अनपरा। नगर पंचायत अनपरा को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग नजर आ रही है। नगर की करीब 20 फीसदी आबादी के घरों में अब भी शौचालय नहीं होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। खासकर मजदूर बस्तियों में रहने वाली महिलाओं को रेलवे लाइन और नदी किनारे जाने के कारण हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। अनपरा नगर में कॉलोनी के आवासों को छोड़कर करीब 15 हजार घर हैं। सरकारी रिकॉर्ड में सभी घरों में शौचालय उपलब्ध होने का दावा किया गया है, लेकिन नगर के कई वार्डों में आज भी बड़ी संख्या में परिवार शौचालय की सुविधा से वंचित हैं। वार्ड नंबर 2, 6, 8, 11, 12, 14 और 16 में मजदूर बस्तियां हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों ने अपने स्तर से शौचालय बनवा लिए, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार ऐसा नहीं कर सके। नगर पंचायत बनने से पहले सरकार की ओर से विभिन्न वार्डों में व्यक्तिगत शौचालय के लिए आवेदन भी लिए गए थे। लोगों का आरोप है कि आवेदन करने के बावजूद सभी पात्र परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए सरकारी सहयोग नहीं मिल सका। शौचालय नहीं होने के कारण मजदूर बस्तियों में रहने वाली महिलाओं और अन्य लोगों को खुले में शौच के लिए रेलवे लाइन या नदी किनारे जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह जोखिम और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में खुले में शौच के लिए जाते समय हादसों में लोगों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका आरोप है कि आवेदन के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर नगर को ओडीएफ घोषित कर दिया गया, जबकि कई परिवार आज भी शौचालय की सुविधा से वंचित हैं। लोगों ने पात्र परिवारों का दोबारा सर्वे कराकर व्यक्तिगत शौचालय उपलब्ध कराने की मांग की है।