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घाघरा उफनाई, 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा
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रेउसा (सीतापुर)। बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। घाघरा उफनाने से करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदियों में उफान से कटान धीमी हुई है। घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा में एक मकान रविवार को नदी में समा गया।
इसमें रहने वाला परिवार पहले ही पलायन कर चुका है। कई लोग सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। घाघरा से जुड़े नाले व पोखर उफनाने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को विवश हैं।
पिछले एक माह से नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। तीन दिनों तक जलस्तर में आई कमी के बाद रविवार को नदियों का पानी फिर ऊपर चढ़ने लगा। जलस्तर में इजाफे की गति बेहद धीमी है। पानी बढ़ने से कटान की रफ्तार काफी कम हुई है।
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घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में जलस्तर बढ़ने का असर साफ नजर आया। पचीसा में रहने वाले नन्हकन्ने की झोपड़ी लहरों में समा गई। नन्हक्कने का परिवार पहले ही यहां से पलायन कर गांव में ही दूसरी जगह शरण ले चुका है।
लिहाजा झोपड़ी नदी में समाने से घर-गृहस्थी का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
घाघरा से सीधे जुड़े क्षेत्रीय नाले व पोखर भी उफान पर हैं। ग्रामीणों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। नगीनापुरवा के परमेश्वर नाव के अभाव में रविवार को जान जोखिम में डालकर पैदल ही नाला पार करने लगे। परमेश्वर के गले तक पानी देख वहां मौजूद हर किसी की सांसें अटक गई।
घाघरा में उफान से फौजदारपुरवा, कोनी, दुर्गापुरवा, अशर्फीपुरवा, जैतहिया, मरेली, नगीनापुरवा समेत करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों के बाशिंदे सहमे हुए हैं।
दुरुस्त नहीं कराया गया अस्थायी बांध
कोनी गांव को कटान से बचाने के लिए बनाया गया बांस का अस्थायी बांध पानी के तेज बहाव में बह गया था। एसडीएम बिसवां शिशिर कुमार ने क्षतिग्रस्त बांध की मरम्मत करने के निर्देश सिंचाई विभाग को दिए थे। एक पखवाड़े बाद भी बांध दुरुस्त नहीं कराया गया है। लिहाजा, जलस्तर बढ़ने पर कोनी कटान के मुहाने पर आ पहुंचा है।
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इसमें रहने वाला परिवार पहले ही पलायन कर चुका है। कई लोग सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। घाघरा से जुड़े नाले व पोखर उफनाने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को विवश हैं।
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पिछले एक माह से नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। तीन दिनों तक जलस्तर में आई कमी के बाद रविवार को नदियों का पानी फिर ऊपर चढ़ने लगा। जलस्तर में इजाफे की गति बेहद धीमी है। पानी बढ़ने से कटान की रफ्तार काफी कम हुई है।
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घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में जलस्तर बढ़ने का असर साफ नजर आया। पचीसा में रहने वाले नन्हकन्ने की झोपड़ी लहरों में समा गई। नन्हक्कने का परिवार पहले ही यहां से पलायन कर गांव में ही दूसरी जगह शरण ले चुका है।
लिहाजा झोपड़ी नदी में समाने से घर-गृहस्थी का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
घाघरा से सीधे जुड़े क्षेत्रीय नाले व पोखर भी उफान पर हैं। ग्रामीणों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। नगीनापुरवा के परमेश्वर नाव के अभाव में रविवार को जान जोखिम में डालकर पैदल ही नाला पार करने लगे। परमेश्वर के गले तक पानी देख वहां मौजूद हर किसी की सांसें अटक गई।
घाघरा में उफान से फौजदारपुरवा, कोनी, दुर्गापुरवा, अशर्फीपुरवा, जैतहिया, मरेली, नगीनापुरवा समेत करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों के बाशिंदे सहमे हुए हैं।
दुरुस्त नहीं कराया गया अस्थायी बांध
कोनी गांव को कटान से बचाने के लिए बनाया गया बांस का अस्थायी बांध पानी के तेज बहाव में बह गया था। एसडीएम बिसवां शिशिर कुमार ने क्षतिग्रस्त बांध की मरम्मत करने के निर्देश सिंचाई विभाग को दिए थे। एक पखवाड़े बाद भी बांध दुरुस्त नहीं कराया गया है। लिहाजा, जलस्तर बढ़ने पर कोनी कटान के मुहाने पर आ पहुंचा है।