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पांच किमी हिचकोलों का सफर अभी और

Unnao Updated Mon, 11 Feb 2013 05:30 AM IST
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उन्नाव। उन्नाव-हरदोई मार्ग के यात्रियों को अभी पांच किलोमीटर का सफर हिचकोलों के बीच तय करना होगा। कारण, लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क की मरम्मत से इनकार कर दिया है। विभाग इस सड़क को फिर से बनाने की बात कह रहा है और इस काम में काफी वक्त लगेगा।
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हरदोई-उन्नाव-रायबरेली राजमार्ग शहर के शास्त्री ब्रिज से दोस्तीनगर बाईपास तक पहुंचता है। शहर से होकर गुजरने वाली यह पांच किलोमीटर लंबी सड़क काफी जर्जर हो चुकी है। जिला प्रशासन ने इसकी मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग से इस्टीमेट मांगा है लेकिन विभाग ने इसकी मरम्मत को बेकार की कवायद बता कर इस्टीमेट बनाने से ही इनकार कर दिया। मालूम हो कि शास्त्री ब्रिज से लेकर दोस्तीनगर मोड़ तक इस पांच किलोमीटर सड़क का वित्तीय वर्ष 2008-09 में नवीनीकरण किया गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक चिकनी मिट्टी की अधिकता के कारण छह माह में ही सड़क ऊबड़-खाबड़ हो गई। इससे सड़क में जगह जगह गड्ढे और दरारें पड़ गईं। करीब ढाई करोड़ खर्च कर बनी सड़क छह माह में ही खराब हो जाने पर इसकी कई बार जांच की गई। मार्ग निर्माण के पांच वर्ष पूर्ण होने के बाद एक बार फिर जिला प्रशासन ने इसकी मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए। पिछले निर्माण के बाद जांच और आरोपों की फजीहत झेल चुके विभाग ने इसकी मरम्मत करने से मना कर दिया।

लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड एक्सईएन पीए खान ने बताया कि मार्ग की मरम्मत करने से सरकारी धन की हानि ही होगी। यहां की मिट्टी का कैलिफोर्निया बियरिंग रेशियो (सीबीआर) मानक का मात्र एक तिहाई है। विभाग की रिसर्च टीम ने गुरुवार को सड़क के नमूने लिए हैं रिपोर्ट आने के बाद ही इस मार्ग के सुदृढ़ीकरण का एस्टीमेट तैयार कराया जाएगा। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही काम शुरू होगा।


क्या है कैलिफोर्निया बियरिंग रेशियो
उन्नाव। यह एक जांच है। इसमें मिट्टी के अवयवों की क्षमता और भार वहन क्षमता का आंकलन किया जाता है। लोक निर्माण विभाग जेई एसके रावत के मुताबिक सड़क निर्माण के लिए कैलिफोर्निया बियरिंग रेशियो (सीबीआर) का मानक 8 है। मालूम हो कि दोस्तीनगर बाईपास मार्ग की मिट्टी का सीबीआर मात्र 2.5 है।


कराई गई थी जांच
उन्नाव। 2009 में बनने के छह माह बाद ही सड़क में आई दरारों को विभागीय खामी मानते हुए कई जांचें कराई गई थीं। जेई एसके रावत ने बताया कि मोतीलाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कालेज इलाहाबाद से आई टीम ने मार्ग का निरीक्षण किया था। टीम ने निर्माण में खामी नहीं पाई थी बल्कि मिट्टी खराब होने के कारण सड़क टूटने की रिपोर्ट दी थी।


सड़क निर्माण के लिए चाहिए बलुई मिट्टी
उन्नाव। पीडब्लूडी एक्सईएन पीए खान ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। बताया कि दोस्तीनगर-शास्त्री ब्रिज मार्ग में चिकनी मिट्टी की अधिकता है। पानी पड़ने पर इस मिट्टी में हवा भर जाती है जिससे यह जगह जगह फूल जाती है। दबाव पड़ने पर हवा बाहर निकल जाती है और सड़क में गड्ढे बन जाते हैं।

रिसर्च टीम ने लिया सैंपल
उन्नाव। एक्सईएन पीए खान ने बताया कि गुरुवार को लखनऊ से आई रिसर्च टीम ने सड़क का निरीक्षण किया और कई जगहों से नमूने लिए। बताया कि टीम ने सड़क की भार वहन क्षमता का परीक्षण (एक्सल टेस्ट) किया। मानक के मुताबिक सड़क की भार वहन क्षमता 12 टन (एक्सल भार) होनी चाहिए। यह सड़क मानक से आधा वजन भी नहीं सह सकी थी।

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