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आस्था की डगर पर उत्साह का अद्भुत संगम
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नैमिषारण्य में पहले पड़ाव की ओर जाते परिक्रमार्थी। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। 84 कोसी परिक्रमा में आस्था, उत्साह व उमंग का अद्भुत संग दिखाई दिया। आस्था का यह नजारा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। हर तरफ बस बोल कड़ाकड़ सीताराम... सीताराम की ही ध्वनि सुनाई दे रही थी। इस ध्वनि से पूरा नैमिषारण्य क्षेत्र गुंजायमान दिखाई दिया। सब आस्था में लीन होकर पहले पड़ाव की ओर कूच कर रहे थे। सूरज की लालिमा निकलने से पहले ही वह पड़ाव का आधा सफर तय कर चुके थे।
नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा की विधिवत शुरुआत गुरुवार भोर को हुई। सुबह जैसे ही घड़ी की सुई तीन पर पहुंची, परिक्रमार्थियों ने आदि गंगा गोमती व चक्रतीर्थ में स्नान दर्शन का क्रम शुरू कर दिया था। सुबह चार बजे डंका बजने का समय निर्धारित था। लेकिन करीब आधे घंटे देरी से परिक्रमा की शुरुआत हुई। आस्था में डूबे कई श्रद्धालु डंका बजने से पहले ही पहले पड़ाव कोरौना की तरफ कूच कर गए थे। 15 दिन तक चलने वाली परिक्रमा के लिए श्रद्धालु मां ललिता देवी व जय श्रीराम के जयकारे लगाते हुए निकल पड़े।
श्रद्धालुओं के अंदर परिक्रमा को लेकर भारी आस्था दिखाई दी। बच्चों से लेकर बुजुर्ग व महिलाएं बस सीताराम-सीताराम कहते हुए पहले पड़ाव कोरौना की तरफ निकल पड़े। पहला आश्रम के नए महंत नन्हकू दास द्वारा डंके की पारंपरिक ध्वनि की धार्मिक गूंज नैमिष तीर्थ की हवा में गूंजने लगी। लाखों परिक्रमार्थियों का कारवां इस पवित्र धर्म यात्रा में श्रीराम के जयकारे के साथ निकल पड़ा।
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मिश्रिख एसडीएम गौरव रंजन श्रीवास्तव, सीओ सुशील यादव, तहसीलदार राज कुमार गुप्ता, नैमिष थाना प्रभारी सुरेश मिश्र, ईओ आरपी सिंह व चक्रतीर्थ पुजारी राजनारायण पांडेय द्वारा वैदिक मंत्रोचार के मध्य पहला आश्रम महंत नन्हकू दास, महामंत्री संतोष दास का स्वागत किया गया। इस दौरान व्यासपीठाधीश्वर अनिल शास्त्री, रामानुज कुमारी माताजी का पूजन व माल्यार्पण कर स्वागत अभिनंदन किया गया। इसके बाद परंपरागत ढंग से डंका लेकर चलने वाले घोड़े और डंके का पूजन किया गया।
परिक्रमा में प्रतिभाग कर रहे सभी प्रारंभिक परिक्रमार्थियों का प्रशासनिक कर्मियों द्वारा माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। सभी परिक्रमार्थियों के ऊपर पुष्प वर्षा भी की गई। परिक्रमार्थियों के अंदर आस्था कुछ इस कदर दिखाई दी, न तो उनको अपनी भूख प्यास की चिंता थी, न ही अपने घर परिवार की। बस जुबान पर एक ही नाम था सीताराम-सीताराम। इस ध्वनि को कहते हुए वह पथरीले मार्गों से होकर अपने पहले पड़ाव पर कूच कर गए। सूरज निकलने से पहले ही श्रद्धालु परिक्रमा का आधा सफर आसानी से तय कर लिया था।
