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साढ़े चार साल बाद बिछड़ी आरती को परिवार से मिलाया

Tue, 10 Aug 2021 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 11:51 PM IST
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After four and a half years, Aarti was reunited with the family
सीतापुर। साढ़े चार साल पहले की बात है। एक महिला अपने भाई के साथ मायके जाने के लिए निकलती है। फिर क्या होता है... किसी को कुछ पता नहीं। 12 सितंबर 2020 को लखनऊ के काकोरी इलाके में सड़क किनारे गंभीर हालत में वह पाई जाती है। खबर होने पर पुलिस पहुंचती है, लेकिन महिला कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं थी।
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पुलिस उसे अस्पताल में भर्ती कराती है। इलाज के बाद हालत में मामूली सुधार होने पर कोर्ट में पेश किया जाता है, जहां पर महिला अपना नाम भी सही नहीं बता पाती है। ऐसे में कोर्ट ने महिला को पुलिस के सुपुर्द करते हुए देखरेख के आदेश दिए।
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पुलिस ने लखनऊ की एक मर्सी हाउस संस्था से मदद ली। संस्था की बिंसी पॉल, उनके पति ओमेनकुट्टन पॉल, बेटा स्टैपेंशन पॉल, बेटी हेब्जबा पॉल, बैलिसी पॉल ने मिलकर महिला का निशुल्क इलाज शुरू किया। लंबे समय तक चले इलाज के बाद महिला स्वस्थ हुई और उसने पता बताया। फिर संस्था ने संपर्क में रहने वाले रिटायर्ड सीओ सुधीर शर्मा से इस मामले में मदद मांगी।
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सीओ ने इंसानियत का परिचय देते हुए अपने नेटवर्क के बूते महिला के घर तक उसके जीवित होने की खबर पहुंचाई। फिर क्या था, किसी की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार के लोग लखनऊ गए और महिला को लेकर खुशी-खुशी घर ले गए।
घर आते ही साढ़े चार साल बाद महिला को देखकर सभी की आंखें भर आईं। अब उसे देखने के लिए उसके घर आने वालों का सिलसिला जारी है। पूरा गांव खुश है। परिवार की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।
यह कोई काल्पनिक स्टोरी नहीं बल्कि सीतापुर के सदरपुर इलाके के बनवीरपुर गांव की रहने वाली उस आरती की कहानी है, जिसको उसके अपनों के अलावा पूरे गांव ने इस दुनिया में नहीं होने की बात दिल में बिठा ली थी, पर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।
पति की मौत के सदमे से खो बैठी थी याददाश्त
बनवीरपुर गांव के प्रधान पति कमलेेश बताते हैं कि आरती के पति की मौत सात साल पहले हो गई थी। पति की मौत के सदमे को वह बर्दाश्त नहीं कर सकी। मौत का सदमा ऐसा लगा कि वह याददाश्त खो बैठी। यही वजह थी कि जब लखनऊ के काकोरी में वह पुलिस को मिली तो वह सिर्फ अपना नाम बता पा रही थी, इसके सिवा कुछ नहीं।
बायोमैट्रिक से मिला पता
11 माह पहले लखनऊ की सड़क पर गंभीर हालत में मिली महिला नाम पूछने पर फूलमती बताती थी, लेकिन करीब 11 महीने तक चले इलाज के बाद 10 दिन पहले उसने अपना नाम आरती बताया। मर्सी संस्था को लगा कि इस बार वह नाम सही बता रही है। इसके बाद उसके अंगूठे से बॉयोमैट्रिक लिया गया, जिसमें पूरी डिटेल सामने आ गई। महिला के नाम से लेकर उसके पति और जिला, थाना, गांव सब सामने आ गया। इसके जरिये वह अपनों तक पहुंच गई।
आरती को अपनों से मिलाने में एएसपी नार्थ, रिटायर्ड सीओ बने सेतु
संस्था ने दिमागी रूप से ठीक होने के बाद आरती से जिले का नाम पूछा तो उसने सीतापुर बताया। सीतापुर का नाम आते ही संस्था के संपर्क में रहने वाले सीतापुर पुलिस लाइंस में आरआई और बाद में 27वीं वाहिनी पीएसी सहायक सेनानायक की जिम्मेदारी संभाल चुुके रिटायर्ड सीओ सुधीर शर्मा से मदद मांगी। रिटायर्ड सीओ ने बताया कि सीतापुर जिला इतना बड़ा था और आरती के घर तक उसके जीवित होने की खबर पहुंचानी थी।

ऐसे में उन्होंने पुलिस ड्यूटी के दौरान साथ में रहे सीतापुर के एएसपी नार्थ डॉ. राजीव दीक्षित से बात कर पूरी कहानी बताई। एएसपी ने भी मामले को गंभीरता से लिया और सदरपुर एसओ को आदेश दिए। एसओ ने बनवीरपुर गांव के प्रधान पति से बात कर जानकारी दी। इसके बाद प्रधान पति कमलेश महिला के जेठ, बहन और, दो गवाहों को लेकर लखनऊ गए, जहां से आरती को लेकर सोमवार को गांव पहुंचे।
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