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दहेज लोभी पति व सास-ससुर को सात-सात वर्ष की कैद
Updated Thu, 14 Dec 2017 12:03 AM IST
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दहेज लोभी पति व सास-ससुर को सात-सात वर्ष की कैद
सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश सूर्य प्रकाश शर्मा ने दहेज की प्रताड़ना के चलते पीड़िता द्वारा की गई आत्महत्या के एक मामले में मृतका के पति व सास-ससुर को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अफान अहमद सिद्दीकी ने की।
रामपुर कला थानाक्षेत्र के ग्राम ईश्वरवारा निवासी दिवाकर मिश्रा की पत्नी विद्यावती की 14 जनवरी 2004 को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।
जिसकी प्राथमिकी मृतका की मां शांति देवी द्वारा दर्ज कराकर अपने दामाद दिवाकर उसके पिता नन्हेलाल व मां सरोजनी को नामजद कराया गया था।
शांति के मुताबिक दहेज में रंगीन टीवी और मोटरसाइकिल की मांग को लेकर विद्यावती को उसके ससुरालीजन परेशान करते थे।
इस मामले में विवेचना करते हुए पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। जिन्हें सुनवाई के दौरान आए साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाते हुए आत्महत्या के दुष्प्रेरण के आरोप में सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गई।
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सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश सूर्य प्रकाश शर्मा ने दहेज की प्रताड़ना के चलते पीड़िता द्वारा की गई आत्महत्या के एक मामले में मृतका के पति व सास-ससुर को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अफान अहमद सिद्दीकी ने की।
रामपुर कला थानाक्षेत्र के ग्राम ईश्वरवारा निवासी दिवाकर मिश्रा की पत्नी विद्यावती की 14 जनवरी 2004 को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।
जिसकी प्राथमिकी मृतका की मां शांति देवी द्वारा दर्ज कराकर अपने दामाद दिवाकर उसके पिता नन्हेलाल व मां सरोजनी को नामजद कराया गया था।
शांति के मुताबिक दहेज में रंगीन टीवी और मोटरसाइकिल की मांग को लेकर विद्यावती को उसके ससुरालीजन परेशान करते थे।
इस मामले में विवेचना करते हुए पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। जिन्हें सुनवाई के दौरान आए साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाते हुए आत्महत्या के दुष्प्रेरण के आरोप में सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गई।
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