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आडवाणी ने उदीयमान सूर्य को दिया अर्घ्य

Mon, 06 Nov 2017 02:46 AM IST
Updated Mon, 06 Nov 2017 02:46 AM IST
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आडवाणी ने उदीयमान सूर्य को दिया अर्घ्य
पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी दो दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन रविवार को उगते हुए सूर्य को निहारा। कार्तिक पूर्णिमा की चांदनी रात में गंगा के जिस खिड़किया घाट पर उन्होंने अपने जन्मदिन पर दीये जलाए थे, रविवार की सुबह उगते सूर्य को वहीं पर अर्घ्य दिया। इसके बाद बाबा विश्वनाथ का रुद्राभिषेक कर राष्ट्र-समाज की उन्नति की कामना की।
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आडवाणी सुबह 5:30 बजे पुत्री प्रतिभा के साथ खिड़किया घाट पहुंचे। 6:08 बजे सूर्योदय को उन्होंने निहारा और भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान उन्होंने काशी से जुड़ी बचपन की यादें ताजा कीं। बेटी के अलावा आसपास मौजूद चुनिंदा लोगों को बताया कि बचपन में दादा-दादी और माता-पिता के साथ काशी आया था। उन्हीं की कृपा से पूरे भारत के तीर्थों का दर्शन कर सका। वह कुछ देर अतीत और वर्तमान की तुलना करते रहे। बोले, यहां मैंने अपना जन्मदिन मनाकर काशी में सूर्यास्त और सूर्योदय के दर्शन कर अपना जीवन धन्य कर लिया। तभी किसी ने कहा कि सर, अभी हम लोग सूर्य के दर्शन के लिए खड़े होकर इंतजार कर रहे थे लेकिन अब उनके ताप से हटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। तब, आडवाणी ने जवाब दिया कि प्रकृति और शरीर का मिलाप होना जरूरी है। इसके बाद उन्होंने काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा और घाटों के सौंदर्य का बखान किया। इस मौके पर महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, समाजसेवी किशन कुमार जालान के अलावा कुछ अफसर मौजूद थे।
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करीब घंटे भर बाद आडवाणी सर्किट हाउस चले गए। दिन में 10:30 बजे वह बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचे। 20 मिनट तक उन्होंने गर्भगृह में बाबा का रुद्राभिषेक किया। पं. राकेश पाराशर के आचार्यत्व में पांच वैदिक विद्वानों ने अभिषेक कराया। बाबा के दर्शन के बाद मंदिर के सफाई पर्यवेक्षक योगेंद्र गर्ग ने उन्हें अंगवस्त्रम, बाबा विश्वनाथ का चित्र, भस्म, चंदन और प्रसाद भेंट किया। इस दौरान वह बाबा के स्वर्ण शिखर को अपलक निहारते रहे। यहां उनके साथ भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष एमएलसी लक्ष्मण आचार्य भी मौजूद थे।
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मंदिर से बाहर निकलते ही वह लोगों का अभिवादन करते हुए सीधे कार में बैठे और चले गए। शाम 5:20 बजे वह सर्किट हाउस से बाबतपुर एयरपोर्ट रवाना हो गए, जहां से दिल्ली के लिए उड़ान भरी।
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