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Sonebhadra News: स्वच्छ वायु सर्वे में 24 पायदान फिसला अनपरा, लाखों खर्च के बाद भी बिगड़ी स्थिति
अनपरा नगर के औड़ी-शक्तिनगर फोरलेन पर उड़ती धूल। संवाद
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अनपरा। तापीय और कोल परियोजनाओं के कारण प्रदूषित शहरों में शामिल अनपरा स्वच्छ वायु सर्वे की रैंकिंग में फिसल गया है। तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों में पिछले वर्ष प्रदेश में पहले और देश में पांचवें स्थान पर रहे अनपरा को इस बार प्रदेश में दूसरा और देश में 29वीं रैंक मिली है। रैंकिंग गिरने की बड़ी वजह हवा की शुद्धता बनाने के उपायों में बरती गई लापरवाही और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग न किया जाना बड़ी वजह बनी है। गांव से नगर बनने के बाद अनपरा नगर पंचायत ने वायु की गुणवत्ता के सुधार में अच्छा कार्य किया था। पिछले वर्ष अनपरा ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पहली बार प्रतिभाग किया था। पहले ही प्रयास में कुल 200 में से 187.5 अंक हासिल करते हुए प्रदेश के 14 निकायों में पहले पायदान पर रहा। देश में भी पांचवां स्थान मिला था। पहला स्थान मिलने के बाद जिम्मेदार सुस्त पड़ गए। नगर की हवा को स्वच्छ करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। नतीजा नगर की हवा लगातार प्रदूषित रही। इस वर्ष के सर्वेक्षण में अनपरा को 200 अंक में से 161.5 अंक मिले, जिससे यह देश में पांचवें स्थान से खिसकर सीधे 29वें और प्रदेश में पहले स्थान से दूसरे स्थान पर आ गया। सर्वेक्षण की यह रिपोर्ट बताती है कि प्रदूषण नियंत्रण के दावों और जमीन पर क्रियान्वयन के बीच कितना बड़ा अंतर है। नगर की सड़कों की सफाई के लिए नगर पंचायत ने 68 लाख की लागत से स्वीपिंग मशीन खरीदी थी, लेकिन इसका उपयोग बहुत कम हुआ। तकनीकी खराबी के कारण यह यार्ड में ही खड़ी रहती है। एक नई स्वीपिंग मशीन भी खरीदी गई है, लेकिन वह भी नहीं चल रही। हवा को शुद्ध करने के लिए तीन वाटर स्प्रिंकलर खरीदे गए थे। इसमें एक चलता है वह भी कभी-कभी। इस कारण हाईवे पर दिनभर धूल उड़ता रहता है। कोयला और राख का मिश्रित प्रदूषण लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है। नगर में करीब प्रतिदिन करीब 15 टन कूड़ा निकलता है। नगर पंचायत के वाहन कूड़ा तो एकत्र करते हैं, लेकिन कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग यार्ड की कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में कचरा वाहन कूड़े को खुले में फेंक देते हैं, जिसकी दुर्गंध नगर की हवा को प्रदूषित करती है। नगर प्रशासन अभी तक कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग यार्ड की व्यवस्था नहीं कर पाई है। मंत्रालय की ओर से कराए जा रहे सर्वेक्षण कुछ मानक तय किए गए थे, जिसमें हवा को शुद्ध करने के लिए सड़कों पर उड़ते धूल को रोकने, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों एवं उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण, निर्माण कचरा प्रबंधन, पौधरोपण, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्टि्रक वाहनों का प्रयोग को शामिल किया गया है। इसके लिए कुछ माह पूर्व निकाय से डाटा मांगा गया था। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बगैर किसी सूचना के आकर जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट तैयार करते हैं।
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