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दिग्गजों की सियासी चाल से दौड़ी साइकिल
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सीतापुर। पंचायत चुनावों में साइकिल तो दौड़ी ही, सपा के दिग्गज भी सियासी चाल चलकर अपने परिवारीजनों को जिताकर साख बचाने में कामयाब हो गए। दो पूर्व मंत्री अपने परिवारीजनों को जिला पंचायत सदस्य बनाने में सफल रहे। जिलाध्यक्ष ने पत्नी को जिले के सर्वोच्य सदन में पहुंचा दिया। इस प्रदर्शन से सत्ता दल सोचने को मजबूर हो गया है।
पंचायत चुनाव में पार्टी के साथ दिग्गजों ने भी उम्दा प्रदर्शन किया है। महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र वर्मा अपनी भाभी विजया वर्मा को वार्ड संख्या 68 से चुनाव जितवा दिया है। पूर्व कारागार मंत्री रामपाल राजवंशी अपनी बहू संगीता को वार्ड संख्या 47 से विजयश्री दिलाने में कामयाब रहे। पार्टी के जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव ने वार्ड संख्या 34 से पत्नी विंदेश्वरी यादव को जिता लिया है।
इससे पहले जिलाध्यक्ष खुद जिला पंचायत सदस्य थे। चुनाव में इन दिग्गजों ने प्रतिष्ठा दांव पर लगा थी। मिश्रिख से भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव के विरोध के चलते रामपाल राजवंशी के लिए चुनाव बहुत ही कठिन हो गया था। ऐसे में उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ी। पूर्व मंत्री ने डोर-टू-डोर जाकर वोट मांगे।
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महमूदाबाद में विधायक नरेंद्र वर्मा ने एक बार फिर ताकत का एहसास करा दिया। उन्होंने क्षेत्र की लगभग सभी सीटें सपा की झोली में डाल दीं। दिग्गजों की इस कामयाबी से सपा खेमे में जश्न का माहौल है। सपाई मिशन 2022 को लेकर और ऊर्जावान हो गए हैं। पार्टी नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं की निष्ठा में इजाफा हो गया है। चुनावी चक्रव्यूह में सपा के दिग्गजों को घेरने में नाकामयाब रही भाजपा में हार के कारणों पर चार्चाओं को दौर शुरू हो गया है। भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपने-अपने तर्क देकर कारणों की व्याख्या करने लगे हैं।
अब निर्दलीय पर नजर
अभी जिले में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नजर प्रमुखी और जिला पंचायत अध्यक्षी की कुर्सी पर है। सूत्रों की माने तो बीजेपी केन्द्रीय मंत्री अमित शाह की थ्योरी को अपनाकर निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों को साथ लेकर जिला पंचायत अध्यक्षी हथियाने की गणित बनानी शुरू कर दी है। इसमें पार्टी कितना कामयाब होगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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पंचायत चुनाव में पार्टी के साथ दिग्गजों ने भी उम्दा प्रदर्शन किया है। महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र वर्मा अपनी भाभी विजया वर्मा को वार्ड संख्या 68 से चुनाव जितवा दिया है। पूर्व कारागार मंत्री रामपाल राजवंशी अपनी बहू संगीता को वार्ड संख्या 47 से विजयश्री दिलाने में कामयाब रहे। पार्टी के जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव ने वार्ड संख्या 34 से पत्नी विंदेश्वरी यादव को जिता लिया है।
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इससे पहले जिलाध्यक्ष खुद जिला पंचायत सदस्य थे। चुनाव में इन दिग्गजों ने प्रतिष्ठा दांव पर लगा थी। मिश्रिख से भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव के विरोध के चलते रामपाल राजवंशी के लिए चुनाव बहुत ही कठिन हो गया था। ऐसे में उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ी। पूर्व मंत्री ने डोर-टू-डोर जाकर वोट मांगे।
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महमूदाबाद में विधायक नरेंद्र वर्मा ने एक बार फिर ताकत का एहसास करा दिया। उन्होंने क्षेत्र की लगभग सभी सीटें सपा की झोली में डाल दीं। दिग्गजों की इस कामयाबी से सपा खेमे में जश्न का माहौल है। सपाई मिशन 2022 को लेकर और ऊर्जावान हो गए हैं। पार्टी नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं की निष्ठा में इजाफा हो गया है। चुनावी चक्रव्यूह में सपा के दिग्गजों को घेरने में नाकामयाब रही भाजपा में हार के कारणों पर चार्चाओं को दौर शुरू हो गया है। भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपने-अपने तर्क देकर कारणों की व्याख्या करने लगे हैं।
अब निर्दलीय पर नजर
अभी जिले में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नजर प्रमुखी और जिला पंचायत अध्यक्षी की कुर्सी पर है। सूत्रों की माने तो बीजेपी केन्द्रीय मंत्री अमित शाह की थ्योरी को अपनाकर निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों को साथ लेकर जिला पंचायत अध्यक्षी हथियाने की गणित बनानी शुरू कर दी है। इसमें पार्टी कितना कामयाब होगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।