{"_id":"5eef862c8ebc3e4342526f98","slug":"saryu-and-sharda-river-overflow-due-to-rain-on-the-mountains-sitapur-news-lko5270691162","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ों पर बारिश से सरयू और शारदा नदी में उफान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ों पर बारिश से सरयू और शारदा नदी में उफान
विज्ञापन
सीतापुर। पहाड़ों पर लगातार होने वाली बारिश का असर जिले की सरयू व शारदा नदियों पर दिखाई देने लगा है। गांजर में होकर बहने वाली इन नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदियों के तटवर्ती निचले भू-भाग में पानी का बहाव बढ़ता जा रहा है। त्यागी बाबा के आश्रम के करीब पानी पहुंच गया है।
संभावित बाढ़ के मद्देनजर तटीय इलाके के बाशिंदे भयभीत हैं। जिन ग्रामीणों के मकान नदी के किनारे हैं, उन्होंने गृहस्थी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। लेकिन तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों की मानें तो ऊंचे स्थानों पर अभी भी सूखे बालू के चमकीले रेत के टीले दिखाई पड़ रहे हैं। निचले भू-भागों में पानी का फैलाव बढ़ना खतरे की घंटी है।
दुर्गापुरवा, समय दीनपुरवा, मरैली आदि गांवों के लोगों कहना है कि अगर नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो लहरें बेकाबू हो जाएंगी। फिर बाढ़ का रौद्र रूप नजर आने लगेगा। नदी का किनारा छोड़कर पानी बाहर निकला तो सबसे पहले लालापुरवा, नगीनापुरवा, जैतहिया, मरैली, लोधपुरवा, मुंशीपुरवा, भगत सिकोरहर, पासिनपुरवा, परमेश्वरपुरवा, ठेकेदारपुरवा सहित लगभग 40 मजरे बाढ़ की जद में आ सकते हैं।
विज्ञापन
हजारों बीघा फसलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। संभावित खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने ईंधन के साथ मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध अभी से करना शुरू कर दिया है। वही प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जिलास्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों के प्रधानों, लेखपालों की मीटिंग कर अपने-अपने क्षेत्रों में निगाह रखने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
संभावित बाढ़ के मद्देनजर तटीय इलाके के बाशिंदे भयभीत हैं। जिन ग्रामीणों के मकान नदी के किनारे हैं, उन्होंने गृहस्थी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। लेकिन तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों की मानें तो ऊंचे स्थानों पर अभी भी सूखे बालू के चमकीले रेत के टीले दिखाई पड़ रहे हैं। निचले भू-भागों में पानी का फैलाव बढ़ना खतरे की घंटी है।
विज्ञापन
दुर्गापुरवा, समय दीनपुरवा, मरैली आदि गांवों के लोगों कहना है कि अगर नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो लहरें बेकाबू हो जाएंगी। फिर बाढ़ का रौद्र रूप नजर आने लगेगा। नदी का किनारा छोड़कर पानी बाहर निकला तो सबसे पहले लालापुरवा, नगीनापुरवा, जैतहिया, मरैली, लोधपुरवा, मुंशीपुरवा, भगत सिकोरहर, पासिनपुरवा, परमेश्वरपुरवा, ठेकेदारपुरवा सहित लगभग 40 मजरे बाढ़ की जद में आ सकते हैं।
विज्ञापन
हजारों बीघा फसलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। संभावित खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने ईंधन के साथ मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध अभी से करना शुरू कर दिया है। वही प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जिलास्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों के प्रधानों, लेखपालों की मीटिंग कर अपने-अपने क्षेत्रों में निगाह रखने के निर्देश दिए हैं।