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हाथ नहीं आए नकाबपोश
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Wed, 08 Mar 2017 11:41 PM IST
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जंगल में कांबिंग करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के एक जंगल में काले कपड़ों में नकाबपोश पांच संदिग्ध युवकों को देखे जाने की सूचना से बुधवार दोपहर सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। घंटों जंगल की कांबिंग भी की गई, लेकिन कोई नहीं मिला।
अटवा गांव निवासी बब्लू का 11 वर्षीय बेटा अंकित छोटे भाई रिंकू और गांव के ही कल्लू पुत्र झम्मी के साथ बुधवार सुबह करीब 11 बजे गांव के बाहर बबूल के साथ जंगल में लकड़ियां लेने गए थे। अंकित के अनुसार जंगल में कच्चे नाले के पास वह लकड़ी तोड़ रहा था तभी काले कपड़े पहने पांच युवक दिखे। उनके हाथ में चाकू जैसी कोई चीज थी। सभी की पीठ पर बैग भी था और चेहरा ढके थे। उन्हें देखकर वह तीनों डर गए और भागकर गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को सूचना दी।
इसी गांव के अतुल सिंह ने 100 नंबर डायल कर पुलिस को जानकारी दी। काफी देर तक पुलिस के न पहुंचने पर पूर्व प्रधान महेंद्र के बेटे सामेंद्र प्रताप सिंह ने सफीपुर सीओ अशोक सिंह और इंस्पेक्टर हनुमान प्रसाद पांडेय को सूचना दी। पुलिस ने काफी देर तक कांबिंग की लेकिन कोई नहीं मिला। सफीपुर कोतवाली इंस्पेक्टर हनुमान प्रसाद पांडेय ने बताया कि घटना की जांच कराई जा रही है। नकाबपोश लोग कौन थे यह जांच के बाद ही सामने आएगा।
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चूल्हा, पत्तल और शराब की बोतलें मिलीं
बच्चों ने जिन संदिग्धों को देखा उन्होंने यहां जगल में ही खाना भी गर्म किया और शराब भी पी थी। जहां पर बच्चों ने पांच संदिग्धों को देखा वहां से करीब डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर पुलिस को एक मिटटी खोदकर बनाया गया चूल्हा, सात पत्तल, गोरखपुर निर्मित देशी शराब की दो खाली बोतल और पानी के पांच खाली पाउच भी मिले हैं। एक पत्तल में कुछ चावल भी लगे हैं। हालांकि सीओ अशोक सिंह का कहना है कि चूल्हा और पत्तल कई दिन पुराने लग रहे हैं। सामग्री को कब्जे में लेकर जांच कराई जा रही है।
ग्रामीण बोले, पुलिस समय से पहुंचती तो धरे जाते
ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस समय से पहुंच जाती तो शायद सफलता मिल जाती। ग्रामीणों के अनुसार सूचना देने के करीब एक घंटे बाद डायल 100 की एक गाड़ी पहुंची। पुलिसकर्मी औपचारिक जांच करने लगे इसके करीब आधे घंटे बाद सीओ और इंस्पेक्टर पहुंचे। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय से पहुंच जाती और चारो ओर से घेराबंदी कर कांबिंग करती तो शायद संदिग्ध पकड़े जाते।
अटवा गांव निवासी बब्लू का 11 वर्षीय बेटा अंकित छोटे भाई रिंकू और गांव के ही कल्लू पुत्र झम्मी के साथ बुधवार सुबह करीब 11 बजे गांव के बाहर बबूल के साथ जंगल में लकड़ियां लेने गए थे। अंकित के अनुसार जंगल में कच्चे नाले के पास वह लकड़ी तोड़ रहा था तभी काले कपड़े पहने पांच युवक दिखे। उनके हाथ में चाकू जैसी कोई चीज थी। सभी की पीठ पर बैग भी था और चेहरा ढके थे। उन्हें देखकर वह तीनों डर गए और भागकर गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को सूचना दी।
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इसी गांव के अतुल सिंह ने 100 नंबर डायल कर पुलिस को जानकारी दी। काफी देर तक पुलिस के न पहुंचने पर पूर्व प्रधान महेंद्र के बेटे सामेंद्र प्रताप सिंह ने सफीपुर सीओ अशोक सिंह और इंस्पेक्टर हनुमान प्रसाद पांडेय को सूचना दी। पुलिस ने काफी देर तक कांबिंग की लेकिन कोई नहीं मिला। सफीपुर कोतवाली इंस्पेक्टर हनुमान प्रसाद पांडेय ने बताया कि घटना की जांच कराई जा रही है। नकाबपोश लोग कौन थे यह जांच के बाद ही सामने आएगा।
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चूल्हा, पत्तल और शराब की बोतलें मिलीं
बच्चों ने जिन संदिग्धों को देखा उन्होंने यहां जगल में ही खाना भी गर्म किया और शराब भी पी थी। जहां पर बच्चों ने पांच संदिग्धों को देखा वहां से करीब डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर पुलिस को एक मिटटी खोदकर बनाया गया चूल्हा, सात पत्तल, गोरखपुर निर्मित देशी शराब की दो खाली बोतल और पानी के पांच खाली पाउच भी मिले हैं। एक पत्तल में कुछ चावल भी लगे हैं। हालांकि सीओ अशोक सिंह का कहना है कि चूल्हा और पत्तल कई दिन पुराने लग रहे हैं। सामग्री को कब्जे में लेकर जांच कराई जा रही है।
ग्रामीण बोले, पुलिस समय से पहुंचती तो धरे जाते
ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस समय से पहुंच जाती तो शायद सफलता मिल जाती। ग्रामीणों के अनुसार सूचना देने के करीब एक घंटे बाद डायल 100 की एक गाड़ी पहुंची। पुलिसकर्मी औपचारिक जांच करने लगे इसके करीब आधे घंटे बाद सीओ और इंस्पेक्टर पहुंचे। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय से पहुंच जाती और चारो ओर से घेराबंदी कर कांबिंग करती तो शायद संदिग्ध पकड़े जाते।