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Sitapur News: बोगस फर्माें का अड्डा बनकर उभर रहा सीतापुर
Sun, 11 Jan 2026 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:16 AM IST
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सीतापुर। जिले में बोगस फर्माें का मकड़जाल फैलता जा रहा है। बोगस फर्म बनाकर टैक्स चोरी करने के मामले में एसओजी व खैराबाद पुलिस ने सात लोगों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोपियों की 70 बोगस फर्माें के नाम अब तक सामने आए हैं। इन्हीं फर्माें के सहारे करीब 100 करोड़ की टैक्स चोरी की आशंका व्यक्त की जा रही है। जीएसटी विभाग की निगरानी के अभाव में ये फर्में फलफूल रही हैं।
विभाग के कामर्शियल टैक्स ऑफिसर (सीटीओ) पर पंजीकृत फर्माें के भौतिक सत्यापन का जिम्मा है। इस केस में बोगस फर्मों के मालिकों ने भौतिक सत्यापन को लेकर विभागीय अधिकारियों को गुमराह किया। इस वजह से इन बोगस फर्माें की सटीक निगरानी नहीं हो सकी। इसका फायदा उठाकर ये बोगस फर्में फर्जी खरीद फरोख्त दिखाकर टैक्स चोरी करती रहीं। एसपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी चोरी के मामले में विभाग से समन्वय स्थापित कर जांच आगे बढ़ रही है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस टीमों ने तंबौर, लहरपुर, बिसवां और कानपुर जनपद की बोगस फर्मों को रडार पर लिया है। कई फर्माें की लगातार निगरानी की जा रही है। इन फर्माें के पंजीकरण में जिन मोबाइल नंबरों का प्रयोग किया गया है, उन्हें भी सर्विलांस पर लिया गया है। अब तक टैक्स चोरी के मामले में सात आरोपियों सदरपुर के जहांगीराबाद निवासी मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद अम्मार, लहरपुर के मोहल्ला शाहकुलीपुर निवासी अनवारुल हक, मोहल्ला मजाशाह निवासी जीशान, कानपुर जिले के बाबूपुरवा थाना बाकरगंज निवासी उजैर, बिसवां के मोहल्ला महाराजगंज निवासी अब्दुल नासिर और मोहल्ला थवई टोला निवासी मोहम्मद आरिफ को जेल भेजा गया है। इनके मददगार कई सफेदपोश और बोगस फर्मों का इस्तेमाल करने वाले लोग रडार पर हैं।
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बोगस फर्म से हुई पहली खरीद, खरीद में हुई टैक्स चोरी
पूछताछ में सामने आया है कि चोरी की लकड़ी की खरीद फरोख्त को बोगस फर्माें के कागजों पर दिखाया गया। इसके तहत फर्जी बिल दिखाकर पहली खरीद बोगस फर्म से की गई। इस बोगस फर्म ने निर्धारित जीएसटी अदा कर कागजों पर लकड़ी की खरीद दर्शाई, जबकि कोई टैक्स कहीं भी अदा नहीं किया गया। बस एक फर्जी बिल जनरेट कर दिया गया। जमीनी स्तर पर बोगस फर्म कोई ने न तो कोई लकड़ी खरीदी और न ही कोई टैक्स अदा किया। बस खरीद का एक ढोंग रचा गया।
इसके बाद यह बोगस फर्म एक सामान्य फर्म को सामान्य प्रक्रिया के तहत लकड़ी बेचती रही। इस बिक्री में पूर्व में जीएसटी अदा होना दर्शाया गया। सामान्य फर्म इसमें अपना प्रॉफिट मूल्य बढ़ाकर प्रॉफिट की बढ़ी रकम पर ही जीएसटी अदा कर तीसरी फर्म को लकड़ी बेचती रही। यह क्रम सिलसिलेवार ढंग से जारी रहता है। जब तक यह बोगस फर्म जीएसटी अधिकारियों की नजर में आई, तब तक करोड़ों की टैक्स चोरी हो चुकी थी। वहीं, जिस व्यक्ति के नाम ऐसी फर्में पंजीकृत रहीं, उन्हें भनक तक नहीं लगी।
