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एक हजार बच्चों में कुपोषण के लक्षण
Varanasi
Updated Tue, 23 Jul 2013 05:33 AM IST
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लोहता। काशी विद्यापीठ विकास खंड के एक हजार बच्चों में जर्नलाइज वीकनेस (कुपोषण) के लक्षण सामने आए हैं। इसका खुलासा आंगनबाड़ी, प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के लगभग साढे़ चार हजार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच में हुआ। इस नतीजे को देखकर प्रशासन और शिक्षा विभाग के अफसरों के हाथ-पांव फूल गए हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों के बच्चों में ये लक्षण ज्यादा पाए गए हैं। डाक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट काशी विद्यापीठ का प्रभारी चिकित्साधिकारी को सौंप दी है।
आंगनबाड़ी, प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील योजना का अक्षरश: पालन किया जाए तो कुपोषण की आशंका न के बराबर है। मगर स्वास्थ्य विभाग के नतीजों ने शासन की इस व्यवस्था की पोल खोल दी है। आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग की तरफ से डा. नरेंद्र कुमार भारती और डा. प्रगति बेरी के नेतृत्व में टीम बनाई गई। इसमें आंख, कान, दंत रोग विशेषज्ञ के अलावा फिजिशियन भी शामिल किये गए। विकास खंड के सभी प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल और आंगनबाड़ी में 3 से 6 साल, 5 से 12 और 13 से 15 साल तक के लगभग साढ़े चार हजार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच किया गया तो उसमें एक हजार बच्चों में जर्नलाइज विकनेस (कुपोषण) के लक्षण दिखाई दिये हैं। आंख, दांत और पेट के रोग से ग्रसित बच्चे ज्यादा हैं। जांच कर रही टीम को मुस्लिम बाहुल्य इलाके में से ज्यादा बच्चे मिले। गरीबी की वजह से बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। जांच टीम ने इन बच्चों में पाया कि जो बच्चे जर्नलाइज विकनेस से ग्रसित हैं। उनका वजन सामान्य से कम और हाईट कम पाया गया जो कुपोषण के प्रथम लक्षण हैं।
कोट
जर्नलाइज विकनेस (कुपोषण) के प्रथम लक्षण हैं। यही से कुपोषण की शुरुआत होती है । इस रोग से ग्रसित सभी बच्चों की जांच करने के बाद उनके बेहतर इलाज के लिए प्रभारी चिकित्साधिकारी काशी विद्यापीठ को रिपोर्ट सौंप दिया गया है।
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डा नरेन्द्र भारती, प्रभारी, जांच टीम
00
जांच टीम की रिपोर्ट मिल गई है। इसी सीएमओ कार्यालय में भेज दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जल्द ही टीम बनाकर क्षेत्र में भेजी जाएगी। जो बच्चों के माता-पिता, अभिभावकों को बच्चों के सेहत के प्रति जागरूक करेगी।
डा. ओपी शुक्ला, प्रभारी चिकित्साधिकारी, काशी विद्यापीठ
00
बच्चों को यह दिया जाता है भोजन
आंगनबाड़ी- तीन से पांच वर्ष के बच्चे- सत्तू, खिचड़ी, दलिया, चने की घुघरी
प्राइमरी/ मिडिल- छह से 14 वर्ष - दाल, चावल, सब्जी, रोटी, खिचड़ी, सोयाबीन, खीर, खिचड़ी, मौसमी सब्जी
00
तीन साल से पंद्रह साल के बच्चों के लिए संतुलित आहार जरूरी है।
सात चीजें भोजन में शामिल करें
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट, विटामिन, मिनरल, वाटर और फाइबर
00
कार्बोहाइड्रेट - साठ प्रतिशत
प्रोटीन - तीस प्रतिशत
फैट - दस प्रतिशत
वाटर, थोड़ा फाइबर, विटामिन और मिनरल जरूरत के हिसाब से
00
इन भोजन में मिलते हैं ये तत्व
चावल, सभी प्रकार की दालें, गेहूं, मौसमी फल और हरी सब्जियां, दूध
इन सभी चीजों का समय-समय पर सेवन जरूरी है।
(सभी जानकारी वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (मंडलीय अस्पताल) डा. वीके श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)
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आंगनबाड़ी, प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील योजना का अक्षरश: पालन किया जाए तो कुपोषण की आशंका न के बराबर है। मगर स्वास्थ्य विभाग के नतीजों ने शासन की इस व्यवस्था की पोल खोल दी है। आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग की तरफ से डा. नरेंद्र कुमार भारती और डा. प्रगति बेरी के नेतृत्व में टीम बनाई गई। इसमें आंख, कान, दंत रोग विशेषज्ञ के अलावा फिजिशियन भी शामिल किये गए। विकास खंड के सभी प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल और आंगनबाड़ी में 3 से 6 साल, 5 से 12 और 13 से 15 साल तक के लगभग साढ़े चार हजार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच किया गया तो उसमें एक हजार बच्चों में जर्नलाइज विकनेस (कुपोषण) के लक्षण दिखाई दिये हैं। आंख, दांत और पेट के रोग से ग्रसित बच्चे ज्यादा हैं। जांच कर रही टीम को मुस्लिम बाहुल्य इलाके में से ज्यादा बच्चे मिले। गरीबी की वजह से बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। जांच टीम ने इन बच्चों में पाया कि जो बच्चे जर्नलाइज विकनेस से ग्रसित हैं। उनका वजन सामान्य से कम और हाईट कम पाया गया जो कुपोषण के प्रथम लक्षण हैं।
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जर्नलाइज विकनेस (कुपोषण) के प्रथम लक्षण हैं। यही से कुपोषण की शुरुआत होती है । इस रोग से ग्रसित सभी बच्चों की जांच करने के बाद उनके बेहतर इलाज के लिए प्रभारी चिकित्साधिकारी काशी विद्यापीठ को रिपोर्ट सौंप दिया गया है।
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डा नरेन्द्र भारती, प्रभारी, जांच टीम
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जांच टीम की रिपोर्ट मिल गई है। इसी सीएमओ कार्यालय में भेज दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जल्द ही टीम बनाकर क्षेत्र में भेजी जाएगी। जो बच्चों के माता-पिता, अभिभावकों को बच्चों के सेहत के प्रति जागरूक करेगी।
डा. ओपी शुक्ला, प्रभारी चिकित्साधिकारी, काशी विद्यापीठ
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बच्चों को यह दिया जाता है भोजन
आंगनबाड़ी- तीन से पांच वर्ष के बच्चे- सत्तू, खिचड़ी, दलिया, चने की घुघरी
प्राइमरी/ मिडिल- छह से 14 वर्ष - दाल, चावल, सब्जी, रोटी, खिचड़ी, सोयाबीन, खीर, खिचड़ी, मौसमी सब्जी
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तीन साल से पंद्रह साल के बच्चों के लिए संतुलित आहार जरूरी है।
सात चीजें भोजन में शामिल करें
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट, विटामिन, मिनरल, वाटर और फाइबर
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कार्बोहाइड्रेट - साठ प्रतिशत
प्रोटीन - तीस प्रतिशत
फैट - दस प्रतिशत
वाटर, थोड़ा फाइबर, विटामिन और मिनरल जरूरत के हिसाब से
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इन भोजन में मिलते हैं ये तत्व
चावल, सभी प्रकार की दालें, गेहूं, मौसमी फल और हरी सब्जियां, दूध
इन सभी चीजों का समय-समय पर सेवन जरूरी है।
(सभी जानकारी वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (मंडलीय अस्पताल) डा. वीके श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)