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सोनभद्रः विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के खिलाफ किया प्रदर्शन, हड़ताल की चेतावनी
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राबर्ट्सगंज विद्युत निगम कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समित
- फोटो : SONBHADRA
ओबरा। राज्य के सभी ऊर्जा निगमों के बिजलीकर्मियों ने देश के सभी प्रांतों के 15 लाख बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं के साथ केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया।
ओबरा में हुई विरोध सभा में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों में इं. अदालत वर्मा, इं. आरजी सिंह, शशिकांत श्रीवास्तव, इं. अंकित प्रकाश, इं. अभय प्रताप सिंह, शाहिद अख्तर आदि ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बीच केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारें बिजली वितरण का निजीकरण करने पर तुली हैं, जिसके विरोध में देश भर के बिजली कर्मियों ने प्रदर्शन कर आक्रोश व्यक्त किया। निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट को निरस्त करने की मांग की। चेताया कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह वापस न की गई तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। वक्ताओं बताया कि बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं खासकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं से निजीकरण विरोधी आंदोलन में सहयोग करने की अपील की और कहा कि निजीकरण के बाद सबसे अधिक नुकसान आम उपभोक्ताओं का ही होने जा रहा है।
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार लागत से कम मूल्य पर किसी को भी बिजली नहीं दी जाएगी और सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी। वर्तमान में बिजली की लागत लगभग रु 07.90 प्रति यूनिट है और कंपनी एक्ट के अनुसार निजी कंपनियों को कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा लेने का अधिकार होगा जिसका अर्थ यह हुआ कि 10 रु प्रति यूनिट से कम दाम पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली नहीं मिलेगी। स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजी कंपनियों को डिस्कॉम की परिसंपत्तियां कौड़ियों के दाम सौंपी जानी है, इतना ही नहीं तो सरकार डिस्कॉम की सभी देनदारियों के घाटे को खुद अपने ऊपर ले लेगी और निजी कंपनियों को क्लीन स्लेट डिस्कॉम दी जाएगी। इस मौके पर इं. ओमप्रकाश पाल, विजय प्रताप कुशवाहा, वरुण कुमार, गोपीचंद, पशुपति नाथ विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।
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ओबरा में हुई विरोध सभा में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों में इं. अदालत वर्मा, इं. आरजी सिंह, शशिकांत श्रीवास्तव, इं. अंकित प्रकाश, इं. अभय प्रताप सिंह, शाहिद अख्तर आदि ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बीच केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारें बिजली वितरण का निजीकरण करने पर तुली हैं, जिसके विरोध में देश भर के बिजली कर्मियों ने प्रदर्शन कर आक्रोश व्यक्त किया। निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट को निरस्त करने की मांग की। चेताया कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह वापस न की गई तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। वक्ताओं बताया कि बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं खासकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं से निजीकरण विरोधी आंदोलन में सहयोग करने की अपील की और कहा कि निजीकरण के बाद सबसे अधिक नुकसान आम उपभोक्ताओं का ही होने जा रहा है।
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इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार लागत से कम मूल्य पर किसी को भी बिजली नहीं दी जाएगी और सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी। वर्तमान में बिजली की लागत लगभग रु 07.90 प्रति यूनिट है और कंपनी एक्ट के अनुसार निजी कंपनियों को कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा लेने का अधिकार होगा जिसका अर्थ यह हुआ कि 10 रु प्रति यूनिट से कम दाम पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली नहीं मिलेगी। स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजी कंपनियों को डिस्कॉम की परिसंपत्तियां कौड़ियों के दाम सौंपी जानी है, इतना ही नहीं तो सरकार डिस्कॉम की सभी देनदारियों के घाटे को खुद अपने ऊपर ले लेगी और निजी कंपनियों को क्लीन स्लेट डिस्कॉम दी जाएगी। इस मौके पर इं. ओमप्रकाश पाल, विजय प्रताप कुशवाहा, वरुण कुमार, गोपीचंद, पशुपति नाथ विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।
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