इन परिक्रमार्थियों के स्वागत के लिए लोग भी तैयार दिखे। उन्होंने भोर से ही श्रद्धालुओं के लिए चाय, पकौड़ी, पूड़ी सब्जी व हलवा तैयार कर लिया था। पहले पड़ाव तक करीब 10 किलोमीटर की दूरी में वह परिक्रमार्थियों को भोजन कराते हुए दिखाई दिए। अगर कोई परिक्रमार्थी चाय नाश्ता नहीं करता तो उनकी चरण वंदन कर कुछ न कुछ प्रसाद ग्रहण करने का अनुरोध करते हुए दिखाई दिए। नैमिषारण्य से कोरौना तक पूरा माहौल भक्तिमय दिखाई दिया। महिलाएं मंगल गीत गाती हुईं दिखाई दीं। कोई राजस्थान से आया तो कोई ग्वालियर व नेपाल से आकर परिक्रमा करने में मशगूल रहा। सब अपनी-अपनी भाषा व वेषभूषा में अपनी तरह से भक्ति में लीन रहे।
श्रीकृष्ण व सुदामा की भक्ति की भी दिखी झलक
राम नाम की इस अनूठी धर्म यात्रा में मित्रता की अटूट बागडोर का एक अजब नजारा देखने को मिला। भगवान सिंह निवासी फिरोजाबाद अपने सूरदास मित्र गोपालदास निवासी फिरोजाबाद को इस अद्भुत परिक्रमा में पुण्य लाभ के लिए तत्पर दिखे। जिसे देखकर भगवानदास ने बताया कि मेरे मित्र की इच्छा परिक्रमा करने की थी। मगर उनको दोनों आंखों से दिखाई नहीं पड़ता था। मित्र की इस इच्छा को पूरा करने के लिए मन में ठान लिया था। इसलिए उनको परिक्रमा कराने लेकर आया हूूं। वहां से गुजर रहे श्रद्धालु प्रभु श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता की मिसाल देते दिखाई दिए।
व्हील चेयर पर पिता को लेकर निकल पड़े
इस परिक्रमा में आस्था के आगे लोगों की शारीरिक मजबूरियां दरकिनार रही। ईश्वर के प्रति आस्था रखते हुए तमाम श्रद्धालु दुश्वारियों की बाधा को पार करके इस परिक्रमा में निकले पड़े। अपने पिता को व्हील चेयर से ही परिक्रमा में पुण्य लाभ दिलाने निकले सीताराम ने बताया कि वे अपने पिता को 15 वर्षों से व्हीलचेयर पर परिक्रमा करा रहे हैं। इससे उन्हें एक तो परिक्रमा का पुण्य मिलता है। दूसरी तरफ बेटे का धर्म अदा करता हूं। इससे मन को शांति मिलती है। परिक्रमा में राम नाम पुण्य वर्षा के बीच वह बड़े भक्ति भाव से अपने पिता को परिक्रमा कराते दिखे।
परिक्रमा में दिखी हिन्दू-मुस्लिम एकता
करीब 15 वर्षों से इस रामादल परिक्रमा में पुण्य कमा रहे ग्राम डिबियापुर तहसील टड़ियांवा जनपद हरदोई निवासी बकरीदी खान अपनी गाय रामा, स्वान गोली व पिल्ला गोलू के साथ परिक्रमा करते दिखे। बकरीदी खान इस धर्म यात्रा में धार्मिक समरसता की मिसाल पेश करते हुए मुल्क में अमन चैन व भाईचारे के लिए दुआ की। उनका कहना है कि करीब 14 वर्ष पहले अपने हिन्दू मित्र के साथ परिक्रमा की थी। तब से परिक्रमा करने का सिलसिला चालू हो गया। अल्लाह और देवता मस्जिद और मंदिर में नहीं लोगों के दिलों में बसते हैं। ईश्वर एक ही है। अगर कहीं अंतर है तो बस इंसान के नजरिये में और मेरा नजरिया तो बस इंसानियत और आस्था का है।
लड्डू गोपाल को भी करा रहे परिक्रमा
आस्था की इस जीती जागती कहानी में एक और जहां लोग अपनी बोली और दिल में भगवान को स्थान देते हैं। वहीं कई श्रद्धालु अपने आराध्य को खुद ही परिक्रमा कराने के लिए लालायित दिखे। इन्हीं में से एक है खगेशा मध्य प्रदेश निवासी जितेन्द्र उपाध्याय जो अपने साथ लड्डू गोपाल को डोलची में बैठाकर परिक्रमा करा रहे थे। जब उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि यह देव हमें अपनी कृपा में जीवन में सब कुछ दे सकते है तो हम इन्हें भी अपनी गोद में बैठाकर एक यात्रा तक नहीं करा सकते। आज जीवन में सब भगवान की कृपा से कल्याण है।