बोगस फर्मों को पंजीकृत करने वाले आईपी एड्रेस की भी होगी जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार इन बोगस फर्मों को किसी कंप्यूटर के माध्यम से ही पंजीकृत किया गया है। इसके आईपी एड्रेेस की भी जांच की जा रही है। वहीं, जिन फर्मों को बोगस फर्माें ने माल बेचा है। उनके पंजीकरण को भी खंगाला जा रहा है। यह भी आशंका है कि जिले में कोई कंप्यूटर कैफे या युवाओं का ग्रुप इन फर्माें के पंजीकरण में शामिल हो। इस बिंदु पर भी जांच जारी है।
ढांचागत सुधार से ही लगेगा बोगस फर्मों पर अंकुश
बोगस फर्में सिर्फ टैक्स चोरी के उद्देश्य से बनाई जाती हैं। उन्हें वस्तु या सेवा में कारोबार के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। कागजों में उस तरह की सेवाओं और वस्तुओं की खरीद-बिक्री दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी फर्मों द्वारा वस्तु और सेवा का कोई काम नहीं लिया जाता है। कागजों में कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया जाता है। विभाग की टीम जब ऐसी फर्मों को पकड़ती है, तब पता चलता है कि जिस व्यक्ति के नाम पर फर्म बनाई गई है वो न तो उस कारोबार के बारे में जानता है और न उसने कोई लिखित सहमति दी है। इस व्यवस्था पर नकेल ढांचागत सुधार से ही संभव है। अगर फर्म के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए टैक्स विशेषज्ञ या टैक्स अधिवक्ता को उत्तरदायी बनाया जाए। तब लोगों को एक जिम्मेदार व्यक्ति से ही पंजीकरण कराना होगा। इससे एक हद तक बोगस फर्मों के पंजीकरण पर अंकुश लगेगा। वहीं, प्रत्येक वर्ष कर निर्धारण का अधिकार सेक्टर ऑफिसर को देने से भी बोगस फर्में पकड़ में आ जाएंगी।
- राजीव कुमार शुक्ला, जीएसटी व आयकर विशेषज्ञ
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विभाग के कामर्शियल टैक्स ऑफिसर (सीटीओ) पर पंजीकृत फर्माें के भौतिक सत्यापन का जिम्मा है। इस केस में बोगस फर्मों के मालिकों ने भौतिक सत्यापन को लेकर विभागीय अधिकारियों को गुमराह किया। इस वजह से इन बोगस फर्माें की सटीक निगरानी नहीं हो सकी। इसका फायदा उठाकर ये बोगस फर्में फर्जी खरीद फरोख्त दिखाकर टैक्स चोरी करती रहीं। एसपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी चोरी के मामले में विभाग से समन्वय स्थापित कर जांच आगे बढ़ रही है।
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सूत्रों के अनुसार पुलिस टीमों ने तंबौर, लहरपुर, बिसवां और कानपुर जनपद की बोगस फर्मों को रडार पर लिया है। कई फर्माें की लगातार निगरानी की जा रही है। इन फर्माें के पंजीकरण में जिन मोबाइल नंबरों का प्रयोग किया गया है, उन्हें भी सर्विलांस पर लिया गया है। अब तक टैक्स चोरी के मामले में सात आरोपियों सदरपुर के जहांगीराबाद निवासी मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद अम्मार, लहरपुर के मोहल्ला शाहकुलीपुर निवासी अनवारुल हक, मोहल्ला मजाशाह निवासी जीशान, कानपुर जिले के बाबूपुरवा थाना बाकरगंज निवासी उजैर, बिसवां के मोहल्ला महाराजगंज निवासी अब्दुल नासिर और मोहल्ला थवई टोला निवासी मोहम्मद आरिफ को जेल भेजा गया है। इनके मददगार कई सफेदपोश और बोगस फर्मों का इस्तेमाल करने वाले लोग रडार पर हैं।
