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सीतापुर में बेड तलाश रहे राजधानी के मरीज
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सीतापुर। कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच राजधानी के अस्पतालों में संक्रमितों के भर्ती होने का संकट लगातार गहराता जा रहा है। बेड फुल होने से मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में लखनऊ के लोग इलाज के लिए सीतापुर के लोगों से संपर्क कर मदद मांग रहे हैं। रोजाना कई लोगों के फोन आ रहे हैं। वह लखनऊ के मरीजों को सीतापुर के कोविड अस्पताल में भर्ती कराने की गुजारिश कर रहे हैं। मंगलवार को भी राजधानी के कई लोगों ने सीतापुर में रहने वाले परिचितों से फोन कर मरीज को भर्ती करवाने में मदद मांगी।
मंगलवार दोपहर ढाई बजे जिले के सरकारी महकमे के अफसर के पास लखनऊ से कॉल आती है। कॉल रिसीव करते ही उधर से आवाज आई लखनऊ के फलां बोल रहे हैं। काम की बात शुरू हुई तो उधर से कोविड मरीज के लिए एक बेड की दरकार रखी गई। राजधानी में बेडों का अकाल होने का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी तरह से एक बेड की व्यवस्था करवा दीजिए। मरीज की हालत बिगड़ रही है। लखनऊ में कोई सुनने वाला नहीं है।
फोन करने वाले ने बताया कि उसने लखनऊ में कई लोगों से बात की तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। राय दी कि सीतापुर बात कर लो, शायद वहां मदद मिल जाए। इसी उम्मीद से आपके के पास कॉल की है। ये बात भले ही आपको एक व्यक्ति की लग रही हो, लेकिन लखनऊ में जिस तरह से कोरोना को लेकर हालात दिन पर दिन भयावह होते जा रहे हैं, उससे ये दर्द सैकड़ों, हजारों लोगों का हैैै।
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ये मामला तो महज एक बानगी भर है। स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास भी लखनऊ से सीतापुर में मरीजों को भर्ती कराने के लिए फोन आते हैं, लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल है कि संभव नहीं हो पाता है। लखनऊ के मरीज को सीतापुर लाने के लिए सीएमओ से आदेश लेना पड़ता है। सीएमओ आसानी से आदेश देते नहीं है।
आदेश देकर वह खुद सवालों के घेरे में आ जाएंगे, इसलिए बचते हैं। सीतापुर के लोगों को लखनऊ के अस्पतालों की जरूरत पड़ती है, जबकि कोरोना काल में ठीक उलटा हो रहा है। लखनऊ के मरीज को सीतापुर रेफर करना भी अपने आप में बड़ा सवाल है, इसलिए बचते रहते हैं।
लखनऊ जाने से कतरा रहे सीतापुर के लोग
लखनऊ में जारी कोरोना के कहर से आसपास के जनपदों के लोगों की रूह कांप रही है। सीतापुर के जिले के लोग लखनऊ यात्रा से कतराने लगे हैं। एआरएम विमल राजन बताते हैं कि हां, सही है। कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोग अब लखनऊ जाने से कतराने लगे हैं। इसका असर रोडवेज की कमाई पर सीधा पड़ रहा है। बमुश्किल 60 से 70 फीसदी सीट ही भर पा रही हैं। जबकि अभी कोविड के चलते कोई संस्थान बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर संस्थान बंद होने शुरू हो गए तो लोड पर बड़ा असर पड़ेगा।
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मंगलवार दोपहर ढाई बजे जिले के सरकारी महकमे के अफसर के पास लखनऊ से कॉल आती है। कॉल रिसीव करते ही उधर से आवाज आई लखनऊ के फलां बोल रहे हैं। काम की बात शुरू हुई तो उधर से कोविड मरीज के लिए एक बेड की दरकार रखी गई। राजधानी में बेडों का अकाल होने का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी तरह से एक बेड की व्यवस्था करवा दीजिए। मरीज की हालत बिगड़ रही है। लखनऊ में कोई सुनने वाला नहीं है।
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फोन करने वाले ने बताया कि उसने लखनऊ में कई लोगों से बात की तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। राय दी कि सीतापुर बात कर लो, शायद वहां मदद मिल जाए। इसी उम्मीद से आपके के पास कॉल की है। ये बात भले ही आपको एक व्यक्ति की लग रही हो, लेकिन लखनऊ में जिस तरह से कोरोना को लेकर हालात दिन पर दिन भयावह होते जा रहे हैं, उससे ये दर्द सैकड़ों, हजारों लोगों का हैैै।
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ये मामला तो महज एक बानगी भर है। स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास भी लखनऊ से सीतापुर में मरीजों को भर्ती कराने के लिए फोन आते हैं, लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल है कि संभव नहीं हो पाता है। लखनऊ के मरीज को सीतापुर लाने के लिए सीएमओ से आदेश लेना पड़ता है। सीएमओ आसानी से आदेश देते नहीं है।
आदेश देकर वह खुद सवालों के घेरे में आ जाएंगे, इसलिए बचते हैं। सीतापुर के लोगों को लखनऊ के अस्पतालों की जरूरत पड़ती है, जबकि कोरोना काल में ठीक उलटा हो रहा है। लखनऊ के मरीज को सीतापुर रेफर करना भी अपने आप में बड़ा सवाल है, इसलिए बचते रहते हैं।
लखनऊ जाने से कतरा रहे सीतापुर के लोग
लखनऊ में जारी कोरोना के कहर से आसपास के जनपदों के लोगों की रूह कांप रही है। सीतापुर के जिले के लोग लखनऊ यात्रा से कतराने लगे हैं। एआरएम विमल राजन बताते हैं कि हां, सही है। कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोग अब लखनऊ जाने से कतराने लगे हैं। इसका असर रोडवेज की कमाई पर सीधा पड़ रहा है। बमुश्किल 60 से 70 फीसदी सीट ही भर पा रही हैं। जबकि अभी कोविड के चलते कोई संस्थान बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर संस्थान बंद होने शुरू हो गए तो लोड पर बड़ा असर पड़ेगा।