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हमें बाढ़ से सुरक्षा की गारंटी चाहिए, राहत सामग्री नहीं

Sun, 23 Oct 2022 11:38 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Oct 2022 11:38 PM IST
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we need guarntee of security to flood not relief supply
भनवापुर क्षेत्र के पेड़रियाजीत में प्रदर्शन करते बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
हमें बाढ़ से सुरक्षा की गारंटी चाहिए, राहत सामग्री नहीं
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भनवापुर (सिद्धार्थनगर)। लाई-भुजा बांटकर वोट बैंक बनाने का खेल खत्म होना चाहिए। बाढ़ राहत के नाम पर झुनझुना देकर छला जा रहा है। हमें बाढ़ से सुरक्षा की गारंटी चाहिए, राहत सामग्री नहीं। अधूरे बांध के कारण बाढ़ ने तबाही मचाई है। प्रभावित गांवों में नाव कम होने के कारण लोगों को परेशानी हुई। यह कहकर बाढ़ से तबाही का दंश झेलने वाले तीन गांवों के ग्रामीणों ने रविवार को सरकारी राशन का पैकेट लेने से इन्कार कर दिया।
बाढ़ प्रभावित गांव पेड़रिया जीत, बिलरिया और बढ़या के ग्रामीणों का गुस्सा रविवार को शासन व प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा। तीनों गांवों के लोगों ने ब्लॉक कार्यालय पर प्रदर्शन करके बाढ़ से सुरक्षा की गारंटी देने की मांग की। एसडीएम डुमरियागंज और डीएम को पत्र भेजकर बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने के लिए शाहपुर-भोजपुर बांध का निर्माण पूरा कराने की मांग की है। तीनों गांवों के लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान प्रशासन ने लापरवाही बरती। उनकी समस्या के प्रति ध्यान नहीं दिया। नाव तक की व्यवस्था नहीं की।
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ग्रामीणों का कहना है कि अब राहत सामग्री बांटने के नाम पर छला जा रहा है। फसल को जितना नुकसान हुआ उतना भी मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। बाढ़ की वजह से रबी की फसल की भी बुआई पर संकट है। तीन दशक से बाढ़ का दंश झेल रहे हैं, लेकिन इसके समाधान की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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जब संकट में थे तो कोई नहीं आया
करीब तीन दशक से डुमरियागंज तहसील व भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के दो से तीन सौ गांवों की करीब दो लाख की आबादी राप्ती नदी का कहर झेल रही है। बाढ़ के दौरान तीन गांवों के बीच एक नाव दी गई थी, जो नाकाफी थी। लोग बाढ़ की त्रासदी झेल रहे थे, मगर हाल जानने कोई नेता, सांसद व जिम्मेदार अधिकारी गांव तक नहीं आया। अब बाढ़ राहत के नाम पर जले पर नमक छिड़का जा रहा है, जो स्वीकार नहीं है।
- नरेंद्र दुबे, ग्राम प्रधान, बढ़या
बांध बनवाएं, राहत सामग्री नहीं चाहिए
राप्ती नदी सैकड़ों गांवों के लिए अभिशाप बन गई है। राजनीतिक हितों को साधने के चक्कर में लोगों के हितों को नजरंदाज किया जा रहा है। जितनी लागत शाहपुर-भोजपुर बांध के निर्माण में आएगी, उससे दस गुना खर्च कर लाई, भूजा, चना बांट दिया जाता है और समस्या बनी रहती है। हम लोगों को बाढ़ से निजात दिलाई जाए, राहत सामग्री नहीं चाहिए।
- सोनू दुबे, पेड़रियाजीत
हर साल बाढ़ का दंश झेलना मजबूरी
हर साल बाढ़ का दंश झेलना हम सब की मजबूरी बन गई है। घर में पानी भरने के कारण छतों पर पन्नी तानकर किसी तरह 10 दिन काटने पड़े। उस समय हम लोगों के बीच कोई भी जन प्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया। डूबे धान के खेत से पानी हट गया, बालियां तो दिखती हैं, मगर उसमें दाना नहीं है। हमारी जीविका कैसे चलेगी? बाढ़ राहत सामग्री से कितने दिन परिवार का पेट भरेगा? हम लोगों को बाढ़ राहत नहीं, सुरक्षा के लिए बांध का निर्माण पूरा होना चाहिए। - रुक्मिणी, पेड़रियाजीत
हजारों बीघा फसल बर्बाद, मुआवजा 2200 रुपये
बाढ़ के दौरान तूफानी दौरा, राहत सामग्री वितरण, पानी में घुस कर फोटो खिंचवाने से अधिकारी और जनप्रतिनिधि का कार्य हो जाता है, लेकिन हमारी समस्या का समाधान नहीं होता है। हजारों बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई और मुआवजा सिर्फ 2200 रुपये प्रति बीघा दिया जा रहा है, जोकि लागत से भी कम है। रबी की फसल की बुआई भी समय पर नहीं हो पाएगी। हम लोग करीब तीन दशक से तबाही झेलते आ रहे हैं, जिसका समाधान केवल शाहपुर-भोजपुर बांध के निर्माण से ही निकल सकता है। - अमित दूबे, पेड़रियाजीत
ग्रामीणों के बाढ़ राहत सामग्री नहीं लेने की जानकारी नहीं है। बाढ़ जैसी समस्याओं से सुरक्षा की मांग सही है, जल्द ही शाहपुर-भोजपुर बांध को पूर्ण कराने के लिए जिलाधिकारी से समीक्षा बैठक की जाएगी। उसके बाद बांध निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

- कुणाल सिंह, एसडीएम डुमरियागंज
यह है समस्या
शाहपुर-भोजपुर बांध करीब 35 किमी लंबा है। इस बांध में जगह-जगह गैप है। मुआवजे के विवाद के कारण कई स्थानों पर बांध नहीं बन पाया है। तीन दशक से 150 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी चला जाता है। फसल बर्बाद होने से किसान आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। बांध का निर्माण कार्य पूरा हो जाए तो समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार अधूरे कार्य पूरा कराने के लिए 72 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। जून में कार्य शुरू हुआ था, लेकिन बारिश व बाढ़ के कारण कार्य अधर में रह गया।
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