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नहर का पानी रोकने पर ग्रामीणों ने किया हंगामा
Unnao
Updated Sun, 30 Nov 2014 05:30 AM IST
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औरास। सिंचाई विभाग के ठेकेदार की कारस्तानी से ब्लाक क्षेत्र के कई गांव के लोगों को पानी से फल चल रही शारदा नहर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोग प्राइवेट साधनों से सिंचाई करने को विवश हैं। इससे आक्रोशित किसानों ने ठेकेदार पर नहर का पानी काटकर खारजा में उतारने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। शिकायत मिलने पर एसडीएम हसनगंज ने विभागीय अफसरों को फटकार लगाई है और किसानों को नहर का पानी जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
ब्लाक क्षेत्र में सीमऊ के पास से शारदा नहर निकली है। इस नहर से छेदियाखेड़ा, औरास, खरवल, माइनर, कबरोई, सरौंद, उमरायखेड़ा, दुर्जनखेड़ा, पंचमारखेड़ा, अलदौ समेत दो दर्जन गांवों तक पानी पहुंचता है। इन गांवों के किसानों के लिए यही नहर सिंचाई का मात्र साधन है। नहर में पानी न होने पर यह लोग निजी साधनों से सिंचाई की व्यवस्था करते हैं। जिससे फसल की लागत काफी बढ़ जाती है। ग्रामीणों में सुरेश, रमेश, बृजेश कुमार, साहबलाल, बाबूलाल, रामलखन, केशनपाल आदि ने बताया कि खुद को मेट बताने वाले ठेकेदार सुरेश मछली का शिकार करने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए अजीजनगर गांव के पास निकले खारजा में नहर का पानी काट देता है। खारजा माइनर से बड़ा और नहर से छोटा होता है। इसका प्रयोग उस समय होता है जब नहर ओवरफ्लो हो जाती है। बाहर पानी न बहे इसलिए नहर से काटकर पानी को खारजा में निकाल दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार जानबूझकर ऐसा करता है। नहर कट जाने से उन लोगों के गांव तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि रात में वह लोग मौके पर गए थे और खारजा में जा रहे पानी को बंद कराया था। उन लोगों के वापस आने पर पुन: ठेकेदार ने खारजा में पानी खोल दिया। शनिवार सुबह वह लोग मौके पर गए और पानी बंद मिलने पर एसडीएम हसनगंज प्रशांत भारती को सूचना दी थी। उपजिलाधिकारी ने फोन पर बताया कि विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं। भविष्य में ऐसा नहीं होगा। यदि हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पानी न मिलने से फसलों पर छाया संकट
औरास। नहर का पानी करीब दो दर्जन गांवों के खेतों तक न पहुंच पाने से यहां सैकड़ों बीघा खेतों में बोई गई फसलों के सूखने का खतरा मंडराने लगा है। दिन में सामान्य से ज्यादा तापमान भी किसानों के लिए सिरदर्द पैदा करने वाला है। क्योंकि धूप तेज होने के कारण किसान फसलों को बचाने के लिए ज्यादा पानी लगा रहे हैं। नहर का पानी मिल रहा था तो स्थिति ठीक थी लेकिन अब जब किसानों को निजी श्रोत से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है तो उनकी फसलों की लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता साफ देखी जा रही है।
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ब्लाक क्षेत्र में सीमऊ के पास से शारदा नहर निकली है। इस नहर से छेदियाखेड़ा, औरास, खरवल, माइनर, कबरोई, सरौंद, उमरायखेड़ा, दुर्जनखेड़ा, पंचमारखेड़ा, अलदौ समेत दो दर्जन गांवों तक पानी पहुंचता है। इन गांवों के किसानों के लिए यही नहर सिंचाई का मात्र साधन है। नहर में पानी न होने पर यह लोग निजी साधनों से सिंचाई की व्यवस्था करते हैं। जिससे फसल की लागत काफी बढ़ जाती है। ग्रामीणों में सुरेश, रमेश, बृजेश कुमार, साहबलाल, बाबूलाल, रामलखन, केशनपाल आदि ने बताया कि खुद को मेट बताने वाले ठेकेदार सुरेश मछली का शिकार करने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए अजीजनगर गांव के पास निकले खारजा में नहर का पानी काट देता है। खारजा माइनर से बड़ा और नहर से छोटा होता है। इसका प्रयोग उस समय होता है जब नहर ओवरफ्लो हो जाती है। बाहर पानी न बहे इसलिए नहर से काटकर पानी को खारजा में निकाल दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार जानबूझकर ऐसा करता है। नहर कट जाने से उन लोगों के गांव तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि रात में वह लोग मौके पर गए थे और खारजा में जा रहे पानी को बंद कराया था। उन लोगों के वापस आने पर पुन: ठेकेदार ने खारजा में पानी खोल दिया। शनिवार सुबह वह लोग मौके पर गए और पानी बंद मिलने पर एसडीएम हसनगंज प्रशांत भारती को सूचना दी थी। उपजिलाधिकारी ने फोन पर बताया कि विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं। भविष्य में ऐसा नहीं होगा। यदि हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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पानी न मिलने से फसलों पर छाया संकट
औरास। नहर का पानी करीब दो दर्जन गांवों के खेतों तक न पहुंच पाने से यहां सैकड़ों बीघा खेतों में बोई गई फसलों के सूखने का खतरा मंडराने लगा है। दिन में सामान्य से ज्यादा तापमान भी किसानों के लिए सिरदर्द पैदा करने वाला है। क्योंकि धूप तेज होने के कारण किसान फसलों को बचाने के लिए ज्यादा पानी लगा रहे हैं। नहर का पानी मिल रहा था तो स्थिति ठीक थी लेकिन अब जब किसानों को निजी श्रोत से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है तो उनकी फसलों की लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता साफ देखी जा रही है।
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