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पूरी लगन से करें मेहनत तो सपने खुद-ब-खुद हो जाएंगे सचः अर्जुन अवार्डी प्रशांति सिंह
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 02 Sep 2017 02:27 PM IST
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अर्जुन अवार्ड पाने के बाद अपने शहर लौटी बास्केटबाल खिलाड़ी का भव्य स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
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100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुकीं बास्केटबॉल खिलाड़ी और बनारस की बेटी प्रशांति सिंह शुक्रवार को अपने घर पहुंची। यहां उन्होंने 'अमर उजाला' से खास बातचीत की। बातचीत में उन्होंने अपनी जिंदगी, खेल का सफर और बनारस में खेलों की सुविधाओं पर चर्चा की। 15 साल के कैरियर में प्रशांति को जख्म, दर्द और शिकायतें भी मिली हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी बातचीत ...
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों अर्जुन पुरस्कार लेतीं प्रशांति
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति के हाथों अर्जुन अवार्ड प्राप्त करने के बाद शुक्रवार को पहली बार अपने शहर आईं प्रशांति का जोरदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से घर तक बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। कॉमनवेल्थ और दो एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं प्रशांति ने बनारस में सुविधाओं के सवाल पर कहा कि इंसान को खुद अपना रास्ता बनाना चाहिए। अवार्ड के लिए नहीं, बस अपने कॅरियर के लिए खेलें, सफलता जरूर मिलेगी।
एयरपोर्ट पर अपने माता-पिता के साथ प्रशांति सिंह
- फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी प्रशांति सिंह ने कहा कि खुद की स्ट्रेंथ पर भरोसा रखिए और आगे निकल जाइए। स्वयं को अपना रोल मॉडल बनाइए। नकारात्मकता से दूर रहें और जो मिल रहा है, उसमें खुश रह कर आगे बढ़ने का प्रयास करें। लक्ष्य से ज्यादा जरूरी है आपकी अपने प्रति ईमानदारी। पूरी लगन के साथ मेहनत करें तो सपने खुद ब खुद सच हो जाएंगे।
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prashanti singh
- फोटो : अमर उजाला
100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुकीं प्रशांति का कहना है कि खेल में एक-एक मिनट का महत्व होता है। अर्जुन अवार्ड समारोह में भी महामहिम से पुरस्कार ग्रहण करने के लिए केवल एक मिनट मिला था। इस एक मिनट को हासिल करने में जिंदगी के 15 साल लग गए। इस दौरान सभी जख्म, दर्द और शिकायतें दूर हो गईं।
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prashanti singh
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ और एशियन गेम में बेहतरीन प्रदर्शन मेरे जीवन में टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। जब आप टीम के साथ खेलते हैं, तो वहां आप जर्सी नंबर से जाने जाते हैं। मैं 14 नंबर की जर्सी पहनकर खेलती थी। अर्जुन अवार्ड तक का सफर तय करने में 15 साल लग गए। अवार्ड के लिए पांच बार आवेदन करने यह सफलता मिली है।