए बदलावों के बारे में विस्तार से छात्रों को जानकारी दी। उन्होंने ऑनलाइन एफआईआर, एनसीआर, फैंटम दस्ते, विवेचना आदि के बारे में विद्यार्थियों को बताया। पाठशाला के दौरान छात्रों ने सवाल भी पूछे।
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छात्र मोहित जायसवाल ने कहा कि किसी घटना की सूचना देने पर पुलिस उसी पर संदेह करने लगती है। इससे आम आदमी कोई भी सूचना पुलिस को देने से कतराता है। वहीं, सागर यादव ने छेड़खानी और सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे। इंस्पेक्टर अंजय कुमार सिंह ने कहा कि किसी के लिए कानून अलग से नहीं है।
सूचना मिलने पर पुलिस पीड़ित की पूरी मदद करती है। ऐसे लोगोें के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। बिना भय के आप सभी सूचना दे सकते हैं, पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई होगी।
छात्र किशन विश्वकर्मा का कहना था कि जगह-जगह देखने को मिलता है ऑटो, ट्रक वालों से चौराहे पर पुलिस वसूली में लिप्त रहती है और इसके चलते जाम की समस्या होती है। पब्लिक परेशान होती है। अमन वर्मा का कहना था कि दुर्घटना में कोई भी व्यक्ति घायल हो जाता है तो लोग देखकर आगे बढ़ जाते हैं लेकिन कोई उसे अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाना चाहता। पता चलता है लोग सिर्फ इस भय से ऐसा नहीं करते कि पुलिस उन्हीं को बार-बार पूछताछ और छानबीन के नाम पर परेशान करना शुरू कर देती है।
इंस्पेक्टर ने कहा कि जहां कहीं भी वसूली दिखे अथवा घायल व्यक्ति है तो 100 नंबर पर सूचना दें। वसूली में लिप्त पुलिसकर्मी जेल भी जा चुके हैं। कोई महत्वपूर्ण जानकारी है तो सूचना देने वाला व्यक्ति अपने बिना नाम पता के पूरी जानकारी लिखकर संबंधित थाने को डाक से भी भेज सकता है।

 छात्र मोनू रावत ने समय-समय पर पुलिस जागरूकता कार्यक्रम चलाने की बात कही। शुभम कुमार ने कहा कि नो एंट्री में बड़े वाहनों के प्रवेश से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। छात्रों ने थाने और सीओ कार्यालय में हो रहे कार्य और शिकायत दर्ज कराने के तौर-तरीकों को जाना। साथ ही, थाने के कैंपस में हवालात को भी देखा। कंप्यूटर कक्ष में जाकर ऑनलाइन एफआईआर के बार में जानकारी हासिल की।

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