परिक्रमा में शारीरिक अक्षमता नहीं बाधक
इस परिक्रमा में शामिल दिव्यांग और बुजुर्गों का जोश भी किसी से कम नहीं है। बदायूं निवासी शांतिदास बैसाखी के सहारे परिक्रमा करते दिखे। शांतिदास ने बताया कि बचपन में ही मेरा आधा अंग खराब हो गया था। एक हाथ, एक पैर काम नहीं करता है। एक वर्ष पूर्व परिक्रमा की थी। इस वर्ष भी परिक्रमा में शामिल होने आया हूं। परिक्रमा से मानसिक शांति मिलती है। शारीरिक अक्षमता बाधा नहीं बनती है। शांतिदास ने बताया कि यह परिक्रमा हर पल नई ऊर्जा से ओत पोत करती रहती है।
परिक्रमा पथ को किया नमन
परिक्रमा शुरू करने से पहले श्रद्धालुओं ने परिक्रमा मार्ग को हाथ जोड़कर प्रणाम किया तो कई ने मार्ग का चरणवंदन कर परिक्रमा की शुरुआत की। किसी ने लेटकर प्रणाम किया तो कई श्रद्धालु कुछ दूरी तक दंडवत करते हुए पहले पड़ाव की तरफ बढ़ गए।
परिक्रमार्थियों ने नैमिष तीर्थ में किए दर्शन
रामादल यात्रा की शुरुआत सुबह बड़े ही जोश व आस्था के साथ परिक्रमार्थियों ने की। सुबह परिक्रमार्थियों ने तीर्थ स्थित गजानन भगवान, भूतेश्वर नाथ, रामभक्त हनुमान, श्रृंगी ऋषि, राम दरबार, गोला गोकर्णनाथ, सूर्य नारायण, विष्णु जी, मां ललिता देवी, जानकी कुंड आदि मंदिरों तीर्थों का दर्शन कर प्रथम पड़ाव के लिए प्रस्थान किया।
पूरी यात्रा का लेंगे आनंद
लोगों से सुना है कि यह परिक्रमा त्याग ज्ञान और मोक्ष की परिक्रमा है। पहली बार इस परिक्रमा में शामिल हो रहे हैं। ईश्वर पर अटूट आस्था है और मन में पुण्य प्राप्ति की मंशा है। प्रभु श्रीराम का गुणगान करते हुए पूरे भक्ति भाव से इस यात्रा का आनंद लेंगे।
- महंत ओमगिरी नागा बाबा, गिरिजा देवी उत्तराखंड
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नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा की विधिवत शुरुआत गुरुवार भोर को हुई। सुबह जैसे ही घड़ी की सुई तीन पर पहुंची, परिक्रमार्थियों ने आदि गंगा गोमती व चक्रतीर्थ में स्नान दर्शन का क्रम शुरू कर दिया था। सुबह चार बजे डंका बजने का समय निर्धारित था। लेकिन करीब आधे घंटे देरी से परिक्रमा की शुरुआत हुई। आस्था में डूबे कई श्रद्धालु डंका बजने से पहले ही पहले पड़ाव कोरौना की तरफ कूच कर गए थे। 15 दिन तक चलने वाली परिक्रमा के लिए श्रद्धालु मां ललिता देवी व जय श्रीराम के जयकारे लगाते हुए निकल पड़े।
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श्रद्धालुओं के अंदर परिक्रमा को लेकर भारी आस्था दिखाई दी। बच्चों से लेकर बुजुर्ग व महिलाएं बस सीताराम-सीताराम कहते हुए पहले पड़ाव कोरौना की तरफ निकल पड़े। पहला आश्रम के नए महंत नन्हकू दास द्वारा डंके की पारंपरिक ध्वनि की धार्मिक गूंज नैमिष तीर्थ की हवा में गूंजने लगी। लाखों परिक्रमार्थियों का कारवां इस पवित्र धर्म यात्रा में श्रीराम के जयकारे के साथ निकल पड़ा।
