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Siddharthnagar News: बीमारियां लिए घूम रहें थे, रक्तदान किए तो पता चला हकीकत

Wed, 27 Mar 2024 11:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 27 Mar 2024 11:18 PM IST
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Were roaming around with diseases, when donated blood the truth came to light
- 4773 में से 35 यूनिट रक्त मिला संंक्रमित, एचआईबी, एचबीएसएजी, वीडीआरएल के चपेट में मिले रक्तदाताओं का शुरू हुआ इलाज
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राहुल त्रिपाठी
सिद्धार्थनगर। रक्तदान से अंजान लोगों की जान बचती है। साथ ही, रक्तदाता भी संभावित बीमारियों के जोखिम से सुरक्षित होते हैं। इसकी पुष्टि ब्लड बैंक के आंकड़े कर रहे हैं। बीते वर्ष फरवरी 2023 से फरवरी 2024 में रक्तदान के बाद की गई जांच में 35 यूनिट खून संक्रमित मिला। ब्लड बैंक की सूचना पर संबंधित रक्तदाताओं ने अपना इलाज शुरू कराया है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में स्थित ब्लड बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक फरवरी 2023 से फरवरी 2024 तक 4773 लोगों ने रक्तदान किया। इसके बाद ब्लड बैंक में विभिन्न चरणों में हुई सघन जांच में 35 यूनिट रक्त संक्रमित मिला है। इसमें छह यूनिट रक्त एचआईवी से, 16 यूनिट एचबीएसएजी से व 13 यूनिट वीडीआरएल (सिफलिस) से संक्रमित मिला था। रिपोर्ट की जानकारी संबंधित रक्तदाताओं को गोपनीय स्तर पर कॉल करके दी गई है। लिहाजा, समय रहते उन्होंने अपना इलाज शुरू कराया। ब्लड बैंक स्टाफ ने उनके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद जताई है।
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लक्षण उभरने तक जांच नहीं कराते लोग
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. मनोज तिवारी के मुताबिक जब तक लक्षण न उभरें, लोग हेपेटाइटिस बी, सी, सिफलिस की जांच नहीं कराते। रक्तदान के बाद हुई जांच में संबंधित संक्रमण का पता चलने से जाहिर है कि इन रक्तदाताओं ने भी पूर्व में जांच नहीं कराई थी। मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक में रक्तदान से पूर्व और बाद में होने वाली सभी जांचें निशुल्क होती हैं। निजी लैब में इन्हीं जांचों पर चार से पांच हजार रुपये से ज्यादा खर्च होता है।
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रक्तदान से पहले और बाद में भी होती हैं जांचें
एसएलटी अशोक कुमार मिश्र के मुताबिक रक्तदान से पूर्व ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, वजन की जांच होती है। रक्तदान के बाद हेपेटाइटिस बी, सी, ई, सिफलिस, एचआईवी, ह्यूमन टी लिम्फोट्रॉपिक (एचटीएलवी), मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, जेई, साइटोमेगलोवायरस (सीएमवी) समेत अन्य जांचें होती हैं।

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पांचवें चरण में चढ़ता है खून
-दान के बाद रक्त शोधन के लिए सेंट्रीफ्यूज होता है। यहां रेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा में बांटते हैं।
-ब्लड टाइप ग्रुप जांच फिर रक्त संक्रमण की गहन जांच होती है।
-ब्लड रीएक्टिव यानी प्रतिकूल मिलने पर नष्ट करते हैं। संक्रमण की गोपनीय सूचना रक्तदाता को दी जाती है।
-संक्रमण मुक्त लाल रक्त सेल्स को 6 डिग्री सेल्सियस पर 35 दिन, प्लेटलेट्स को पांच दिन व प्लाज्मा को लंबे समय तक फ्रीज कर सकते हैं।
-सुरक्षित रखे रक्त, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा मरीज को चढ़ाने के लिए मांग के अनुसार दिए जाते हैं।
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नष्ट कर दिया जाता है संक्रमित ब्लड
एसएलटी अशोक कुमार मिश्र ने बताया कि रक्तदाताओं से मिल खून यदि संक्रमित पाए जाते हैं। उसे 121 डिग्री सेंटीग्रेट पर गलाकर नष्ट कर दिया जाता है। इससे वह किसी भी प्रकार का लक्षण नहीं मिल पाए और कोई भी व्यक्ति इसकी चपेट में न आने पाए।
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