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बीएचयू अस्पताल में 24 घंटे कटा सकेंगे ओपीडी पर्चा
Updated Wed, 07 Nov 2018 02:01 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजनों को अब ओपीडी का पर्चा कटाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वह जब चाहे तब अस्पताल पहुंचकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को दिवाली तोहफा देते हुए पर्चा काउंटर अब 24 घंटे खोले रहने का निर्णय लिया है। अब तक सुबह 6 बजे से दोपहर दो बजे तक ही पर्चा कटने की व्यवस्था थी। सबसे अधिक राहत उन मरीजों को होगी जो दूर दराज से एक दिन पहले शाम को अस्पताल आ जाते थे और ओपीडी का पर्चा बनवाने के लिए भोर में ही लाइन लगाते थे। अस्पताल में दिवाली के एक दिन पहले मंगलवार से यह व्यवस्था शुरू हो गई लेकिन इसका औपचारिक शुभारंभ 15 नवंबर को होगा।
अस्पताल में बनारस और आसपास के जिलों के साथ ही हर दिन बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, नेपाल आदि जगहों से पांच हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। इसमें दूर से आने वाले मरीज एक दिन पहले ही शाम को आ जाते हैं और अगले दिन सुबह पर्चा कटाने के लिए 101 नंबर पर्चा काउंटर पर सुबह से ही लगनी शुरू हो जाती थी। ओपीडी का समय तो नौ से चार बजे तक का है लेकिन दो बजे ही पर्चा काउंटर बंद हो जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पंजीकरण कक्ष में तीन काउंटर हमेशा खुले रहेंगे। इसमें एक काउंटर आयुष्मान भारत का जबकि दो काउंटर में भर्ती और ओपीडी वाले मरीजों का पंजीकरण होगा। अब तक ओपीडी वाला काउंटर बंद होने के बाद लोग इमरजेंसी से पर्चा कटाकर अपने पास रख लेते थे। नई व्यवस्था लागू होने के पीछे आयुष्मान भारत योजना से अस्पताल का जुड़ना माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि इसके मरीज अगर अस्पताल आए तो उन्हें इलाज में कोई असुविधा न हो।
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अस्पताल में बनारस और आसपास के जिलों के साथ ही हर दिन बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, नेपाल आदि जगहों से पांच हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। इसमें दूर से आने वाले मरीज एक दिन पहले ही शाम को आ जाते हैं और अगले दिन सुबह पर्चा कटाने के लिए 101 नंबर पर्चा काउंटर पर सुबह से ही लगनी शुरू हो जाती थी। ओपीडी का समय तो नौ से चार बजे तक का है लेकिन दो बजे ही पर्चा काउंटर बंद हो जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पंजीकरण कक्ष में तीन काउंटर हमेशा खुले रहेंगे। इसमें एक काउंटर आयुष्मान भारत का जबकि दो काउंटर में भर्ती और ओपीडी वाले मरीजों का पंजीकरण होगा। अब तक ओपीडी वाला काउंटर बंद होने के बाद लोग इमरजेंसी से पर्चा कटाकर अपने पास रख लेते थे। नई व्यवस्था लागू होने के पीछे आयुष्मान भारत योजना से अस्पताल का जुड़ना माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि इसके मरीज अगर अस्पताल आए तो उन्हें इलाज में कोई असुविधा न हो।
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