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हर आंख नम, हर गली गमगीन

Sat, 29 May 2021 11:55 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 29 May 2021 11:55 PM IST
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Every eye moist, every street inconsolable
कमलापुर (सीतापुर)। नम आंखें... गलियों में सन्नाटा और जुबां पर बस मार्मिक मंजर...। कमलापुर के गांव हनुमानपुर में शनिवार का दिन इसी में बीता। बीती रात शादी समारोह में करंट से चार लोगों की मौत के बाद शनिवार को हर आंख नम और हर गली गमगीन दिखी। शनिवार सुबह रामचंद्र की अर्थी गांव के बाहर पहुंची। उसके दस साल के बेटे सर्वेश ने पिता की चिता को आग दी। ये मार्मिक मंजर देखकर कोई भी अपने आप को रोक नहीं सका। सभी की आंखें डबडबा गईं।
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यूं तो रोज की तरह शनिवार सुबह भी हनुमानपुर में लालिमा ओढ़कर सूरज निकला। लेकिन लोगों के चेहरे से मुस्कान गायब थी। आंखें नम थीं। गलियों में सन्नाटा पसरा था। चेहरा लटकाए लोग दरवाजों पर बैठे थे। हर किसी की जुबां पर भयावह मंजर को लेकर चर्चाएं थी। जिधर देखो, उधर लोग बिलख रहे थे। इस हादसे में जान गवांने वाले चार लोगों में से रामचंद्र इसी गांव का रहने वाला था। उसके घर से रुक-रुककर आ रही करुण कंद्रन से हर किसी का कलेजा चाक हो रहा था।
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हादसे का सदमा लोगों को इस कदर लगा था कि गांव के बहुत से लोग खेती-किसानी के लिए खेतों को नहीं गए। शादी वाले घर के बजाय रामचंद्र के घर पर भीड़ लगी थी। हर कोई परिवारीजनों दिलासा दे रहा था, इस बीच अल सुबह गांव में शव पहुंचते ही मृतक के परिवारीजनों की चीत्कारों से हर आंख रो पड़ी।
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रामचंद्र की पत्नी पर दोहरी जिम्मेदारी
हादसे में जान गंवाने वाले रामचंद्र के परिवार पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वह घर का एकमात्र सहारा था। वहीं परिवार का भरण पोषण करता था। वह पत्नी के अलावा बेटा सर्वेश (10), बेटी पूनम (16), पूर्ति (13) और प्रिया (6) को छोड़ गया है। पति की मौत के बाद पत्नी पर दोहरी जिम्मेदारी आ पड़ी है। अब उसे मां के साथ पिता, दोनों का फर्ज अदा करना होगा।

गांव में नहीं जलेेे चूल्हे
हादसे के बाद हनुमानपुर गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। गांव का हाल ये है कि शनिवार को अधिकतर घरों चूल्हे नहीं जले। कई घरों के चूल्हों की राख भी वैसे ही पड़ी रही, जैसे शुक्रवार को थी। ग्रामीण रामचंद्र के परिवारीजनों के साथ ही बरात वाले घर के लोगों को ढांढ़स बधाने में लगे रहे। नौकरी पेशा लोग ड्यूटी पर नहीं गए। गांव में काम काज ठप रहा।
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