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नाद नदी से सटे गांवों में 24 घंटे अवैध खनन
Updated Sun, 29 Oct 2017 01:50 AM IST
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चोलापुर। अवैध खनन पर शासन की सख्ती के बावजूद इलाके में खनन माफिया बेलगाम हो गए हैं। खनन विभाग और पुलिस की शह पर कहीं बालू तो कहीं मिट्टी का अवैध खनन धड़ल्ले से कराया जा रहा है। बिना किसी रोक-टोक के खनन माफिया चांदी काट रहे हैं। सरकारी खजाने को रोजाना लाखों की चपत बैठ रही है। शिकायतों के बावजूद उच्चाधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं। जबकि, रौना खुर्द, रौनाकला, टेकारी, गोला, परुई, कटहलगंज, गोसाईपुर मोहाव, तेवर और चिलबिलवां गांव में जेसीबी से अवैध मिट्टी खनन 24 घंटे चलता है। मिट्टी लादकर शहर पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली की आवाजाही दिन रात लगी रहती है।
इसके बावजूद हैरानी की बात यह कि चोलापुर पुलिस कहती है कि अवैध खनन जैसा कुछ भी उसके संज्ञान में नहीं है। खनन विभाग और तहसील प्रशासन भी हालात से वाकिफ होने के बावजूद अनजान बने हैं। क्षेत्र के परुई गांव के लक्ष्मण, भोला, दिनेश, मुकेश, खंझाटी, वीरेंद्र, प्रभु और महेंद्र बताते हैं कि बंजर की पांच बीघा जमीन और नाले की 25 कड़ी जमीन की मिट्टी न जाने कहां चली गई। अब दोनों जगह हालत विशालकाय तालाब जैसी हो गई है। रौना खुर्द, रौना कला, टेकारी, गोला, कटहलगंज, गोसाईपुर मोहाव, तेवर और चिलबिलवां गांव में भी हालात ऐसे ही हैं। अवैध खनन के कारण चंबल घाटी जैसा नजारा दिखाई देता है।
ग्रामीणों के मुताबिक नाद नदी के किनारे के गांवों से अवैध खनन के जरिए मिट्टी ट्रैक्टर-ट्राली से बेला-पहड़िया मार्ग से शहर ले जाई जाती है। प्रति ट्रैक्टर पुलिस और खनन विभाग को औसतन छह सौ से आठ सौ रुपये चढ़ावा देने पड़ते हैं। बाजार में एक ट्रैक्टर मिट्टी ग्राहक की जरूरत और दूरी के आधार पर डेेढ़ से ढाई हजार रुपये तक बेची जाती है। अवैध खनन की मिट्टी का इस्तेमाल शहर की नई कॉलोनियों और प्लाटों को समतल करने के अलावा रिंग रोड और एनएच-233 के निर्माण में भी किया जा रहा है। खुलेआम चल रहे अवैध खनन के बारे में पूछे जाने पर चोलापुर थानाध्यक्ष विनय प्रकाश सिंह ने अनभिज्ञता जाहिर की। कहा कि ऐसा कोई मामला उनकी जानकारी में नहीं है। शिकायतों पर औचक छापेमारी कर कार्रवाई की जाती है।
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इसके बावजूद हैरानी की बात यह कि चोलापुर पुलिस कहती है कि अवैध खनन जैसा कुछ भी उसके संज्ञान में नहीं है। खनन विभाग और तहसील प्रशासन भी हालात से वाकिफ होने के बावजूद अनजान बने हैं। क्षेत्र के परुई गांव के लक्ष्मण, भोला, दिनेश, मुकेश, खंझाटी, वीरेंद्र, प्रभु और महेंद्र बताते हैं कि बंजर की पांच बीघा जमीन और नाले की 25 कड़ी जमीन की मिट्टी न जाने कहां चली गई। अब दोनों जगह हालत विशालकाय तालाब जैसी हो गई है। रौना खुर्द, रौना कला, टेकारी, गोला, कटहलगंज, गोसाईपुर मोहाव, तेवर और चिलबिलवां गांव में भी हालात ऐसे ही हैं। अवैध खनन के कारण चंबल घाटी जैसा नजारा दिखाई देता है।
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ग्रामीणों के मुताबिक नाद नदी के किनारे के गांवों से अवैध खनन के जरिए मिट्टी ट्रैक्टर-ट्राली से बेला-पहड़िया मार्ग से शहर ले जाई जाती है। प्रति ट्रैक्टर पुलिस और खनन विभाग को औसतन छह सौ से आठ सौ रुपये चढ़ावा देने पड़ते हैं। बाजार में एक ट्रैक्टर मिट्टी ग्राहक की जरूरत और दूरी के आधार पर डेेढ़ से ढाई हजार रुपये तक बेची जाती है। अवैध खनन की मिट्टी का इस्तेमाल शहर की नई कॉलोनियों और प्लाटों को समतल करने के अलावा रिंग रोड और एनएच-233 के निर्माण में भी किया जा रहा है। खुलेआम चल रहे अवैध खनन के बारे में पूछे जाने पर चोलापुर थानाध्यक्ष विनय प्रकाश सिंह ने अनभिज्ञता जाहिर की। कहा कि ऐसा कोई मामला उनकी जानकारी में नहीं है। शिकायतों पर औचक छापेमारी कर कार्रवाई की जाती है।
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