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ट्राला से टकराई कार, दारोगा की मौत, सिपाही घायल

Fri, 04 Nov 2022 12:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2022 12:01 AM IST
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Car accident
मृतक एसआई मनीष सिंह। - फोटो : SITAPUR
शुक्लागंज (उन्नाव)/सीतापुर। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर बुधवार देर रात बेकाबू कार अनियंत्रित होकर दूसरे लेन में ट्राला से टकरा गई। हादसे में सीतापुर जिले के सकरन थाने में एसओ के पद पर तैनात दारोगा मनीष कुमार सिंह (38) की मौत हो गई, जबकि उनका हमराही प्रशांत तोमर गंभीर रूप से घायल हो गया।
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सीतापुर में उनके साथियों ने मौत की खबर सुनते ही काफी दुख जताया है। सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर और उच्चाधिकारियों ने बताया कि मनीष सिंह का बर्ताव सबके लिए दोस्त जैसा होता था। थाने पर आने वाली हर समस्या को वह मिलकर सुलझा लेते थे। मौत की खबर सुनकर उनके साथियों को काफी देर तक तो या विश्वास ही नहीं हुआ की मनीष सिंह उनके बीच नहीं है। घटना के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर भी दुख जताया है।
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मूलरूप से फतेहपुर के बिंदकी ईशापुर निवासी मनीष कुमार सिंह के परिवार में पत्नी गोल्डी और दो वर्षीय बेटा अगस्या, मां रेशम और छोटा भाई मुकुल हैं। बुधवार रात मनीष कुमार अपने हमराही प्रशांत तोमर के साथ कार से झांसी कोर्ट में गवाही के लिए जा रहे थे। कानपुर लखनऊ हाईवे पर जाजमऊ के कल्लूपुरवा में घोड़ा फैक्टरी के पास अचानक प्रशांत को झपकी आ गई। उनकी कार अनियंत्रित होकर दूसरी लेन में कानपुर से लखनऊ जा रहे ट्राला में टकरा गई। हादसे की सूचना पर
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जाजमऊ पुलिस चौकी प्रभारी हशमत अली फोर्स के साथ पहुंचे और दोनों घायलों को गोविंदनगर स्थित रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां उपचार के दौरान मनीष ने दम तोड़ दिया, जबकि प्रशांत की हालत गंभीर बनी हुई है। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद मनीष के शव को पुलिस लाइन भेजा गया, जहां अंतिम सलामी दी गई। इसके बाद शव को उनके गृह जनपद भेज दिया गया।
घर में मचा कोहराम
मनीष की मौत की खबर सुनकर परिजनों में कोहराम मच गया। गुरुवार को रोते बिलखते पोस्टमार्टम हाउस पहुंची पत्नी सुमन व परिवार के अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं, पिता की मौत से अंजान दो वर्षीय बेटा अगस्या एक सिपाही की गोद में खेलता रहा।
पिता की जगह मिली थी नौकरी
परिजनों के अनुसार, मनीष के पिता कमलेश सिंह भी दारोगा थे। बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था। इसके बाद मनीष को मृतक आश्रित में 2015-16 बैच में दारोगा की नौकरी मिली थी।

थोड़ी देरी हो जाती तो सरकारी पिस्टल हो सकती थी गायब
दुर्घटना स्थल से कुछ दूरी पर घनी आबादी वाली बस्ती है। यहां रातभर लोगाें का आना जाना लगा रहता है। कार में दरोगा और सिपाही सिविल ड्रेस में थे। वर्दी कार में ही रखी थी। कार में एक लैपटॉप, करीब 14 हजार रुपये, दरोगा की सरकारी पिस्टल थी। यदि समय पर पुलिस न पहुंचती तो यह सब चोरी हो सकता था।
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