करमा की थाप और पारंपरिक गीतों से सोमवार को कोटा के कानोपान मौजा स्थित राधाकृष्ण वालवाणी केंद्र का परिसर गूंज उठा। यहां जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव (करमा पूजा) का भव्य आयोजन किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे जनजातीय समाज के लोगों ने लोक परंपराओं और आस्था का प्रदर्शन किया।
महोत्सव का शुभारंभ राम दरबार विग्रह के अनावरण से हुआ। इसके बाद बैगा पुजारियों ने विधि-विधान से करम देवता की पूजा कर अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने कहा कि जनजातीय समाज की लोक परंपराएं, पूजा-पद्धति, रहन-सहन और गीत-संगीत उसकी पहचान हैं। अपनी संस्कृति पर गर्व करते हुए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने की जरूरत है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना होगा। समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव गोंड ने कहा कि सोनभद्र की जनजातीय संस्कृति लोकगीत, लोकनृत्य और प्रकृति के प्रति आस्था के लिए विशिष्ट है। इस विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, पेट्रोलियम मंत्रालय की चेयरमैन शारदा खरवार, सेवा समर्पण संस्थान के जिलाध्यक्ष जेसी विमल, एसडीएम ओबरा रवि पासवान, जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया आदि मौजूद रहे।