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जिला अस्पताल में युवक की मौत, हंगामा
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जिला अस्पताल में परिजनों को समझाते अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राजेश कुमार।
- फोटो : UNNAO
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उन्नाव। जिला अस्पताल में नवाबगंज सीएचसी से रेफर होकर आए मरीज की उपचार दौरान मौत हो गई। परिजनों ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगा हंगामा किया। पुलिस ने परिजनों को शांत कराया। हालांकि कार्रवाई की मांग पर अड़े परिजन वार्ड से शव हटाने को तैयार नहीं हुए। बवाल की सूचना पर पहुंचे अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। जिसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
अचलगंज थानाक्षेत्र के दरोगाखेड़ा निवासी संतू (45) पुत्र सीताराम अस्थमा की बीमारी से पीड़ित था। परिजन गांव के ही एक डॉक्टर से उसका इलाज करा रहे थे। हालत में सुधार न होने पर दो दिन पूर्व वह उसे लेकर नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। जहां मंगलवार सुबह उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ डा. अहमद ने उसका इलाज किया। कुछ देर बाद ही संतू की मौत हो गई। जिस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। पिता सीताराम का आरोप था कि इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद ही बेटे की मौत हो गई।
उन्होंने इमरजेंसी मेडिकल आफीसर पर इलाज में लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर जिला अस्पताल चौकी इंचार्ज रामजीत इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। उन्होंने परिजनों को शांत कराया और शव हटवाने की कोशिश की लेकिन परिजन इस पर तैयार नहीं हुए। सूचना पर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राजेश कुमार चौरसिया जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिजनों को जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। जिसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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गंभीर हालत में लाया गया था अस्पताल
डा. अहमद ने बताया कि मरीज को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इलाज में लापरवाही नहीं बरती गई है।
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अचलगंज थानाक्षेत्र के दरोगाखेड़ा निवासी संतू (45) पुत्र सीताराम अस्थमा की बीमारी से पीड़ित था। परिजन गांव के ही एक डॉक्टर से उसका इलाज करा रहे थे। हालत में सुधार न होने पर दो दिन पूर्व वह उसे लेकर नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। जहां मंगलवार सुबह उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ डा. अहमद ने उसका इलाज किया। कुछ देर बाद ही संतू की मौत हो गई। जिस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। पिता सीताराम का आरोप था कि इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद ही बेटे की मौत हो गई।
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उन्होंने इमरजेंसी मेडिकल आफीसर पर इलाज में लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर जिला अस्पताल चौकी इंचार्ज रामजीत इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। उन्होंने परिजनों को शांत कराया और शव हटवाने की कोशिश की लेकिन परिजन इस पर तैयार नहीं हुए। सूचना पर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राजेश कुमार चौरसिया जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिजनों को जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। जिसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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गंभीर हालत में लाया गया था अस्पताल
डा. अहमद ने बताया कि मरीज को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इलाज में लापरवाही नहीं बरती गई है।