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डॉक्टरों के बहिष्कार से चरमराई चिकित्सीय व्यवस्था
Amarujala Bureau
Updated Tue, 06 Jun 2017 10:09 PM IST
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ठप हुईं मेडिकल सेवाएं
- फोटो : अमर उजाला
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डॉक्टरों और मेडिकल सेक्टर में हो रही हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने समेत अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले चिकित्सकों ने चिकित्सीय सेवा का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। चिकित्सकों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को दिया।
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चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार से निजी चिकित्सीय सेवाएं चरमरा गईं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक रोजाना खुलने वाले पैथालॉजी सेंटर, अल्ट्रासाउंड सेंटर पूरी तरह से बंद रहने से मरीजों व तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को देशव्यापी हड़ताल थी। इसके तहत जिले के सभी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, पैथालॉजी सेंटर पूरी तरह बंद रहे। चिकित्सकों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे आईएमए के अध्यक्ष डॉ. वीके शुक्ला ने कहा कि हॉस्पिटल, डॉक्टर और मेडिकल सेक्टर पर हिंसा के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। सचिव डॉ. आशीष सिंह ने डॉक्टर और उनके चिकित्सकीय प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन सिंगल विंडो से करने के साथ ही लाइसेंस राज समाप्त करने की मांग की।
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डॉ. एएन सिंह ने कहा कि एमसीआई को भंग करने से बेहतर उसमें सुधार किया जाए। केवल जेनेरिक दवाओं को लिखने की बाध्यता न हो, जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के मूल्य में ज्यादा अंतर न हो, स्वास्थ्य बजट को एक प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत किया जाए। डॉक्टरों को इलाज और जांच लिखने की पेशेवर स्वतंत्रता मिले। प्रदर्शन के बाद चिकित्सक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री को संबोधित सात सूत्री मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंपा।