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Sitapur News: पंचायत चुनाव कराने की मांग फिर तेज
Sun, 28 Jun 2026 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:06 AM IST
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सीतापुर। हाईकोर्ट के आदेश से जिले के 1,588 प्रधान ऊहापोह में हैं। प्रशासक बने रहने या फिर हटाए जाने को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही पंचायत चुनाव कराए जाने की मांग फिर उठने लगी है। प्रधानों का कहना है कि पंचायत चुनाव ही इस मसले का स्थायी समाधान है। वहीं, विभागीय अफसर भी इसे लेकर असमंजस में हैं। शासन से दिशा निर्देश मिलने पर उसके अनुरूप कार्य किए जाने की बात अधिकारी कह रहे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के सरकार के फैसले को सांविधानिक प्रावधानों के विपरीत बताया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि जिन नियमों के तहत प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है, उन नियमों को पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने यह आदेश व टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है। समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है। आयोग चुनाव कराने को पूरी तरह तैयार है। चुनाव प्रक्रिया केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण रुकी हुई है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई तय करते हुए सरकार को चुनाव की रूपरेखा पेश करने का आदेश दिया है। इसके बाद से प्रधानों के प्रशासन बने रहने और चुनाव कराए जाने को लेकर कयासों का दौर चल निकला है। प्रधानों में असमंजस है और पूरे मामले का पटाक्षेप करने को लेकर पंचायत चुनाव कराने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है।
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खैराबाद ब्लॉक की ग्राम पंचायत बनेहटा की प्रधान रामदुलारी कहती हैं कि अभी प्रशासक बनाने की प्रक्रिया पूरी हो पाई थी, डोंगल चले न कोई भुगतान हो पाया। इस बीच हाईकोर्ट के आदेश से संशय खड़ा हो गया है। रामदुलारी के मुताबिक, गांव में हैंडपंप खराब हो, बिजली न आए, नाली अवरुद्ध हो कोई अन्य काम। ग्रामीण सबसे पहले प्रधान से ही संपर्क करते हैं। प्रधान हटे तो गांवों का प्रत्येक कामकाज प्रभावित होगा। प्रधानों का कहना है कि पंचायत चुनाव कराया जाना ही इस मसले का समाधान है।
पंचायत चुनाव कराना इस मसले का स्थायी समाधान
अगर प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला सांविधानिक प्रावधानों के विपरीत है, तो सरकार को आदेश नहीं जारी करना था। हाईकोर्ट के इस आदेश को लेकर संगठन अपना पक्ष भी कोर्ट में रखेगा। हम कानून को मानने वाले लोग हैं। पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने से यह मसला खड़ा हुआ है। हमारी मांग है कि पंचायत चुनाव करा दिए जाएं। इस मसले का स्थायी समाधान पंचायत चुनाव कराना ही है।
- गोविंद प्रसाद, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रधान संगठन
व्यवस्था यथावत, शासन से निर्देश मिलने पर कराएंगे अनुपालन
प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के संबंध में आगे क्या करना है इसे लेकर शासन से अभी तक कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। फिलहाल व्यवस्था यथावत रहेगी। शासन से निर्देश मिलने पर उनका अनुपालन कराया जाएगा।
- डॉ. निरीश चंद्र साहू, डीपीआरओ
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के सरकार के फैसले को सांविधानिक प्रावधानों के विपरीत बताया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि जिन नियमों के तहत प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है, उन नियमों को पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने यह आदेश व टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है। समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है। आयोग चुनाव कराने को पूरी तरह तैयार है। चुनाव प्रक्रिया केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण रुकी हुई है।
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कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई तय करते हुए सरकार को चुनाव की रूपरेखा पेश करने का आदेश दिया है। इसके बाद से प्रधानों के प्रशासन बने रहने और चुनाव कराए जाने को लेकर कयासों का दौर चल निकला है। प्रधानों में असमंजस है और पूरे मामले का पटाक्षेप करने को लेकर पंचायत चुनाव कराने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है।
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खैराबाद ब्लॉक की ग्राम पंचायत बनेहटा की प्रधान रामदुलारी कहती हैं कि अभी प्रशासक बनाने की प्रक्रिया पूरी हो पाई थी, डोंगल चले न कोई भुगतान हो पाया। इस बीच हाईकोर्ट के आदेश से संशय खड़ा हो गया है। रामदुलारी के मुताबिक, गांव में हैंडपंप खराब हो, बिजली न आए, नाली अवरुद्ध हो कोई अन्य काम। ग्रामीण सबसे पहले प्रधान से ही संपर्क करते हैं। प्रधान हटे तो गांवों का प्रत्येक कामकाज प्रभावित होगा। प्रधानों का कहना है कि पंचायत चुनाव कराया जाना ही इस मसले का समाधान है।
पंचायत चुनाव कराना इस मसले का स्थायी समाधान
अगर प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला सांविधानिक प्रावधानों के विपरीत है, तो सरकार को आदेश नहीं जारी करना था। हाईकोर्ट के इस आदेश को लेकर संगठन अपना पक्ष भी कोर्ट में रखेगा। हम कानून को मानने वाले लोग हैं। पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने से यह मसला खड़ा हुआ है। हमारी मांग है कि पंचायत चुनाव करा दिए जाएं। इस मसले का स्थायी समाधान पंचायत चुनाव कराना ही है।
- गोविंद प्रसाद, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रधान संगठन
व्यवस्था यथावत, शासन से निर्देश मिलने पर कराएंगे अनुपालन
प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के संबंध में आगे क्या करना है इसे लेकर शासन से अभी तक कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। फिलहाल व्यवस्था यथावत रहेगी। शासन से निर्देश मिलने पर उनका अनुपालन कराया जाएगा।
- डॉ. निरीश चंद्र साहू, डीपीआरओ