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मिश्रिख एसडीएम गौरव रंजन श्रीवास्तव, सीओ सुशील यादव, तहसीलदार राज कुमार गुप्ता, नैमिष थाना प्रभारी सुरेश मिश्र, ईओ आरपी सिंह व चक्रतीर्थ पुजारी राजनारायण पांडेय द्वारा वैदिक मंत्रोचार के मध्य पहला आश्रम महंत नन्हकू दास, महामंत्री संतोष दास का स्वागत किया गया। इस दौरान व्यासपीठाधीश्वर अनिल शास्त्री, रामानुज कुमारी माताजी का पूजन व माल्यार्पण कर स्वागत अभिनंदन किया गया। इसके बाद परंपरागत ढंग से डंका लेकर चलने वाले घोड़े और डंके का पूजन किया गया।
परिक्रमा में प्रतिभाग कर रहे सभी प्रारंभिक परिक्रमार्थियों का प्रशासनिक कर्मियों द्वारा माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। सभी परिक्रमार्थियों के ऊपर पुष्प वर्षा भी की गई। परिक्रमार्थियों के अंदर आस्था कुछ इस कदर दिखाई दी, न तो उनको अपनी भूख प्यास की चिंता थी, न ही अपने घर परिवार की। बस जुबान पर एक ही नाम था सीताराम-सीताराम। इस ध्वनि को कहते हुए वह पथरीले मार्गों से होकर अपने पहले पड़ाव पर कूच कर गए। सूरज निकलने से पहले ही श्रद्धालु परिक्रमा का आधा सफर आसानी से तय कर लिया था।
इन परिक्रमार्थियों के स्वागत के लिए लोग भी तैयार दिखे। उन्होंने भोर से ही श्रद्धालुओं के लिए चाय, पकौड़ी, पूड़ी सब्जी व हलवा तैयार कर लिया था। पहले पड़ाव तक करीब 10 किलोमीटर की दूरी में वह परिक्रमार्थियों को भोजन कराते हुए दिखाई दिए। अगर कोई परिक्रमार्थी चाय नाश्ता नहीं करता तो उनकी चरण वंदन कर कुछ न कुछ प्रसाद ग्रहण करने का अनुरोध करते हुए दिखाई दिए। नैमिषारण्य से कोरौना तक पूरा माहौल भक्तिमय दिखाई दिया। महिलाएं मंगल गीत गाती हुईं दिखाई दीं। कोई राजस्थान से आया तो कोई ग्वालियर व नेपाल से आकर परिक्रमा करने में मशगूल रहा। सब अपनी-अपनी भाषा व वेषभूषा में अपनी तरह से भक्ति में लीन रहे।
श्रीकृष्ण व सुदामा की भक्ति की भी दिखी झलक
राम नाम की इस अनूठी धर्म यात्रा में मित्रता की अटूट बागडोर का एक अजब नजारा देखने को मिला। भगवान सिंह निवासी फिरोजाबाद अपने सूरदास मित्र गोपालदास निवासी फिरोजाबाद को इस अद्भुत परिक्रमा में पुण्य लाभ के लिए तत्पर दिखे। जिसे देखकर भगवानदास ने बताया कि मेरे मित्र की इच्छा परिक्रमा करने की थी। मगर उनको दोनों आंखों से दिखाई नहीं पड़ता था। मित्र की इस इच्छा को पूरा करने के लिए मन में ठान लिया था। इसलिए उनको परिक्रमा कराने लेकर आया हूूं। वहां से गुजर रहे श्रद्धालु प्रभु श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता की मिसाल देते दिखाई दिए।
व्हील चेयर पर पिता को लेकर निकल पड़े
इस परिक्रमा में आस्था के आगे लोगों की शारीरिक मजबूरियां दरकिनार रही। ईश्वर के प्रति आस्था रखते हुए तमाम श्रद्धालु दुश्वारियों की बाधा को पार करके इस परिक्रमा में निकले पड़े। अपने पिता को व्हील चेयर से ही परिक्रमा में पुण्य लाभ दिलाने निकले सीताराम ने बताया कि वे अपने पिता को 15 वर्षों से व्हीलचेयर पर परिक्रमा करा रहे हैं। इससे उन्हें एक तो परिक्रमा का पुण्य मिलता है। दूसरी तरफ बेटे का धर्म अदा करता हूं। इससे मन को शांति मिलती है। परिक्रमा में राम नाम पुण्य वर्षा के बीच वह बड़े भक्ति भाव से अपने पिता को परिक्रमा कराते दिखे।
