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पांच हजार में पढ़ाने को मजबूर हैं पीएचडीधारक
Varanasi
Updated Sat, 30 Nov 2013 05:42 AM IST
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वाराणसी। उच्च शिक्षण संस्थानों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। कालेज यूजीसी के मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। छात्रों से मनमानी फीस वसूली जा रही है। पीएचडी डिग्री होने के बावजूद युवा अध्यापकों को चार से पांच हजार रुपये वेतन दे रहें। यह दर्द बयां हुआ स्नातक युवा सम्मेलन में। पराड़कर भवन में शुक्रवार को स्नातक युवा मोर्चा की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में पूर्वांचल के तमाम कालेजों के प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की।
वक्ताओं ने कहा कि कालेज यूजीसी के मानकों से तीन से चार गुना अधिक फीस वसूल रहे हैं। पीएचडीधारी चार-पांच हजार रुपये में पढ़ाने को विवश हैं जबकि यूजीसी के मानक के अनुसार उन्हें कम से कम 12 हजार रुपये का मानदेय मिलना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल है। प्राइवेट कालेजों की तरह निजी अस्पतालों पर भी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। मुख्य वक्ता कृष्णानंद पांडेय ने कहा कि दवा और जांच के नाम पर कमीशनखोरी बंद होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा मित्रों के लिए टीईटी की बाध्यता खत्म करनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से वित्त विहीन शिक्षकों को तत्काल मानदेय देने की मांग की। सम्मेलन में स्नातक युवा संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चौबे, प्रदेश अध्यक्ष आशीष त्रिपाठी, शैलेंद्र पांडेय, रविशंकर, प्रदीप पांडेय, विश्वनाथ आदि ने अपने विचार रखे। अध्यक्षता पूर्व डीआईजी सच्चिदानंद सिंह तथा संचालन अरविंद पांडेय ने किया।
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वक्ताओं ने कहा कि कालेज यूजीसी के मानकों से तीन से चार गुना अधिक फीस वसूल रहे हैं। पीएचडीधारी चार-पांच हजार रुपये में पढ़ाने को विवश हैं जबकि यूजीसी के मानक के अनुसार उन्हें कम से कम 12 हजार रुपये का मानदेय मिलना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल है। प्राइवेट कालेजों की तरह निजी अस्पतालों पर भी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। मुख्य वक्ता कृष्णानंद पांडेय ने कहा कि दवा और जांच के नाम पर कमीशनखोरी बंद होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा मित्रों के लिए टीईटी की बाध्यता खत्म करनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से वित्त विहीन शिक्षकों को तत्काल मानदेय देने की मांग की। सम्मेलन में स्नातक युवा संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चौबे, प्रदेश अध्यक्ष आशीष त्रिपाठी, शैलेंद्र पांडेय, रविशंकर, प्रदीप पांडेय, विश्वनाथ आदि ने अपने विचार रखे। अध्यक्षता पूर्व डीआईजी सच्चिदानंद सिंह तथा संचालन अरविंद पांडेय ने किया।
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