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विश्लेषण-- मजबूत सपा, टक्कर में भाजपा पर छोटे दल बढ़ा रहे चिंता
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सोनभद्र। एक वर्ष बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। उसके पहले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को यूपी की राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा है। सोनांचल की 31 जिला पंचायत सीटों पर विजयी हुए उम्मीदवार कहीं न कहीं विधानसभा चुनाव के समीकरण पर भी असर डालेंगे। अगर मौजूदा स्थिति को देखें तो जिले में मजबूत होते छोटे दल भाजपा-सपा सहित बड़े दलों की धड़कन बढ़ा रहे हैं। कांग्रेस को किसी करिश्मे की जरूरत है तो वहीं बसपा को अतिरिक्त दम लगाना होगा। वहीं अगर अपना दल एस थोड़ी मेहनत कर दे तो इसका जनाधार और बढ़ेगा।
क्रमांक के हिसाब से अंतिम चार विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र वाले इस जनपद में कुल चार विधायक हैं। इनमें तीन भारतीय जनता पार्टी के हैं तो एक अपना दल-भाजपा के सहयोग से अपना दल के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने। लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद भी जिले में अपना दल के ही हैं। ऐसे में अपना दल को जिले में कमजोर नहीं आंका जा सकता है। राजनीतिक दलों के समर्थित उम्मीदवारों के जीत वाली सूची बताती है कि सपा मजबूत हुई है, भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। लेकिन इन सबके बीच अपना दल की मजबूती सपा व भाजपा की चिंता बढ़ा रही है।
सपा को मिल रही बढ़त, भाजपा भी टक्कर में
जिले के 31 जिला पंचायत सदस्य पदों पर हुए चुनाव में विजयी उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों के हिसाब से देखें तो सपा को बढ़त मिल रही है। क्योंकि सपा के 10 उम्मीदवार जीते हैं। वहीं भाजपा भी टक्कर दे रही है। इस दल के छह उम्मीदवार जीत हासिल किए हैं। वहीं बसपा के तीन और कांग्रेस के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते। जिस दल के एक विधायक और एक सांसद हैं उस अपना दल के भी तीन उम्मीदवार जीते हैं। जबकि जन अधिकार पार्टी और निषाद पार्टी से समर्थित एक-एक उम्मीदवारों को जीत मिली है। बाकी छह निर्दल हैं। निर्दल रूप से जीते उम्मीदवारों में एक महिला उम्मीदवार के पति भाजपा के बूथ अध्यक्ष रह चुके हैं। यानी उनका रुख भाजपा की ओर माना जा रहा है जबकि एक उम्मीदवार सपा की विचारधारा का माना जा रहा है। इस तरह से सपा को बढ़त है और भाजपा कमजोर हुई है। बसपा के तीन प्रत्याशी जीते तो इस दल के पदाधिकारियों को भी वापसी की उम्मीद है।
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छोटे दल बिगाड़ सकते हैं सबकी गणित
मौजूदा माहौल और जिला पंचायत सदस्य के विजयी उम्मीदवारों के राजनीतिक दलों से संबंधों का विश्लेषण करें तो छोटे दल बड़े दलों का समीकरण विधानसभा चुनाव में बिगाड़ सकते हैं। क्योंकि अपना दल की मजबूत होती स्थिति और छोटे दलों का उनके साथ होना अपना दल एस को मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। हालांकि राजनीति के जानकार यह भी मानते हैं कि अगर अपना दल एस भाजपा से अलग हुआ तो अद की स्थिति वह नहीं रहेगी जो अभी है।
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क्रमांक के हिसाब से अंतिम चार विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र वाले इस जनपद में कुल चार विधायक हैं। इनमें तीन भारतीय जनता पार्टी के हैं तो एक अपना दल-भाजपा के सहयोग से अपना दल के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने। लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद भी जिले में अपना दल के ही हैं। ऐसे में अपना दल को जिले में कमजोर नहीं आंका जा सकता है। राजनीतिक दलों के समर्थित उम्मीदवारों के जीत वाली सूची बताती है कि सपा मजबूत हुई है, भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। लेकिन इन सबके बीच अपना दल की मजबूती सपा व भाजपा की चिंता बढ़ा रही है।
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सपा को मिल रही बढ़त, भाजपा भी टक्कर में
जिले के 31 जिला पंचायत सदस्य पदों पर हुए चुनाव में विजयी उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों के हिसाब से देखें तो सपा को बढ़त मिल रही है। क्योंकि सपा के 10 उम्मीदवार जीते हैं। वहीं भाजपा भी टक्कर दे रही है। इस दल के छह उम्मीदवार जीत हासिल किए हैं। वहीं बसपा के तीन और कांग्रेस के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते। जिस दल के एक विधायक और एक सांसद हैं उस अपना दल के भी तीन उम्मीदवार जीते हैं। जबकि जन अधिकार पार्टी और निषाद पार्टी से समर्थित एक-एक उम्मीदवारों को जीत मिली है। बाकी छह निर्दल हैं। निर्दल रूप से जीते उम्मीदवारों में एक महिला उम्मीदवार के पति भाजपा के बूथ अध्यक्ष रह चुके हैं। यानी उनका रुख भाजपा की ओर माना जा रहा है जबकि एक उम्मीदवार सपा की विचारधारा का माना जा रहा है। इस तरह से सपा को बढ़त है और भाजपा कमजोर हुई है। बसपा के तीन प्रत्याशी जीते तो इस दल के पदाधिकारियों को भी वापसी की उम्मीद है।
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छोटे दल बिगाड़ सकते हैं सबकी गणित
मौजूदा माहौल और जिला पंचायत सदस्य के विजयी उम्मीदवारों के राजनीतिक दलों से संबंधों का विश्लेषण करें तो छोटे दल बड़े दलों का समीकरण विधानसभा चुनाव में बिगाड़ सकते हैं। क्योंकि अपना दल की मजबूत होती स्थिति और छोटे दलों का उनके साथ होना अपना दल एस को मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। हालांकि राजनीति के जानकार यह भी मानते हैं कि अगर अपना दल एस भाजपा से अलग हुआ तो अद की स्थिति वह नहीं रहेगी जो अभी है।