परिक्रमा में दिखी हिन्दू-मुस्लिम एकता
करीब 15 वर्षों से इस रामादल परिक्रमा में पुण्य कमा रहे ग्राम डिबियापुर तहसील टड़ियांवा जनपद हरदोई निवासी बकरीदी खान अपनी गाय रामा, स्वान गोली व पिल्ला गोलू के साथ परिक्रमा करते दिखे। बकरीदी खान इस धर्म यात्रा में धार्मिक समरसता की मिसाल पेश करते हुए मुल्क में अमन चैन व भाईचारे के लिए दुआ की। उनका कहना है कि करीब 14 वर्ष पहले अपने हिन्दू मित्र के साथ परिक्रमा की थी। तब से परिक्रमा करने का सिलसिला चालू हो गया। अल्लाह और देवता मस्जिद और मंदिर में नहीं लोगों के दिलों में बसते हैं। ईश्वर एक ही है। अगर कहीं अंतर है तो बस इंसान के नजरिये में और मेरा नजरिया तो बस इंसानियत और आस्था का है।
लड्डू गोपाल को भी करा रहे परिक्रमा
आस्था की इस जीती जागती कहानी में एक और जहां लोग अपनी बोली और दिल में भगवान को स्थान देते हैं। वहीं कई श्रद्धालु अपने आराध्य को खुद ही परिक्रमा कराने के लिए लालायित दिखे। इन्हीं में से एक है खगेशा मध्य प्रदेश निवासी जितेन्द्र उपाध्याय जो अपने साथ लड्डू गोपाल को डोलची में बैठाकर परिक्रमा करा रहे थे। जब उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि यह देव हमें अपनी कृपा में जीवन में सब कुछ दे सकते है तो हम इन्हें भी अपनी गोद में बैठाकर एक यात्रा तक नहीं करा सकते। आज जीवन में सब भगवान की कृपा से कल्याण है।
परिक्रमा में शारीरिक अक्षमता नहीं बाधक
इस परिक्रमा में शामिल दिव्यांग और बुजुर्गों का जोश भी किसी से कम नहीं है। बदायूं निवासी शांतिदास बैसाखी के सहारे परिक्रमा करते दिखे। शांतिदास ने बताया कि बचपन में ही मेरा आधा अंग खराब हो गया था। एक हाथ, एक पैर काम नहीं करता है। एक वर्ष पूर्व परिक्रमा की थी। इस वर्ष भी परिक्रमा में शामिल होने आया हूं। परिक्रमा से मानसिक शांति मिलती है। शारीरिक अक्षमता बाधा नहीं बनती है। शांतिदास ने बताया कि यह परिक्रमा हर पल नई ऊर्जा से ओत पोत करती रहती है।
परिक्रमा पथ को किया नमन
परिक्रमा शुरू करने से पहले श्रद्धालुओं ने परिक्रमा मार्ग को हाथ जोड़कर प्रणाम किया तो कई ने मार्ग का चरणवंदन कर परिक्रमा की शुरुआत की। किसी ने लेटकर प्रणाम किया तो कई श्रद्धालु कुछ दूरी तक दंडवत करते हुए पहले पड़ाव की तरफ बढ़ गए।
परिक्रमार्थियों ने नैमिष तीर्थ में किए दर्शन
रामादल यात्रा की शुरुआत सुबह बड़े ही जोश व आस्था के साथ परिक्रमार्थियों ने की। सुबह परिक्रमार्थियों ने तीर्थ स्थित गजानन भगवान, भूतेश्वर नाथ, रामभक्त हनुमान, श्रृंगी ऋषि, राम दरबार, गोला गोकर्णनाथ, सूर्य नारायण, विष्णु जी, मां ललिता देवी, जानकी कुंड आदि मंदिरों तीर्थों का दर्शन कर प्रथम पड़ाव के लिए प्रस्थान किया।
पूरी यात्रा का लेंगे आनंद
लोगों से सुना है कि यह परिक्रमा त्याग ज्ञान और मोक्ष की परिक्रमा है। पहली बार इस परिक्रमा में शामिल हो रहे हैं। ईश्वर पर अटूट आस्था है और मन में पुण्य प्राप्ति की मंशा है। प्रभु श्रीराम का गुणगान करते हुए पूरे भक्ति भाव से इस यात्रा का आनंद लेंगे।
- महंत ओमगिरी नागा बाबा, गिरिजा देवी उत्तराखंड