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बोगस फर्म से हुई पहली खरीद, खरीद में हुई टैक्स चोरी
पूछताछ में सामने आया है कि चोरी की लकड़ी की खरीद फरोख्त को बोगस फर्माें के कागजों पर दिखाया गया। इसके तहत फर्जी बिल दिखाकर पहली खरीद बोगस फर्म से की गई। इस बोगस फर्म ने निर्धारित जीएसटी अदा कर कागजों पर लकड़ी की खरीद दर्शाई, जबकि कोई टैक्स कहीं भी अदा नहीं किया गया। बस एक फर्जी बिल जनरेट कर दिया गया। जमीनी स्तर पर बोगस फर्म कोई ने न तो कोई लकड़ी खरीदी और न ही कोई टैक्स अदा किया। बस खरीद का एक ढोंग रचा गया।
इसके बाद यह बोगस फर्म एक सामान्य फर्म को सामान्य प्रक्रिया के तहत लकड़ी बेचती रही। इस बिक्री में पूर्व में जीएसटी अदा होना दर्शाया गया। सामान्य फर्म इसमें अपना प्रॉफिट मूल्य बढ़ाकर प्रॉफिट की बढ़ी रकम पर ही जीएसटी अदा कर तीसरी फर्म को लकड़ी बेचती रही। यह क्रम सिलसिलेवार ढंग से जारी रहता है। जब तक यह बोगस फर्म जीएसटी अधिकारियों की नजर में आई, तब तक करोड़ों की टैक्स चोरी हो चुकी थी। वहीं, जिस व्यक्ति के नाम ऐसी फर्में पंजीकृत रहीं, उन्हें भनक तक नहीं लगी।
बोगस फर्मों को पंजीकृत करने वाले आईपी एड्रेस की भी होगी जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार इन बोगस फर्मों को किसी कंप्यूटर के माध्यम से ही पंजीकृत किया गया है। इसके आईपी एड्रेेस की भी जांच की जा रही है। वहीं, जिन फर्मों को बोगस फर्माें ने माल बेचा है। उनके पंजीकरण को भी खंगाला जा रहा है। यह भी आशंका है कि जिले में कोई कंप्यूटर कैफे या युवाओं का ग्रुप इन फर्माें के पंजीकरण में शामिल हो। इस बिंदु पर भी जांच जारी है।
ढांचागत सुधार से ही लगेगा बोगस फर्मों पर अंकुश
बोगस फर्में सिर्फ टैक्स चोरी के उद्देश्य से बनाई जाती हैं। उन्हें वस्तु या सेवा में कारोबार के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। कागजों में उस तरह की सेवाओं और वस्तुओं की खरीद-बिक्री दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी फर्मों द्वारा वस्तु और सेवा का कोई काम नहीं लिया जाता है। कागजों में कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया जाता है। विभाग की टीम जब ऐसी फर्मों को पकड़ती है, तब पता चलता है कि जिस व्यक्ति के नाम पर फर्म बनाई गई है वो न तो उस कारोबार के बारे में जानता है और न उसने कोई लिखित सहमति दी है। इस व्यवस्था पर नकेल ढांचागत सुधार से ही संभव है। अगर फर्म के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए टैक्स विशेषज्ञ या टैक्स अधिवक्ता को उत्तरदायी बनाया जाए। तब लोगों को एक जिम्मेदार व्यक्ति से ही पंजीकरण कराना होगा। इससे एक हद तक बोगस फर्मों के पंजीकरण पर अंकुश लगेगा। वहीं, प्रत्येक वर्ष कर निर्धारण का अधिकार सेक्टर ऑफिसर को देने से भी बोगस फर्में पकड़ में आ जाएंगी।
- राजीव कुमार शुक्ला, जीएसटी व आयकर विशेषज्ञ