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Sonebhadra News: सड़क हादसे में घायल युवक की उपचार के दौरान मौत
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बीजपुर-रेणुकूट मार्ग पर नकटू क्षेत्र में सड़क हादसे में घायल मनोज (21) पुत्र रामजी निवासी हथियार थाना बभनी की उपचार के दौरान मौत हो गई। युवक का नौ दिन से ट्रामा सेंटर बैढन में उपचार चल रहा था। बुधवार की रात हालत बिगड़ने पर वाराणसी ले जाते समय उसकी मौत हो गई। युवक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया।
बीजपुर थाना क्षेत्र में नौ दिन पहले सड़क हादसे में बाइक सवार दो युवकों में एक की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं बाइक पर पीछे बैठा मनोज गंभीर रूप से घायल हो गया था। रिहंद परिसर स्थित धनवंतरी चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार करके मनोज को रेफर कर दिया गया था। इसका इलाज परिजन बैढ़न स्थित ट्राॅमा सेंटर में करा रहे थे। बुधवार को मनोज की हालत गंभीर होने लगी। इस पर डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया। घरवाले उपचार कराने के लिए मनोज को वाराणसी ले जाने लगे। रास्ते में धरतीडाड़ के पास युवक की सांसें थम गईं। मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। शव को रात भर परिजन घर में रखे रहे। बृहस्पतिवार की सुबह बीजपुर थाने में पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी भेज दिया।
बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मनोज बतौर श्रमिक के रूप में रिहंद परियोजना में एक कार्यदायी संस्था के अंतर्गत काम करता था। इसी से वह अपनी घर गृहस्थी का खर्च चलाता था। मनोज की मौत से उसकी पत्नी की दुनिया उजड़ गई, बल्कि चार बच्चे अनाथ हो गए। चार बच्चों के सिर से पिता का छाया उठ गया।
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बीजपुर थाना क्षेत्र में नौ दिन पहले सड़क हादसे में बाइक सवार दो युवकों में एक की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं बाइक पर पीछे बैठा मनोज गंभीर रूप से घायल हो गया था। रिहंद परिसर स्थित धनवंतरी चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार करके मनोज को रेफर कर दिया गया था। इसका इलाज परिजन बैढ़न स्थित ट्राॅमा सेंटर में करा रहे थे। बुधवार को मनोज की हालत गंभीर होने लगी। इस पर डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया। घरवाले उपचार कराने के लिए मनोज को वाराणसी ले जाने लगे। रास्ते में धरतीडाड़ के पास युवक की सांसें थम गईं। मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। शव को रात भर परिजन घर में रखे रहे। बृहस्पतिवार की सुबह बीजपुर थाने में पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी भेज दिया।
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बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मनोज बतौर श्रमिक के रूप में रिहंद परियोजना में एक कार्यदायी संस्था के अंतर्गत काम करता था। इसी से वह अपनी घर गृहस्थी का खर्च चलाता था। मनोज की मौत से उसकी पत्नी की दुनिया उजड़ गई, बल्कि चार बच्चे अनाथ हो गए। चार बच्चों के सिर से पिता का छाया उठ गया।
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