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Unnao News: पराली खेतों में न जलाएं, गोशाला में दान देकर गोबर की खाद लें
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गंजमुरादाबाद। कृषि अधिकारी खेतों में जा जाकर किसानों को पराली जलाने के बजाय खेतों में प्रयोग करने या पराली को गोशाला में दान देने की अपील कर रहे हैं।
इस समय धान की कटाई मड़ाई का काम तेजी से चल रहा है। किसान खेतों में पराली न जलाएं इसके लिए कृषि अधिकारी और कर्मचारी खेतों में जाकर पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
किसानों को बताया जा रहा है कि खेतों में पराली जलाने से उर्वरता कम हो जाती है और वातावरण भी प्रदूषित होता है। इसलिए किसानों को पराली को जोतकर खेत में मिला लेने से खेतों की उर्वरता बढ़ जाती है। वातावरण भी शुद्ध रहता है।
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यही नहीं किसानों को पराली जलाने पर सजा और जुर्माने का भी प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा कंबाइन मशीन के मालिक को धान की कटाई करने के लिए एआरटीओ कार्यालय से अनुमति लेना आवश्यक है।
इसके अलावा किसानों से भी पराली न जलाने की लिखित गारंटी लेनी होगी। किसान दो ट्राली पराली दान देकर उसके बदले में गोशाला से गोबर की खाद आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह भी बताया जा रहा है कि खेतों की निगरानी सेटेलाइट से की जा रही है।
सहायक विकास अधिकारी कृषि देवी सिंह ने बताया कि किसान किसी भी कीमत पर पराली न जला सके इसके लिए वे खुद अपनी टीम के साथ खेतों की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा किसानों को पराली के फायदे और नुकसान के बारे में जागरुक भी कर रहे हैं।
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इस समय धान की कटाई मड़ाई का काम तेजी से चल रहा है। किसान खेतों में पराली न जलाएं इसके लिए कृषि अधिकारी और कर्मचारी खेतों में जाकर पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
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किसानों को बताया जा रहा है कि खेतों में पराली जलाने से उर्वरता कम हो जाती है और वातावरण भी प्रदूषित होता है। इसलिए किसानों को पराली को जोतकर खेत में मिला लेने से खेतों की उर्वरता बढ़ जाती है। वातावरण भी शुद्ध रहता है।
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यही नहीं किसानों को पराली जलाने पर सजा और जुर्माने का भी प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा कंबाइन मशीन के मालिक को धान की कटाई करने के लिए एआरटीओ कार्यालय से अनुमति लेना आवश्यक है।
इसके अलावा किसानों से भी पराली न जलाने की लिखित गारंटी लेनी होगी। किसान दो ट्राली पराली दान देकर उसके बदले में गोशाला से गोबर की खाद आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह भी बताया जा रहा है कि खेतों की निगरानी सेटेलाइट से की जा रही है।
सहायक विकास अधिकारी कृषि देवी सिंह ने बताया कि किसान किसी भी कीमत पर पराली न जला सके इसके लिए वे खुद अपनी टीम के साथ खेतों की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा किसानों को पराली के फायदे और नुकसान के बारे में जागरुक भी कर रहे हैं।