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Sitapur News: 11 हजार दीयों से जगमगाएगा गंगासागर तीर्थ
Thu, 09 Nov 2023 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 09 Nov 2023 11:53 PM IST
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रामकोट (सीतापुर)। दिवाली पर क्षेत्र में स्थित गंगासागर तीर्थ ग्यारह हजार दीपकों से जगमगाते नजर आएगा। इस दिन आस पास के ग्रामीण अपने इस आस्था के केंद्र पर दीपक जलाने पहुंचेंगे। इसके लिए तीर्थ पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। वहीं, दीपावली के अवसर पर रामेश्वरम मंदिर पर 5 दिन के मेले का भी आयोजन होगा। मेले के शुभारंभ के साथ यहां विशेष आतिशबाजी भी की जाएगी।
स्थानीय निवासी बैजनाथ बाजपेयी ने बताया कि इस मंदिर का इंतिहास पांच सौ साल पुराना है। यहां दीपदान व दीपक जलाने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि पृथ्वीराज चौहान के राज्य में यहां कल्याण सिंह व दान सिंह नाम के दो राजा हुए। जब ये दोनों राजा दिवंगत हो गए तो उनके किले ध्वस्त हो गए। इसी मलबे पर रामकोट बसा है। इसी टीले की वज़ह से यह गांव काफी ऊंचाई पर बसा हुआ है।
राजा हरदेवबक्श ने बनवाया था मंदिर
करीब 500 वर्ष पहले यहाँ राजा हरदेवबक्श सिंह ने विशाल गंगासागर तीर्थ और रामेश्वरम मंदिर का निर्माण कराया। वहीं, कई देवी देवताओं के मंदिर स्थापित किए। राजा हरदेवबक्स सिंह ने अपने किले से लेकर गंगासागर तीर्थ तक एक सुरंग का भी निर्माण करवाया था, जिसमें रानी अपनी दासियों के साथ स्नान करने के लिए तीर्थ तक आती थीं। लोगों की ऐसी मान्यता भी है कि यहाँ रामेश्वरम मंदिर की सर्वप्रथम पूजा आज भी किसी अदृश्य शक्ति द्वारा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि कई बार आंखों के सामने ही बिल्वपत्र और पुष्प अर्पित हो जाते हैं और पता भी नहीं चल पाता कि कौन आया।
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राजा हरदेवबक्श सिंह ने ही यहां दीपावली मेले का शुभारंभ कराया जो कि प्रत्येक वर्ष पुरानी परंपरा के अनुसार होता आ रहा है। राजा हरदेवबक्श सिंह के द्वारा क्षेत्र में लगभग सवा लाख पेड़ लगवाए गए जो कि लखपेड़ा के नाम से मशहूर है।
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स्थानीय निवासी बैजनाथ बाजपेयी ने बताया कि इस मंदिर का इंतिहास पांच सौ साल पुराना है। यहां दीपदान व दीपक जलाने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि पृथ्वीराज चौहान के राज्य में यहां कल्याण सिंह व दान सिंह नाम के दो राजा हुए। जब ये दोनों राजा दिवंगत हो गए तो उनके किले ध्वस्त हो गए। इसी मलबे पर रामकोट बसा है। इसी टीले की वज़ह से यह गांव काफी ऊंचाई पर बसा हुआ है।
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राजा हरदेवबक्श ने बनवाया था मंदिर
करीब 500 वर्ष पहले यहाँ राजा हरदेवबक्श सिंह ने विशाल गंगासागर तीर्थ और रामेश्वरम मंदिर का निर्माण कराया। वहीं, कई देवी देवताओं के मंदिर स्थापित किए। राजा हरदेवबक्स सिंह ने अपने किले से लेकर गंगासागर तीर्थ तक एक सुरंग का भी निर्माण करवाया था, जिसमें रानी अपनी दासियों के साथ स्नान करने के लिए तीर्थ तक आती थीं। लोगों की ऐसी मान्यता भी है कि यहाँ रामेश्वरम मंदिर की सर्वप्रथम पूजा आज भी किसी अदृश्य शक्ति द्वारा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि कई बार आंखों के सामने ही बिल्वपत्र और पुष्प अर्पित हो जाते हैं और पता भी नहीं चल पाता कि कौन आया।
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राजा हरदेवबक्श सिंह ने ही यहां दीपावली मेले का शुभारंभ कराया जो कि प्रत्येक वर्ष पुरानी परंपरा के अनुसार होता आ रहा है। राजा हरदेवबक्श सिंह के द्वारा क्षेत्र में लगभग सवा लाख पेड़ लगवाए गए जो कि लखपेड़ा के नाम से मशहूर है।