{"_id":"5feb6dd48ebc3e3dcf01dd5b","slug":"there-is-a-possibility-of-tiger-entering-bahraich-border-sitapur-news-lko557252564","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाघ के बहराइच सीमा में प्रवेश की आशंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाघ के बहराइच सीमा में प्रवेश की आशंका
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। पीलीभीत बाघ रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. समीर की अगुवाई में वन विभाग की टीम ने सोमवार को 35 किमी. तक कांबिंग की। बाघ के नए पग चिह्न मछरेहटा क्षेत्र के हर्रैया से खैराबाद के भगवंतापुर होते हुए सीतापुर की ओर जाने के मिले हैं। जीपीएस से पग चिह्न ट्रैक कर बाघ के जिले की सीमा से निकलकर बहराइच पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। बाघ की लोकेशन ट्रैक करने के लिए कांबिंग के दौरान मछरेहटा से खैराबाद इलाके तक दहशत का माहौल रहा।
एक पखवाड़े पहले हरदोई से सीतापुर की सरहद में दाखिल हुआ बाघ कई दिनों तक पिसावां इलाके में दहशत का पर्याय बना रहा। कांबिग करने वाली वन विभाग की टीम उसके पगचिह्न तो तलाश करने में सफल होती रही, लेकिन बाघ का कोई सुराग नहीं लगा सकी, जिससे पीलीभीत बाघ रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. समीर को मदद के लिए बुलाया गया। बाघ रामकोट होते हुए सोमवार को मछरेहटा पहुंचा था। मंगलवार को कांबिंग के दौरान बाघ के नए पगचिह्न मछरेहटा इलाके में हर्रैया गांव के करीब पाए गए।
वन विभाग की टीम में शामिल फारेस्टर मिश्रिख शिवनरायन शुक्ला ने बताया कि मंगलवार को लगातार 35 किमी. कांबिंग की गई। इस दौरान बाघ के पग चिह्न खैराबाद क्षेत्र के भगवंतापुर होते हुए सरायन नदी की तलहटी में सीतापुर की ओर जाते मिले हैं। पीलीभीत बाघ रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. समीर के मुताबिक यह पगचिह्न लगभग तीन दिन पुराने हैं। इसी गति से चलने पर अब तक बाघ के जिले की सीमा से निकलकर बहराइच पहुंचने की संभावना विशेषज्ञ ने जताई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक पखवाड़े पहले हरदोई से सीतापुर की सरहद में दाखिल हुआ बाघ कई दिनों तक पिसावां इलाके में दहशत का पर्याय बना रहा। कांबिग करने वाली वन विभाग की टीम उसके पगचिह्न तो तलाश करने में सफल होती रही, लेकिन बाघ का कोई सुराग नहीं लगा सकी, जिससे पीलीभीत बाघ रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. समीर को मदद के लिए बुलाया गया। बाघ रामकोट होते हुए सोमवार को मछरेहटा पहुंचा था। मंगलवार को कांबिंग के दौरान बाघ के नए पगचिह्न मछरेहटा इलाके में हर्रैया गांव के करीब पाए गए।
विज्ञापन
वन विभाग की टीम में शामिल फारेस्टर मिश्रिख शिवनरायन शुक्ला ने बताया कि मंगलवार को लगातार 35 किमी. कांबिंग की गई। इस दौरान बाघ के पग चिह्न खैराबाद क्षेत्र के भगवंतापुर होते हुए सरायन नदी की तलहटी में सीतापुर की ओर जाते मिले हैं। पीलीभीत बाघ रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. समीर के मुताबिक यह पगचिह्न लगभग तीन दिन पुराने हैं। इसी गति से चलने पर अब तक बाघ के जिले की सीमा से निकलकर बहराइच पहुंचने की संभावना विशेषज्ञ ने जताई है।
विज्ञापन