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विधायक निधि खर्च करने में चंदेल अव्वल
Unnao
Updated Sat, 29 Nov 2014 05:30 AM IST
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उन्नाव। वित्त वर्ष 2014 शुरू हुए आठ माह होने जा रहे हैं। और इस दौरान विधायक निधि खर्च करने में पुरवा, भगवंतनगर व मोहान के विधायक अव्वल तो सफीपुर व सदर विधायक फिसड्डी साबित हुए हैं।
तीन क्षेत्रों के एमएलसी ने अपनी निधि की ज्यादातर धनराशि विकास कार्यो पर खर्च कर डाली है। जबकि एमएलए अपनी निधि का समुचित उपयोग नहीं कर पाए हैं। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष में मिली निधि धनराशि
खर्च करने के लिए विधायकों के पास अभी चार महीने हैं। इसमें बकाया धनराशि खर्च करना उनके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं है।
सफीपुर मे विधायक निधि सबसे कम खर्च हुई और सबसे अधिक खर्च पुरवा विधानसभा में हुआ। विधायकों को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए डेढ़ करोड रूपये प्रतिवर्ष बतौर विधायकनिधि मिलते हैं। विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में निधि से पैसा देकर विकास कार्य कराते हैं।विधायक का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और पंाच वर्ष में प्रत्येक विधायक को साढ़े सात करोड़ रूपये क्षेत्र के विकास के लिए मिलते है। विधान परिषद सदस्य को भी क्षेत्र के विकास के लिए शासन से पैसा मिलता है। जिले के छह विधायकों में सबसे कम खर्च सफीपुर के विधायक ने किया है। उन्होंने अभी तक मात्र 19.94 लाख रुपये ही विधायक निधि से खर्च किए हैं। सदर विधायक ने 40.47 लाख रुपये खर्च किए है। हालांकि उन्हें विधायक बने अभी छह माह ही हुए हैं। मोहान विधानसभा में विधायक निधि से 83.78 लाख रुपये खर्च हुए है। भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में 83.36 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। विधायक निधि में सर्वाधिक पुरवा विधानसभा में 123.82 लाख रुपये अभी तक खर्च हो चुके हैं। जिले के विधान परिषद सदस्यों में शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल विधायक निधि खर्च करने में अव्वल रहे। उन्होंने अपनी निधि का 144.09 लाख रुपए खर्च कर दिया है। वही एमएलसी हृदय नारायण दीक्षित ने विधायक निधि का 105. 22 लाख रुपये खर्च कर दिया है। प्रत्येक विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में जनपयोगी कार्य के लिए पैसा दे सकता है। संपर्क मार्ग, ख़ड़ंजा मार्ग, सीसी रोड़, इंटरलाकिंग रोड, डमरीकरण, स्वास्थ्य सम्बंधित कार्य, विद्यालय भवन, बिजली, पुल आदि जनपयोगी कार्य विधायक निधि से हो सकते है।
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तीन क्षेत्रों के एमएलसी ने अपनी निधि की ज्यादातर धनराशि विकास कार्यो पर खर्च कर डाली है। जबकि एमएलए अपनी निधि का समुचित उपयोग नहीं कर पाए हैं। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष में मिली निधि धनराशि
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खर्च करने के लिए विधायकों के पास अभी चार महीने हैं। इसमें बकाया धनराशि खर्च करना उनके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं है।
सफीपुर मे विधायक निधि सबसे कम खर्च हुई और सबसे अधिक खर्च पुरवा विधानसभा में हुआ। विधायकों को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए डेढ़ करोड रूपये प्रतिवर्ष बतौर विधायकनिधि मिलते हैं। विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में निधि से पैसा देकर विकास कार्य कराते हैं।विधायक का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और पंाच वर्ष में प्रत्येक विधायक को साढ़े सात करोड़ रूपये क्षेत्र के विकास के लिए मिलते है। विधान परिषद सदस्य को भी क्षेत्र के विकास के लिए शासन से पैसा मिलता है। जिले के छह विधायकों में सबसे कम खर्च सफीपुर के विधायक ने किया है। उन्होंने अभी तक मात्र 19.94 लाख रुपये ही विधायक निधि से खर्च किए हैं। सदर विधायक ने 40.47 लाख रुपये खर्च किए है। हालांकि उन्हें विधायक बने अभी छह माह ही हुए हैं। मोहान विधानसभा में विधायक निधि से 83.78 लाख रुपये खर्च हुए है। भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में 83.36 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। विधायक निधि में सर्वाधिक पुरवा विधानसभा में 123.82 लाख रुपये अभी तक खर्च हो चुके हैं। जिले के विधान परिषद सदस्यों में शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल विधायक निधि खर्च करने में अव्वल रहे। उन्होंने अपनी निधि का 144.09 लाख रुपए खर्च कर दिया है। वही एमएलसी हृदय नारायण दीक्षित ने विधायक निधि का 105. 22 लाख रुपये खर्च कर दिया है। प्रत्येक विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में जनपयोगी कार्य के लिए पैसा दे सकता है। संपर्क मार्ग, ख़ड़ंजा मार्ग, सीसी रोड़, इंटरलाकिंग रोड, डमरीकरण, स्वास्थ्य सम्बंधित कार्य, विद्यालय भवन, बिजली, पुल आदि जनपयोगी कार्य विधायक निधि से हो सकते है।
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