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बनाए गए तीन लाख पार्थिव शिवलिंग
Updated Thu, 15 Feb 2018 01:12 AM IST
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सीतामढ़ी। मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण महाअनुष्ठान के दूसरे दिन तीन लाख से अधिक पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण भक्तों ने किया। महाअनुष्ठान में सहभाग करने वाले शिवभक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिवलिंग बनाने के लिए मानो होड़ मच गई हो।
आयोजन को लेकर धार्मिक एवं पौराणिक स्थली भूत भावन भगवान महादेव के रंग में रंग गई है। वैदिक मंत्रोच्चार, सुमधुर भजनों, प्रभु संकीर्तन, श्री सीता राम महायज्ञ मंडप से गूंज रहे वैदिक मंत्रों की अनुगूंज के बीच हजारों शिव भक्तों ने पूरी आस्था और विश्वास के साथ पार्थिव शिवलिंग निर्माण किया। भक्तों ने शिवलिंग बनाकर पुण्यलाभ लिया। सूर्योदय से शुरू हुआ शिवलिंग निर्माण सूर्यास्त तक चला। उसके बाद पतित पावनी मां जाह्नवी के पावन तट पर लाखों पार्थिव शिवलिंगों का विधि विधान पूर्वक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाभिषेक, भस्म आरती, गंगा आरती हुई। इसके पश्चात शिवलिंगों का मां गंगा की पावन धारा में विसर्जन किया गया। इस मौके पर महाअनुष्ठान के अधिष्ठाता स्वामी बृजेशानंद जी महराज ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिव कृपा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष सभी सिद्ध होते हैं। कहा कि विधिविधान पूर्वक पार्थिव शिवलिंग बनाने वाले की अकाल मृत्यु नहीं होती साथ ही सभी प्रकार की बीमारियों का शमन होता है। कहा पार्थिव शिवलिंग का निर्माण सर्व प्रथम भगवान श्री रामचंद्र जी ने किया था।
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आयोजन को लेकर धार्मिक एवं पौराणिक स्थली भूत भावन भगवान महादेव के रंग में रंग गई है। वैदिक मंत्रोच्चार, सुमधुर भजनों, प्रभु संकीर्तन, श्री सीता राम महायज्ञ मंडप से गूंज रहे वैदिक मंत्रों की अनुगूंज के बीच हजारों शिव भक्तों ने पूरी आस्था और विश्वास के साथ पार्थिव शिवलिंग निर्माण किया। भक्तों ने शिवलिंग बनाकर पुण्यलाभ लिया। सूर्योदय से शुरू हुआ शिवलिंग निर्माण सूर्यास्त तक चला। उसके बाद पतित पावनी मां जाह्नवी के पावन तट पर लाखों पार्थिव शिवलिंगों का विधि विधान पूर्वक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाभिषेक, भस्म आरती, गंगा आरती हुई। इसके पश्चात शिवलिंगों का मां गंगा की पावन धारा में विसर्जन किया गया। इस मौके पर महाअनुष्ठान के अधिष्ठाता स्वामी बृजेशानंद जी महराज ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिव कृपा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष सभी सिद्ध होते हैं। कहा कि विधिविधान पूर्वक पार्थिव शिवलिंग बनाने वाले की अकाल मृत्यु नहीं होती साथ ही सभी प्रकार की बीमारियों का शमन होता है। कहा पार्थिव शिवलिंग का निर्माण सर्व प्रथम भगवान श्री रामचंद्र जी ने किया था।
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