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39 स्कूली वाहनों का पंजीयन निरस्त
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सीतापुर। प्रशासन की लाख चेतावनी के बाद भी जिले में अभी भी 223 स्कूली वाहनों का फिटनेस नहीं हो सका है। इससे ये बिना फिटनेस के ही चल रहे हैं। स्कूल प्रबंधन की यह लापरवाही छात्रों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। विभाग ने इस पर अब सख्ती दिखाते हुए वाहनों का पंजीयन रद्द करना शुरू कर दिया है।
करीब डेढ़ माह पहले गाजियाबाद में स्कूल बस में सवार एक छात्र की सर बाहर निकालने के कारण करंट लगने से मौत हो गई थी। उस बस का भी फिटनेस नहीं था। इसके बाद प्रदेश भर में चल रहीं स्कूल बसों को फिटनेस टेस्ट कराने के बाद ही सड़कों पर चलाने का आदेश दिया गया था। परिवहन विभाग ने अभियान चलाकर विद्यालय प्रबंधन से वाहनों का फिटनेस करानें को कहा था। इसके बाद भी अभी विद्यालय के जिम्मेदार नहीं जागे हैं।
परिवाहन विभाग में 602 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें आधे से भी ज्यादा 370 वाहन बिना फिटनेस के दर्ज थे। जब अभियान चलाया गया तो 108 वाहनों की फिटनेस हो गई थी लेकिन फिर भी 262 वाहनों का फिटनेस नहीं हो सका था। परिवहन विभाग ने विद्यालय प्रबंधन को बैठक के लिए भी बुलाया था लेकिन 300 से भी अधिक स्कूल प्रबंधकों में से सिर्फ 19 प्रबंधक ही बैठक में उपस्थित हुए थे। इसे लेकर विभाग ने काफी नाराजगी भी जताई थी।
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कई बार परिवहन विभाग ने नोटिस जारी करते हुए भी विद्यालय प्रबंधन को चेताया था फिर भी विद्यालय प्रबंधन नहीं जागा। इधर परिवहन विभाग ने लापरवाही को देखते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। 262 अनफिट वाहनों में से 39 स्कूली वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भी 223 वाहन ऐसे हैं जो अनफिट हैं।
अभिभावक स्वेदश ने बताया कि ऐसे वाहन जो अनफिट हैं, उनके खिलाफ परिवहन विभाग को कार्रवाई तो करनी ही चाहिए, साथ ही विद्यालय के नाम को भी उजागर करना चाहिए ताकि शर्म के कारण विद्यालय के जिम्मेदारों को अपने वाहनों का फिटनेस कराना पड़े।
कई बार विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया। चेतावनी देने के बाद भी जब विद्यालय प्रबंधन ने वाहनों का फिटनेस नहीं कराया तो 262 वाहनों में से 39 वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया। अन्य 223 वाहनों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-माला बाजपेई, एआरटीओ प्रशासन
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करीब डेढ़ माह पहले गाजियाबाद में स्कूल बस में सवार एक छात्र की सर बाहर निकालने के कारण करंट लगने से मौत हो गई थी। उस बस का भी फिटनेस नहीं था। इसके बाद प्रदेश भर में चल रहीं स्कूल बसों को फिटनेस टेस्ट कराने के बाद ही सड़कों पर चलाने का आदेश दिया गया था। परिवहन विभाग ने अभियान चलाकर विद्यालय प्रबंधन से वाहनों का फिटनेस करानें को कहा था। इसके बाद भी अभी विद्यालय के जिम्मेदार नहीं जागे हैं।
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परिवाहन विभाग में 602 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें आधे से भी ज्यादा 370 वाहन बिना फिटनेस के दर्ज थे। जब अभियान चलाया गया तो 108 वाहनों की फिटनेस हो गई थी लेकिन फिर भी 262 वाहनों का फिटनेस नहीं हो सका था। परिवहन विभाग ने विद्यालय प्रबंधन को बैठक के लिए भी बुलाया था लेकिन 300 से भी अधिक स्कूल प्रबंधकों में से सिर्फ 19 प्रबंधक ही बैठक में उपस्थित हुए थे। इसे लेकर विभाग ने काफी नाराजगी भी जताई थी।
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कई बार परिवहन विभाग ने नोटिस जारी करते हुए भी विद्यालय प्रबंधन को चेताया था फिर भी विद्यालय प्रबंधन नहीं जागा। इधर परिवहन विभाग ने लापरवाही को देखते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। 262 अनफिट वाहनों में से 39 स्कूली वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भी 223 वाहन ऐसे हैं जो अनफिट हैं।
अभिभावक स्वेदश ने बताया कि ऐसे वाहन जो अनफिट हैं, उनके खिलाफ परिवहन विभाग को कार्रवाई तो करनी ही चाहिए, साथ ही विद्यालय के नाम को भी उजागर करना चाहिए ताकि शर्म के कारण विद्यालय के जिम्मेदारों को अपने वाहनों का फिटनेस कराना पड़े।
कई बार विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया। चेतावनी देने के बाद भी जब विद्यालय प्रबंधन ने वाहनों का फिटनेस नहीं कराया तो 262 वाहनों में से 39 वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया। अन्य 223 वाहनों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-माला बाजपेई, एआरटीओ प्रशासन